चिदंबरम बोले- 2008 आतंकी हमलों पर PM का बयान गलत:काल्पनिक बातों को मेरे नाम से जोड़ा

Updated on 09-10-2025 11:34 AM

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने गुरुवार को 2008 के 26/11 आतंकी हमले पर पीएम मोदी के बयान को गलत बताया। चिदंबरम ने X पर लिखा कि यह पढ़कर निराशा हुई कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने काल्पनिक बातों को मेरे नाम से जोड़ दिया।

दरअसल पीएम मोदी ने बुधवार को मुंबई में कहा था कि, कांग्रेस के बड़े नेता और जो देश के गृह मंत्री (पी चिदंबरम) तक रह चुके हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि मुंबई हमले के बाद हमारी सेनाएं पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थीं। पूरा देश भी यही चाहता था। लेकिन कांग्रेस सरकार ने आतंकियों के सामने घुटने टेके थे।

पीएम ने अपने बयान में चिदंबरम का नाम नहीं लिया लेकिन उनके 30 सितंबर को दिए इंटरव्यू का जिक्र किया। हालांकि 10 दिन बाद चिदंबरम ने अपने बयान पर जारी विवाद पर फिर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि, उनकी बातों को गलत तरह से पेश किया गया।

8 अक्टूबर: मोदी बोले- 2008 में कांग्रेस ने कमजोरी का मैसेज दिया

मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा- साथियों मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी के साथ सबसे वाइब्रेंट शहरों में से एक है। 2008 में आतंकियों ने भी मुंबई शहर को बड़े हमले के लिए चुना। तब की कांग्रेस सरकार ने कमजोरी का मैसेज दिया। आतंकियों के सामने घुटने टेके। हाल ही में कांग्रेस के बड़े नेता और जो देश के गृह मंत्री तक रह चुके हैं।

उन्होंने दावा किया कि मुंबई हमले के बाद हमारी सेनाएं पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थीं। पूरा देश भी यही चाहता था, लेकिन उस नेता की माने तो किसी दूसरे देश के दबाव के कारण कांग्रेस सरकार ने भारत की सेनाओं को पाकिस्तान पर हमला करने से रोका।

30 सितंबर: चिदंबरम बोले- हमें युद्ध नहीं करने के लिए समझाया गया

मनमोहन सरकार में गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम ने 30 सितंबर को एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के बाद उनके मन में भी बदला लेने का विचार आया था, लेकिन उस वक्त की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया।

चिदंबरम ने न्यूज चैनल को बताया- पूरी दुनिया का दबाव था। हमें युद्ध नहीं करने के लिए समझाया जा रहा था। तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री दिल्ली आईं और उन्होंने कहा- कृपया एक्शन नहीं लीजिएगा। कोई आधिकारिक राज उजागर किए बिना मैं मानता हूं कि मेरे मन में प्रतिशोध की भावना आई थी।

मैंने जवाबी कार्रवाई पर PM और अन्य जिम्मेदार लोगों से चर्चा की थी। PM ने तो इस पर चर्चा हमले के दौरान ही कर ली थी। विदेश मंत्रालय का मानना था कि सीधा हमला नहीं करना चाहिए। इसके बाद सरकार ने कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया।

2008 में आतंकी हमले में 175 लोगों की जान गई थी 

मुंबई हमले में 175 लोगों की जान गई थी। 60 घंटों तक 10 आतंकियों ने मुंबई की सड़कों, ताज होटल, सीएसटी रेलवे स्टेशन, नरीमन हाउस और कामा हॉस्पिटल को निशाना बनाया था। अंधाधुंध फायरिंग की थी।

जिंदा पकड़ा था कसाब, बाद में फांसी दी

हमले के बाद 3 दिनों तक सुरक्षाबल के जवान आतंकवादियों से लड़ते रहे और 9 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। एक आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया। कसाब को हमले के अगले ही दिन, यानी 27 नवंबर को जुहू चौपाटी से गिरफ्तार किया गया था। जनवरी 2009 में स्पेशल कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई।

25 फरवरी 2009 को 11 हजार पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल की गई। इस दौरान कसाब के नाबालिग होने पर भी विवाद चलता रहा। मार्च 2010 में केस से जुड़ी सुनवाई पूरी हो गई।

3 मई 2010 को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कसाब को 26/11 हमले में दोषी पाया और 6 मई को फांसी की सजा सुनाई। 2011 में मामला बॉम्बे हाईकोर्ट गया। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कसाब को राहत नहीं दी और फांसी की सजा पर मुहर लगा दी। कसाब ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास दया याचिका भेजी, जिसे 5 नवंबर को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया।

मुंबई हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर का अप्रैल में भारत प्रत्यर्पण

2008 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा का इसी साल अप्रैल में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण किया गया है। तहव्वुर राणा को अमेरिका के शिकागो में अक्टूबर 2009 में FBI ने गिरफ्तार किया था। उस पर मुंबई के 26/11 और कोपेनहेगन में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए जरूरी सामान मुहैया कराने का आरोप था। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली की गवाही के आधार पर तहव्वुर राणा को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

राणा के भारत प्रत्यर्पण पर पी चिदंबरम ने भी कहा था कि इस मामले में पिछली सरकार भी क्रेडिट की हकदार है। उन्होंने कहा कि NDA सरकार अभी जो कुछ कर रही है उसका क्रेडिट ले सकती है, लेकिन उन्हें पिछली सरकार को भी श्रेय देना चाहिए जिसने बहुत कुछ किया है।

कांग्रेस ने दावा किया है कि को तहव्वुर राणा को भारत लाने की प्रोसेस 2009 में UPA शासन के दौरान शुरू हुई थी और इसलिए NDA सरकार को अकेले इसका सारा क्रेडिट नहीं लेना चाहिए।



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