ऑस्ट्रेलिया- बड़े पैमाने पर सायबर हमले के शिकार हुए अस्पताल, स्कूल और सरकारी संस्थान, चीन पर शक!

Updated on 21-06-2020 04:03 AM
मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया में बीते महीनों के दौरान बड़े स्तर पर सायबर हमला हुए। हैकरों ने यहां के अस्पताल, स्कूल, स्वास्थ्य से जुड़ी वेबसाइट्स और सरकारी संस्थानों को अपना निशाना बनाया है। इन साइबर हमलों के पीछे चीन पर शक की सुई जा रही है। इस बारे में प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि राज्य-आधारित जटिल साइबर हैकरों ने महीनों तक सरकार, राजनीतिक निकायों, अनिवार्य सेवा प्रदाताओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के ऑपरेटरों को हर स्तर पर हैक करने की कोशिश की है।
मॉरिसन ने राजधानी कैनबरा में पत्रकारों से कहा कि हम जानते हैं कि बड़े स्तर पर हैक करने की इसकी प्रकृति के कारण यह एक जटिल मामला है। हालांकि प्रधानमंत्री ने यह बताने से साफ़ इनकार कर दिया कि ऑस्ट्रेलिया पर हो रहे साइबर अटैक के लिए ऑस्ट्रेलिया किसे जिम्मेदार मानता है। इस मामले पर सूत्रों ने जानकारी दी कि ऑस्ट्रेलिया का मानना ​​है कि चीन इस सबका जिम्मेदार है। नाम न बताने की शर्त पर एक ऑस्ट्रेलियाई सरकारी स्रोत ने रायटर को बताया कि हमें पूरा विश्वास है कि इन हमलों के पीछे चीन का हाथ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर खतरों का प्रबंधन करने के लिए ऑस्ट्रेलिया अपने सहयोगियों और सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने गुरुवार रात इस मुद्दे के बारे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ बात की। कैनबरा में चीनी दूतावास ने इस विषय पर फिलहाल किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान के प्रमुख और एक पूर्व वरिष्ठ रक्षा अधिकारी पीटर जेनिंग्स ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि तीनों देशों चीन, रूस और उत्तर कोरिया में बहुत ही ज्यादा साइबर क्षमताएं थीं लेकिन ऐसा करने का इरादा आशय और उद्देश्य एक ही देश का हो सकता है। इस देश के पास अपार क्षमताएं हैं और यह चीन है। रक्षा मंत्री लिंडा रेनॉल्ड्स ने कहा कि तेजी से बढ़ रही इन दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों ने ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सभी ऑस्ट्रेलियाई संगठनों से खतरे के प्रति सचेत रहने और अपने नेटवर्क की सुरक्षा करने का आग्रह किया। मॉरिसन ने कहा कि सरकार आने वाले महीनों में एक नई साइबर सुरक्षा रणनीति जारी करेगी और इसमें बचाव को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण फंडिंग शामिल होगी। ऑस्ट्रेलिया और उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन के साथ उसके संबंधों में तब और तनाव बढ़ गया जब उसने कोरोनोवायरस के स्रोत और प्रसार की एक अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की। कोरोना महामारी सबसे पहले पिछले साल के अंत में चीनी शहर वुहान में सामने आई थी। चीन ने हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई जौ पर डंपिंग टैरिफ लगाया है साथ ही गोमांस के आयात के बड़े हिस्से को निलंबित कर दिया। चीन ने जातिवाद के आरोपों का हवाला देते हुए अपने छात्रों और पर्यटकों को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा न करने की चेतावनी भी दी।

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