MP के माहौल में ढल गए नामीबिया और अफ्रीका के चीते, चुनौतियों भरा रहा 0 से 38 का सफर

Updated on 21-02-2026 12:22 PM
श्योपुर: भारत में चीतों की वापसी ने एक नया मुकाम हासिल किया है। प्रोजेक्ट चीता के तहत, कूनो नेशनल पार्क में तीन और शावकों का जन्म हुआ है, जिससे देश में चीतों की कुल संख्या 38 हो गई है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका से लाई गई चीता गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया है। यह भारत में चीतों के सफल प्रजनन का नौवां मामला है और अब तक 27 भारतीय मूल के चीता शावक जीवित हैं।

यह दूसरी बार है जब गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया है, जो दर्शाता है कि चीते अपने नए घर में अच्छी तरह से ढल रहे हैं और सफलतापूर्वक प्रजनन कर रहे हैं।

प्रोजेक्ट चीता के 3 साल पूरे

यह उपलब्धि तीन साल पहले शुरू हुए महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता के तीन साल पूरे होने के साथ आई है। 2022-23 में, भारत ने नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों को लाकर दुनिया का पहला अंतर-महाद्वीपीय बड़े मांसाहारी जीव का स्थानांतरण पूरा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर, 2022 को कूनो में पहले 8 चीतों को जंगल में छोड़ा था, जो भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था। तब से, इन जानवरों की मध्य प्रदेश के नए परिवेश में अनुकूलन सुनिश्चित करने के लिए वन कर्मचारियों, वन्यजीव प्रबंधकों और पशु चिकित्सकों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है।

हर जन्म के साथ बढ़ रहा भरोसा

कूनो में जन्मे हर शावक के साथ प्रोजेक्ट चीता पर भरोसा बढ़ रहा है। चीतों जैसे बड़े शिकारियों को दूसरे महाद्वीप से लाकर बसाना कोई आसान काम नहीं है। यह बेहद जोखिम भरा और पेचीदा है। इसकी कामयाबी के लिए सही आबो-हवा, पर्याप्त शिकार, बीमारियों से बचाव और लगातार निगरानी जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ता है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे भारत के लिए गर्व का पल बताते हुए उम्मीद जताई कि मादा चीता गामिनी और उसके शावक देश में चीतों के कुनबे को और विस्तार देंगे।

भारत ने दशकों तक झेली ईकोसिस्टम में चीतों की कमी

एक समय था जब भारत के मैदानों में चीते शान से दौड़ते थे, लेकिन शिकार और सिमटते जंगलों की वजह से वे विलुप्त हो गए। दशकों तक भारत के ईकोसिस्टम में उनकी कमी खलती रही। अब इस खालीपन को भरने की कोशिश हो रही है। यह सिर्फ जानवरों को बचाने का अभियान नहीं है, बल्कि इसका बड़ा मकसद घास के मैदानों को पुनर्जीवित करना, जैव-विविधता बढ़ाना और मध्य भारत में ईको-टूरिज्म के जरिए रोजगार के नए रास्ते खोलना है।

चुनौतियों भरा रहा पूरा सफर

बेशक, यह सफर चुनौतियों भरा रहा है। चीतों को एक से दूसरे महाद्वीप शिफ्ट करना दुनिया की सबसे कठिन वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में से एक है। नए माहौल में ढलना, शिकार की तलाश और इंसानी दखल से सुरक्षा जैसी चुनौतियां आज भी सामने खड़ी हैं। इसके बावजूद, भारत की जमीन पर शावकों का जन्म लेना यह बताता है कि प्रोजेक्ट सही दिशा में है। देश में अब 38 चीते हैं और 9 शावक जन्म ले चुके हैं, जिससे एक आत्मनिर्भर और स्थायी आबादी का सपना अब हकीकत के करीब लगने लगा है।

प्रोजेक्ट चीता की पूरी कहानी

1: कूनो में गामिनी नाम की मादा चीता ने दूसरी बार 3 शावकों को जन्म दिया है, जो प्रोजेक्ट की सफलता का बड़ा प्रमाण है।
2: भारत में अब तक जन्मे जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जिससे विदेशी चीतों पर निर्भरता कम हो रही है।
3: सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 चीतों को छोड़कर इस मिशन की शुरुआत की थी, जो अब एक आत्मनिर्भर आबादी की ओर बढ़ रहा है।
4: कूनो के विशेषज्ञों, डॉक्टरों और वन रक्षकों की कड़ी निगरानी के कारण शावकों के जीवित रहने की दर में सुधार हुआ है।
5: इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य न केवल चीतों को बसाना है, बल्कि भारत के घास के मैदानों को फिर से जीवित करना भी है।

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