
12 नवंबर 1940 को अभिनेता अमजद खान (Amjad Khan) का मुंबई में जन्म हुआ था। अमजद खान के पिता जयंत खान भी पेशे से अभिनेता थे, वहीं उनके भाई इम्तियाज खान भी एक्टिंग करते थे। कम ही लोग इस बारे में जानते हैं कि अमजद ने बतौर बाल कलाकार सिनेमा में डेब्यू किया था। अमजद ने अपनी दमदार एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीता। हालांकि अमजद खान का अंतिम समय अच्छा नहीं रहा और 27 जुलाई 1992 को अमजद खान ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। अमजद खान की पुण्यतिथि पर आपको बताते हैं कुछ खास बातें...
अमजद खान का करियर
साल 1951 में अमजद ने फिल्म नाजनीन से बतौर बाल कलाकार शुरुआत की थी। वहीं 17 साल की उम्र में उन्होंने 1973 में आई फिल्म हिंदुस्तान की कसम से बतौर हीरो डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने कुछ और फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट का रोल प्ले किया था। अमजद खान के हिट करियर में परवरिश, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, हीरालाल- पन्नालाल, देश प्रेमी, नास्तिक, सत्ते पे सत्ता, चमेली की शादी, हम किसी से कम नहीं, रॉकी, लव स्टोरी, कुर्बानी, नसीब, लव स्टोरी, सुहाग, राम बलराम, सीता और गीता जैसी फिल्में शामिल हैं। अमजद का नाम उन चुनिंदा सितारों में शामिल है, जिन्होंने बतौर हीरो नहीं बल्कि विलेन बनकर सभी का दिल जीता।
शूटिंग सेट पर बंधवा दी थी भैंस
अमजद खान के बारे में कहा जाता है कि वो चाय के काफी शौकीन थे। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो वो एक दिन में 50 कप से अधिक चाय पी जाते थे। अमजद के इस चाय के शौक की वजह से कैंटीन स्टाफ काफी परेशान रहता था क्योंकि दूध खत्म हो जाता था। बताया जाता है कि अपनी चाय की तलब को पूरा करने और दूध की कमी न हो पाए, इसके लिए एक बार अमजद खान ने शूटिंग सेट पर लाकर भैंस बंधवा दी थी।
कैसे बने गब्बर
अमजद खान ने वैसे तो अपने करियर में कई दमदार फिल्मों में काम किया है। उनके किरदार आज भी जुबां पर हैं, लेकिन फिल्म शोले के गब्बर का किरदार तो इतिहास के पन्नों में दर्ज गो गया है। वैसे बता दें कि गब्बर के लिए पहली पसंद अमजद खान नहीं बल्कि डैनी थे। लेकिन लेकिन उस समय डैनी फिल्म धर्मात्मा की शूटिंग में व्यस्त थे। ऐसे में सलीम खान ने गब्बर के लिए अमजद खान का नाम सुझाया और इसके आगे की कहानी तो सभी जानते हैं।
एक डायलॉग के लिए 40 रीटेक
फिल्म शोले में अमजद ने गब्बर को जिस अंदाज में निभाया, वैसे विलेन कभी किसी फिल्म में नहीं देखने को मिला और यही वजह है कि गब्बर को सभी ने पसंद किया। रिपोर्टट्स के मुताबिक अमजद का गब्बर किरदार का अंदाज उनके गांव के एक धोबी से प्रेरित था। । शूटिंग के दौरान जब अमजद खान ने धोबी की स्टाइल में डायलॉग बोलना शुरू किया तो फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी समेत पूरी यूनिट हैरान रह गई। वहीं फिल्म से जुड़ा एक और किस्सा भी है, जहां बताया जाता है कि 'कितने आदमी थे' डायलॉग को परफेक्शन से बोलने के लिए कुल 40 रीटेक लिए गए थे।