डीके शिवकुमार ने कांग्रेस विधायकों की मीटिंग बुलाई , सीएम सिद्धारमैया ने 27 समर्थकों को फॉरेन टूर पर भेजा
Updated on
17-02-2026 12:23 PM
बेंगलुरु : कर्नाटक कांग्रेस के दो बड़े नेता सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार भले ही सीजफायर वाला बयान दे रहे हों, अंदरखाने सीएम पद को लेकर खींचतान खत्म नहीं हुई है। जब भी कोई नेता अपनी पद की ताकत दिखाना चाहता है, दूसरा उसमें खेल कर देता है। हाल ही में डीके ने जब प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर विधायकों की मीटिंग बुलाई तो सिद्धारमैया ने अपने 27 समर्थकों को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर भेज दिया। वैसे तो विधायकों की विदेश यात्रा को रूटीन ट्रिप बताया जा रहा है, मगर यह डीके शिवकुमार के बतौर प्रदेश अध्यक्ष के ताकत को चुनौती मानी जा रही है।
एक साल से चल रही है खींचतान
20 मई 2023, सीएम सिद्धारमैया ने जब दूसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ली थी, तभी से डीके शिवकुमार का नाम अगले मुख्यमंत्री के तौर पर उछाले जाने लगा। नवंबर 2025 में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हुए, इससे पहले ही डीके समर्थकों ने उन्हें सीएम बनाने की मुहिम छेड़ दी। दिल्ली में बैठे हाईकमान ने मध्यस्थता की कोशिश की, मगर दोनों नेताओं के अड़े रहने के कारण यह प्रतिस्पर्धा नहीं रुकी। दोनों गुटों की बयानबाजी और डीके के हर दिल्ली दौरे के बाद कर्नाटक में सीएम की कुर्सी हॉट टॉपिक बन जाती है। सिद्धारमैया कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और वह हाईकमान के हर आदेश मानने को तैयार हैं। दूसरी ओर, डीके शिवकुमार भी मीडिया से बातचीत में अपने विरोध को जाहिर नहीं करते हैं, मगर ऐसा संकेत छोड़ देते हैं, जिससे कयासों का बाजार गर्म हो जाता है।
डीके ने हाईकमान से की शिकायत
इस बार विधानसभा के बजट सत्र से पहले सिद्धारमैया ने अपने समर्थक विधायकों को विदेश यात्रा पर भेजकर इस विवाद को फिर हवा दे दी। डीके शिवकुमार ने बतौर प्रदेश अध्यक्ष 6 मार्च को होने वाले बजट सत्र से पहले विधायकों की मीटिंग बुलाई। मगर सरकार ने विधायकों क ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के टूर की अनुमति दे दी। डीके ने इसकी शिकायत हाईकमान से की, तब कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने विधायकों से विदेश जाने का प्लान कैंसल करने की अनुमति दे दी। जो डीके समर्थक विधायक थे, उन्होंने विदेश यात्रा रोक ली। सिद्धा समर्थक 27 एमएलए और एमएलसी विदेश यात्रा पर अड़े रहे।
राजनीतिक विश्लेषक इसे सिद्धारमैया की चाल मानते हैं क्योंकि पावर शेयरिंग डील में उन्होंने हाईकमान के साथ डीके को भी अपनी ताकत का अहसास कराया है। जब सारे विधायक प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार की मीटिंग में नहीं होंगे तो इसकी अहमियत भी कम हो जाएगा। हालांकि विदेश जाने वाले विधायकों ने इसे रूटीन ट्रिप बताया है।
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