बिहार में कैसे हुआ नक्सलवाद का अंत? कभी नक्सल से प्रभावित थे राज्य के 22 जिले

Updated on 19-02-2026 01:36 PM
पटना: एक दौर था जब बिहार के एक-तिहाई हिस्से पर 'लाल झंडे' और बंदूकों का पहरा था। शाम ढलते ही जहानाबाद, भोजपुर, गया और जमुई जैसे जिलों के सुदूर इलाकों में सन्नाटा पसर जाता था। आम नागरिक तो दूर, वर्दीधारी पुलिस भी उन इलाकों में कदम रखने से कतराती थी, जहां नक्सलियों की 'समानांतर सरकार' चलती थी। लेकिन आज साल 2026 में बिहार एक नई सुबह देख रहा है। वह बिहार, जो कभी 'लाल आतंक' के साये में सांस लेता था, अब पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित हो चुका है।

इस खौफनाक अध्याय का आखिरी पन्ना बुधवार को मुंगेर में बंद हो गया, जब तीन लाख रुपये के इनामी हार्डकोर नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने सुरक्षा बलों के सामने अपने हथियार डाल दिए। सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण महज एक अपराधी का सरेंडर नहीं है, बल्कि यह बिहार में पांच दशक से चले आ रहे नक्सली उग्रवाद की 'अंतिम विदाई' है। आइए जानते हैं बिहार से नक्सलबाद के अंत की कहानी...

बिहार में कहां से शुरू हुआ था नक्सलबाद?

बिहार में नक्सलवाद की कहानी साल 1967 में पश्चिम बंगाल में शुरू हुई 'सशस्त्र क्रांति' की चिंगारी से जुड़ी है। बिहार में इसकी पहली दस्तक भोजपुर में हुई, जहां भाकपा माले के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ। 80 और 90 के दशक तक आते-आते पार्टी यूनिटी और एमसीसी (माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर) ने जहानाबाद, औरंगाबाद और गया जैसे जिलों को अपना गढ़ बना लिया।नक्सलियों की ताकत तब चरम पर पहुंची जब 21 सितंबर 2004 को पीपुल्स वार और एमसीसी का विलय हुआ और भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ। इसके बाद के वर्षों में बिहार ने नरसंहारों और पुलिस मुठभेड़ों का एक लंबा दौर देखा।

बिहार में कैसे कम हुआ नक्सलियों का प्रभाव?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बिहार में 2013 में 22 जिले नक्सल प्रभावित घोषित थे। हालांकि सरकार की ओर से पुनर्वास नीति लागू करने से नक्सली हथियार छोड़कर धीरे-धीरे मुख्य धारा में लौटने लगे। राज्य में नीतीश सरकार की ओर से 2007 में शुरू किया गया 'सरकार आपके द्वार' कार्यक्रम गेम-चेंजर साबित हुआ। इसके चलते 2019 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घट कर 16 रह गई। और 2024 में मात्र आठ रह गई।
कुछ नक्सली, पुलिस और केंद्रीय बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए। इस वजह से इनामी हार्डकोर नक्सलियों के दस्ता में सदस्यों की संख्या लगातार घटती गई। इसका नतीजा हुआ कि 2020 में नक्सिलयों के दस्ते की संख्या जो 190 थी, जो दिसम्बर 2024 में घटकर 16 पर सिमट गई।

पुलिस के मुताबिक, बिहार में दिसंबर 2025 तक सुरेश कोड़ा के अलावा दो और हथियारबंद नक्सली दस्ते एक्टिव थे। इनमें एक दस्ता नितेश यादव उर्फ इरफान का था, जो औरंगाबाद के साथ ही झारखंड के पलामू काला पहाड़ इलाके में एक्टिव रहता था। जबकि दूसरा दस्ता मनोहर गंजू का था, जो गया, चतरा और पलामू इलाके में एक्टिव रहता था।

सुरेश कोड़ा पर कितने मामले दर्ज थे?

