कंपनी, रिटेलर और फाइनेंसर के लिए जी का जंजाल बन रहा महंगा स्मार्टफोन, जान लीजिए वजह

Updated on 06-10-2025 01:01 PM
नई दिल्ली: अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी ऐपल ने हाल में अपना लेटेस्ट आईफोन लॉन्च किया। इसे खरीदने के लिए दिल्ली और मुंबई में ऐपल के स्टोर्स में भीड़ उमड़ पड़ी। असल में महंगा स्मार्टफोन खरीदना आजकल आसान हो गया है। ब्रांड और रिटेलर महंगे स्मार्टफोन को किस्तों पर बेच रहे हैं। वे ग्राहकों को फाइनेंस की सुविधा दे रहे हैं ताकि वे आसानी से फोन खरीद सकें। लेकिन इसके साथ ही स्मार्टफोन लोन डिफॉल्ट के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। इससे ब्रांड्स के साथ-साथ रिटेलर्स और फाइनेंसर्स की भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मोबाइल फोन फाइनेंस पर डिफॉल्ट की दर 2.7% से 2.9% के बीच पहुंच गई है जबकि आमतौर पर 2% तक के रेट को ठीक माना जाता है। कुछ इलाकों में तो डिफॉल्ट की दर और भी ज्यादा है। फाइनेंस कंपनियां ऐसे रिटेलर्स की रेटिंग कम कर रही हैं और उनके ग्राहकों को लोन देने में भी सख्ती बरत रही हैं। अब वे केवल उन्हीं ग्राहकों को लोन दे रही हैं जिनका क्रेडिट स्कोर अच्छा है।

तीन में से एक स्मार्टफोन क्रेडिट पर

इस बीच कर्नाटक में एक नया नियम आया है। इसके तहत शाम 6 बजे के बाद वसूली एजेंट ग्राहकों से पैसे नहीं मांग सकते। इस नियम के बाद फाइनेंस कंपनियां और भी सख्त हो गई हैं। उन्होंने ऐसे पिन PIN कोड को ही ब्लॉक करना शुरू कर दिया है, जिन्हें ज्यादा जोखिम है। एक बड़े स्मार्टफोन ब्रांड के सेल्स एग्जीक्यूटिव ने बताया कि अलग-अलग NBFC और प्राइवेट बैंकों में डिफॉल्ट रेट अलग-अलग हैं, लेकिन ये बढ़ रहे हैं। मोबाइल फोन खरीदने के लिए दिए गए कुल लोन में से करीब 2.7-2.9% हर साल डिफॉल्ट हो रहे हैं।

सबसे ज्यादा डिफॉल्ट

आमतौर पर कुल कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन का लगभग एक चौथाई हिस्सा स्मार्टफोन खरीदने के लिए होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर लोन 10,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच होते हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे लोग 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक के फोन भी किस्तों पर ज्यादा ले रहे हैं। CRIF की जून 2025 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन का कुल बकाया FY24 में 32.7% बढ़ा था। लेकिन FY25 में यह घटकर 14.5% रह गया है। डिफॉल्ट होने वाले लोन की संख्या भी बढ़ी है। 31 से 90 दिनों तक की देरी वाले लोन FY24 में 1.2% थे, जो FY25 में बढ़कर 1.3% हो गए हैं।

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 180 दिनों से ज्यादा समय से डिफॉल्ट चल रहे लोन सबसे ज्यादा हैं। FY24 में ये 1.9% थे, जो FY25 में बढ़कर 2.1% हो गए हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि 10,000 रुपये से कम के लोन में डिफॉल्ट ज्यादा हो रहा है। 31 से 90 दिनों की देरी वाले ऐसे लोन में 2.15% डिफॉल्ट देखा गया है। वहीं, 91 से 180 दिनों की देरी वाले 10,000 रुपये तक के लोन में 2.16% डिफॉल्ट है। इसके मुकाबले 50,000 रुपये से ज्यादा के लोन में डिफॉल्ट कम है। 31 से 90 दिनों की देरी के लिए यह 1.35% है और 91 से 180 दिनों की देरी के लिए 1.16% है।

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