भारत के चंद्रयान-3 का मुरीद हुआ चीन, जहर उगलने वाले ग्लोबल टाइम्स के पूर्व संपादक ने जमकर की तारीफ

Updated on 04-09-2023 02:05 PM
बीजिंग: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो को मिल रही लगातार सफलता ने दुश्मनों को भी तारीफ करने पर मजबूर कर दिया है। इसरो ने कुछ दिनों पहले ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर इतिहास रचा। आज तक कोई भी देश चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग नहीं कर सका है। वहीं, एक दिन पहले ही इसरो ने सूर्य की जानकारी इकट्ठा करने के लिए आदित्य एल-1 मिशन की सफल लॉन्चिंग की है। ऐसे में भारत का कट्टर दुश्मन चीन का मीडिया भी इसरो के काम की जमकर तारीफ कर रहा है। ग्लोबल टाइम्स ने चीनी अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक साथ काम करने पर जोर दिया है। वहीं, ग्लोबल टाइम्स के पूर्व संपादक हू शिजिन ने इसरो की खूब तारीफ की है।


हू शिजिन ने इसरो के लिए क्या लिखा

हू शिजिन ने लिखा कि दस दिन पहले भारत का अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरा। अंतरिक्ष में भारत की हालिया उपलब्धियां प्रभावशाली हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स (ट्विटर) पर किए अपने पोस्ट में इसरो को टैग भी किया है। हू शिजिन वही चीनी पत्रकार हैं, जिन्होंने गलवान संघर्ष के दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला था। उस वक्त शिजिन चीनी सेना के समर्थन में लगातार ट्वीट करते थे और लेख भी लिखते थे। उन्होंने चीनी सेना को ड्रोन के जरिए साजो-सामान डिलीवर करने का दावा भी किया था, जिसके बाद खच्चर के जरिए चीनी सैनिकों को सामान ढोते हुए देखा गया था।

कौन हैं हू शिजिन


हू शिजिन एक चीनी पत्रकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रधान संपादक और पार्टी सचिव हैं। शिजिन को पश्चिमी मीडिया में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का राजनीतिक प्रचारक माना जाता है। वह चीन की वुल्फ वॉरियर्स कम्युनिकेशन रणनीति को शुरुआती तौर कमान संभाली थी और पार्टी की नीतियों के प्रचार का जिम्मा संभालते हैं। हू का जन्म बीजिंग में एक गरीब ईसाई परिवार में हुआ था। 1989 में बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी से रूसी साहित्य में मास्टर डिग्री के बाद उन्होंने पीपुल्स डेली में एक पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। । हू ने 1989 के तियानमेन स्क्वायर विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, लेकिन बाद में 2019 में सैन्य कार्रवाई को छात्रों का भोलापन और सरकारी अनुभवहीनता के कारण हुई त्रासदी कहा।


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