यूरोप बाहर और पुतिन अंदर, पश्चिमी एकता को खत्म कर देगा बोर्ड ऑफ पीस, ट्रंप का मेगा प्लान कैसे बना खतरा

Updated on 22-01-2026 12:42 PM
वॉशिंगटन/मॉस्को/दावोस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने गाजा के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर ऐसा कदम उठाया है जो पश्चिमी एकता को हिला सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ऐलान किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब यूरोप की बड़ी शक्तियों ने कहा है कि वे इसमें हिस्सा नहीं लेंगी। ऐसे में रूस को लेकर ट्रंप का कदम अमेरिका और यूरोप में चले आ रहे तनाव को और बढ़ा सकता है। हालांकि, क्रेमलिन ने कहा है कि रूस का विदेश मंत्रालय अभी भी इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

मॉस्को ने शामिल होने को लेकर चला दांव

पुतिन बोर्ड में शामिल होने के न्योते को मौके की तरह देख रहे हैं। ट्रंप ने बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का सदस्यता शुल्क रखा है जिसे लेकर रूस ने बड़ा दांव चला है। मॉस्को ने कहा है कि वह यूक्रेन युद्ध के बाद जब्त की गई रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल करके ही स्थायी सदस्यता के लिए शुल्क का भुगतान करने को तैयार होगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने 59 नेताओं को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। इजरायल ने शुरू में तुर्की और कतर की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि बोर्ड का गठन उसके अधिकारियों से समन्वय के बगैर हुआ है। हालांकि, बुधवार को इजरायल ने शामिल होने पर सहमति जता दी। वहीं, पाकिस्तान समेत 8 मुस्लिम देश भी इसमें शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं।रूस की समाचार एजेंसी RIA ने बुधवार को बताया कि पुतिन को शामिल होने के लिए तीन दिन पहले न्योता भेजा गया था। इसने बताया कि पुतिन ने रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ बैठक में इस न्योते पर चर्चा की है। पुतिन के हवाले से कहा गया है कि मॉस्को इस न्योते का जवाब तभी देगा जब विदेश मंत्रालय इस समझौते का अध्ययन कर लेगा और रणनीतिक साझेदारों के साथ बातचीत कर लेगा।

बोर्ड ऑफ पीस से यूरोप की दूरी

ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर यूरोप ने कोई उत्साह नहीं दिखाया है। बुधवार को इटली की प्रधानमंत्री और ट्रंप की समर्थक माने जाने वाली जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि वह न्योते पर तुरंत जवाब नहीं दे सकतीं और इस मामले पर सोचने के लिए समय की मांग की। जर्मनी ने भी इसमें शामिल होने से मना कर दिया है। फ्रांस ने भी कहा है कि वह इसमें शामिल नहीं होगा।
हालांकि, दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पहुंचे ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस के बारे में कहा, 'हर कोई इसमें शामिल होना चाहता है।' उन्होंने आगे कहा कि पुतिन को न्योता दिया गया था और वह मान गए। कई लोग मान गए। मैं किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानता जिसने मना किया हो।

बोर्ड में कौन-कौन शामिल?

अब तक ये देश सार्वजनिक रूप से ट्रंप का निमंत्रण स्वीकार कर चुके हैं- इजरायल, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की,मोरक्को, कतर, जॉर्डन, वियतनाम, कजाकिस्तान, हंगरी, अर्जेंटीना, बेलारूस, कोसोवो और पाकिस्तान।

किनके शामिल होने पर असमंजस

ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा है कि 20-25 नेता पहले ही बोर्ड में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। चीन को भी न्योता भेजा गया है लेकिन उसने अभी तक अपनी भागीदारी की पुष्टि नहीं की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर किए जाने हैं। रॉयटर्स से बातचीत में कई राजनयिकों ने ट्रंप को न्योते को पसंद से ज्यादा मजबूरी बताया है।

यूक्रेन के सामने बड़ी मुश्किल

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को भी इमें आमंत्रित किया गया है, लेकिन यह उनके लिए विकट स्थिति है। उन्होंने रूस के साथ बोर्ड में बैठने को लेकर असमंजस जाहिर किया जिसे वह युद्ध अपराधी कहते रहे हैं। जेलेंस्की ने पत्रकारों से बताया कि निमंत्रण की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो रूस हमारा दुश्मन है। बेलारूस उसका सहयोगी है। मेरे लिए यह कल्पना करना बहुत मुश्किल है कि हम रूस के साथ एक ही बोर्ड में कैसे हो सकते हैं।'

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