बुधवार को आत्मसमर्पण करने वाला कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा मुंगेर के पैसरा गांव का निवासी है। पिछले 25 वर्षों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। वह नक्सलियों की 'एसएसी' शाखा का सक्रिय सदस्य था। उसके आत्मसमर्पण के साथ ही पुलिस ने एके-47, एके-56 और इंसास जैसी घातक राइफलें और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं
पुलिस के मुताबिक, नक्सली सुरेश कोड़ा एसएसी का सक्रिय सदस्य है, जो पिछले 25 वर्षों से फरार था। इसके विरुद्ध मुंगेर, लखीसराय एवं जमुई जिले के विभिन्न थानों में कुल 60 नक्सली कांड दर्ज हैं। वर्ष 2008 में मुंगेर जिले के धरहरा थाना अंतर्गत कुमरपुर गांव के चौकीदार की टॉगी से गला काटकर हत्या एवं वर्ष 2010 में जमुई जिले के चरकापत्थर थाना अंतर्गत ढ़ाकोटॉड़ के चौकीदार की हत्या कर दी गई थी, जिसमें यह आरोपी था

नक्सलियों की फंडिंग के स्रोतों को भी सुखा दिया

पुलिस ने केवल नक्सलियों को ही नहीं पकड़ा, बल्कि उनकी फंडिंग के स्रोतों को भी सुखा दिया। यूएपीए (UAPA) और पीएमएलए (PMLA) एक्ट के तहत नक्सलियों की करोड़ों की चल-अचल संपत्ति जब्त की गई। 2012 से 2025 के बीच 6.75 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हुई। करीब 8.97 करोड़ रुपये की अन्य संपत्तियों की जब्ती का प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजा गया है। बात करें बीते साल 2025 की तो उस साल रिकॉर्ड 220 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा को चुना। और इस साल बिहार में एक्टिव सुरेश कोड़ा के समर्पण से बिहार नक्सल मुक्त हो गया।
बता दें, बिहार में नक्सलियों ने कई बड़े कांडों को अंजाम दिया था। जिन्होंने पुलिस के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था। फिर बात चाहे जहानाबाद जेल ब्रेक की हो या मधुबन कांड की, जिसमें हाडरों नक्सलियों से पूर्व मंत्री सीताराम सिंह के आवास, दो बैंक, अंचल कार्यालय पर एक साथ हमला कर दिया था। इसमें चार सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। वहीं जवाबी कार्रवाई में 8 नक्सली भी ढरे हो गए गए थे।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 23 July 2026
नई दिल्ली, पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाए जाएंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़…
 23 July 2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ में एक एडवोकेट कपल का सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। दोनों ने दावा किया है कि करीब एक साल से उन्हें शादियों और अंतिम संस्कार…
 23 July 2026
जालौन: यूपी के चर्चित आईएएस अफसर रिंकू सिंह इस बार मुश्किल में हैं। जालौन में न्‍यायिक उप जिलाधिकारी पद पर तैनात आईएएस रिंकू सिंह राठी और ब्‍लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन…
 23 July 2026
गुना: मध्य प्रदेश के गुना जिले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के भू-स्वामियों की जमीनों के अवैध कब्जे और शोषण के मामले में हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख…
 23 July 2026
अहमदाबाद: 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री और अब पिछले 12 साल से प्रधानमंत्री के बड़े दायित्व को संभाल रहे नरेंद्र मोदी अपने मंत्रियों के कामकाज पर खुद नजर रखते हैं।…
 23 July 2026
पटना: बिहार में दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट छात्र और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर माहौल गरम है। पटना में भी उसी तर्ज पर बुधवार को छात्रों ने…
 22 July 2026
पटना: बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन के भीतर और बाहर उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब सत्ताधारी दल के नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी…
 22 July 2026
लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के पास धरना देने पहुंचे सपा और कांग्रेस नेताओं ने मंगलवार देर शाम जमकर प्रदर्शन किया। हंगामा इतना बढ़ा कि पुलिस सबको पकड़कर थाने…
 22 July 2026
पटना: बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा…
Advt.