अप्रभावी रही चीन की कोरोना वैक्सीन, लाखों डोज लगाने के बाद भी लॉकडाउन के लिए मजबूर हुआ ड्रैगन

Updated on 26-03-2022 07:26 PM

बीजिंग कोरोना संक्रमण से प्रभावित ज्यादातर देशों में हालात अब तेजी से सामान्य हो रहे हैं। जबकि, चीन में एक बार फिर से कोरोना के केस बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, जिस पर काबू पाने में प्रशासन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात हर गुजरते दिन के साथ बदतर होते जा रहे हैं। ड्रैगन में बने इस संकट के दो अहम कारण हैं। सबसे पहले, बीजिंग की 'जीरो कोविड' पॉलिसी का फेल होना और दूसरा है कोरोना वायरस के खिलाफ चीनी वैक्सीन्स असरदार साबित नहीं होना।

चीनी वैक्सीन सिनोवैक और सिनोफार्म कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने के लिए विकसित किए गए सबसे पहले टीकों में से हैं। चीन ने इन टीकों को अलग-अलग देशों में निर्यात किया और कुछ गरीब देशों को दान भी दिया। समय के साथ इन टीकों के अप्रभावी होने की शिकायतें आने लगीं, लेकिन चीन ने इन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया।

कई देशों ने कोरोना के खिलाफ एक अतिरिक्त खुराक जारी की, जिसे बूस्टर शॉट के रूप में भी जाना जाता है। यह उन्हें लगाया गया जो पहले से ही टीकाकरण करा चुके थे। दिसंबर के अंत में जब ओमिक्रॉन वैरिएंट तेजी से फैल रहा था, तब चीन की सिनोवैक इससे मुकाबला करने में काफी हद तक असफल रही है।

हांगकांग विश्वविद्यालय की ओर से किए गए अध्ययन के अनुसार, सिनोवैक ओमिक्रॉन के खिलाफ एंटीबॉडी विकसीत करने में नाकाम साबित हुई है। इसके अलावा, यह उन लोगों में पर्याप्त स्तर की सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रही, जिन्हें पहले ही इसकी दो खुराक लग चुकी थी। यह निश्चित रूप से चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि 2021 तक यहां की 16 बिलियन आबादी को 26 मिलियन से अधिक खुराक दी है।

एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 80 वर्ष से अधिक आयु के 3 प्रतिशत लोगों की मौत चीनी वैक्सीन सिनोवैक की दो खुराक लेने के बाद हुई। एक खुराक लेने वालों में मृत्यु दर 6 प्रतिशत है। इसके अलावा, चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के एक दस्तावेज से पता चला है कि चीनी टीके की वजह से ल्यूकेमिया की शिकायत बढ़ने लगी। टीकों की नाकामी ने चीनी अधिकारियों के पास संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जबरन लॉकडाउन के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। बड़े शहरों को बंद कर दिया गया है, लोगों को घरों में 'कैद' कर दिया गया है, बाजार बंद हैं और उद्योग की सप्लाई चेन टूट गई है। इससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। साथ ही नौकरियों की आमदनी के स्रोत समाप्त हो गए हैं। ताजा मामलों की संख्या बढ़ने के साथ ही चीन विभिन्न प्रमुख शहरों में तालाबंदी करते जा रहा है।


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