चिकेन नेक पर भारत के लिए नेपाल से खुशखबरी, बालेन शाह ने चीन के BRI को दिया झटका, ओली के मंसूबे होंगे फेल

Updated on 24-02-2026 01:44 PM
काठमांडू: नेपाल में 5 मार्च को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ड एंड रोड पहल (BRI) के लिए खतरे की घंटी बज गई है। नेपाल चुनाव में प्रधानमंत्री पद के अहम दावेदार समझे जाने वाले बालेन शाह ने झापा में नेपाल-चीन दोस्ती के प्रतीक अरबों रुपये के इंडस्ट्रियल पार्क को अपने चुनावी घोषणा पत्र से बाहर कर दिया है। यह प्रोजेक्ट चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के BRI प्रोग्राम का हिस्सा है। इसकी नींव फरवरी 2021 में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रखी थी। यह मेगा प्रोजेक्ट झापा-5 में आता है। यह केपी शर्मा ओली का अपना चुनावी क्षेत्र है। लेकिन इस बार चर्चित चेहरे बालेन शाह ने यहां ओली के खिलाफ ताल ठोंक दी है, जिससे लड़ाई दिलचस्प हो गई है।

कौन हैं बालेन शाह?

सिंगर और रैपर बालेन शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता और नेपाल के युवा नेताओं में एक जाना-माना चेहरा हैं। वे काठमांडू के पूर्व मेयर रहे हैं। शाह के ओली के खिलाफ मैदान में उतरने से झापा न केवल नेपाल के अंदर बल्कि बाहर भी चर्चा का केंद्र बन गया है। दमक इंडस्ट्रियल पार्क को चुनावी घोषणा से बाहर करना ये भी बताता है कि नेपाल के चुनाव में चीन विरोध एक अहम मु्द्दा बन रहा है।
खास बात है कि ओली ने पिछले मंगलवार को जारी अपने 41 बिंदुओं वाले कमिटमेंट पेपर में इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण और पूरा होने की बात कही है। उन्होंने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पहल करने का वादा किया है। शाह ने सोमवार को अपना कमिटमेंट पेपर जारी किया, जिसमें इसे शामिल नहीं किया गया।

केपी ओली का ड्रीम प्रोजेक्ट

दिसम्बर 2024 में ओली के चीन दौरे पर दोनों देशों ने BRI सहयोग के लिए फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें झापा स्थित नेपाल-चीन फ्रेंडशिप इंडस्ट्रियल पार्कसमेत 10 प्रोजेक्ट्स लिस्ट थे। 4 दिसम्बर को फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के बाद जारी बयान में कहा गया कि चीन-नेपाल फ्रेंडशिप इंडस्ट्रियल पार्क एक मेगा इंडस्ट्रियल पार्क है, जिसे नेपाल और चीन के बीच सच्ची दोस्ती के तौर पर दमक, झापा में बनाया जाएगा। इसमें कहा गया था कि पार्क नेपाल में उद्योगों के विकास को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों की इकनॉमी और रोजी-रोटी को बेहतर बनाएगा।

बालेन पर भारत समर्थक होने का आरोप

बालेन शाह के प्रोजेक्ट को बाहर करने के बाद इस पर राजनीति तेज हो गई है। इंडस्ट्रियल पार्क प्रोजेक्ट के चेयरमैन गोविंदा थापा ने सोमवार को फेसबुक पर लंबा पोस्ट लिखा और कहा कि इंडस्ट्रियल पार्क के बारे में बात करने का समय आ गया है। उन्होंने विदेशी ताकतों पर पार्क में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, झापा के कमाल, दमक और गौरदाहा के बड़े क्षेत्र में बनने वाले चीन-नेपाल फ्रेंडशिप पार्क के बनने में देरी विदेशी रुकावटों की वजह से हो रही है। न कि नेपाल के अंदर किसी दिक्कत की वजह से।

विदेशी ताकतों को बताया पीछे

थापा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा भारत की तरफ था। उन्होंने आगे लिखा, 'यह एक कूटनीतिक मामला है, इसलिए मैं अब तक इस बारे में बात नहीं कर पाया, लेकिन अब मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।' उन्होंने कहा कि जब नेपाल में चीनी निवेश आता है तो हम झापा के लोग और पूरी नेपाली जनता, किसी दूसरे देश को इसमें ऐतराज की कोई वजह नहीं देखते। इंडस्ट्रियल पार्क का मकसद आम जनता के लिए सामान बनाना है, हथियार या मिसाइल नहीं। उन्होंने कहा कि हमें कोई वजह नहीं दिखती कि दूसरे देश ऐतराज करें।

थापा ने बालेन शाह के विरोध को विदेश से प्रेरित बता दिया। उन्होंने लिखा, 'बालेन शाह ने अपने घोषणा पत्र में इंडस्ट्रियल पार्क का जिक्र तक नहीं किया है, तो वजह साफ है। वे नेपाल में चीनी निवेश को रोकने के लिए अभियान चला रहे हैं। झापा में भी वही नीति अपनाई है। झापा के लोग समझते हैं कि कौन सी विदेशी ताकतें पार्क का विरोध कर रही हैं। क्या यह इत्तेफाक है कि शाह ने भी वही पॉलिसी अपनाई है, जो उन विदेशी ताकतों ने अपनाई है। बिल्कुल नहीं।'

इंडस्ट्रियल पार्क को लेकर भारत की चिंता

झापा इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट नेपाल-भारत बॉर्डर के पास है, जो खासतौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक है। यह कॉरिडोर एक पतली पट्टी है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ती है। इसे चिकन नेक भी कहा जाता है। इसके आस-पास कोई भी चीनी निर्माण भारत के लिहाज से संवेदनशील है। काठमांडू पोस्ट में नेपाल के सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि इंडस्ट्रियल पार्क को लेकर बाहरी चिंताएं हैं, जिसमें भारत भी शामिल है। दो सरकारी अधिकारियों ने पोस्ट को बताया कि वे (भारतीय) हमें सलाह दे रहे हैं कि अगर हो सके तो प्रोजेक्ट को इजाजत न दें। उनकी चिंताएं बहुत ज्यादा हैं।

विरोध करने वाले बालेन अकेले नहीं

बीते साल अप्रैल में काठमांडू पोस्ट के साथ एक एक इंटरव्यू में नेपाल के पूर्व वित्त और विदेश मंत्री प्रकाश शरण महत ने भी भारत की चिंताओं को जाहिर किया था। महत ने कहा कि बांग्लादेश में हुए डेवलपमेंट के बाद भारत ज्यादा संवेदनशील हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत नहीं चाहता कि नेपाल के पूर्व बॉर्डर पर ऐसा कुछ भी हो जिससे उसकी सुरक्षा चिंता बढ़े। उन्होंने कहा कि हमें भारत की सुरक्षा चिंताओं का ध्यान रखना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत ने साफ तौर पर चिंता नहीं जताई है, लेकिन ऐसा हो सकता है। अगर ऐसा हो तो हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या पार्क ठीक उसी जगह बनना चाहिए? अगर उस जगह पर दूसरी गतिविधियों का शक है, तो ऐसा माहौल क्यों बनाया जाए, जिससे शक बढ़े।

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