'मुझे नहीं लगता कि मैंने सब कुछ हासिल कर लिया' गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा ने बताया अपना अगला टारगेट

Updated on 29-08-2023 02:27 PM
नई दिल्ली: वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतते वाले नीरज चोपड़ा ने साबित कर दिया है कि वो भारत के 'अब तक के सर्वश्रेष्ठ एथलीट' में से एक हैं। नीरज के अंदर ऊंचाइयों को छूने के लिए धैर्य, दृढ़ता, त्याग की जन्मजात क्षमता से है। नीरज के बारे में ये तो सभी जानते हैं कि उन्होंने शुरुआत में यूट्यूब पर जैवलिन एथलीट जैन जेलेजनी के वीडियो देखकर भाला फेंकना सीखा। इस खेल के लिए नीरज को जैन जेलेजनी से ही प्रेरणा मिली। उन्होंने तीन बार के ओलंपिक और विश्व चैंपियन जेलेजनी के भाला फेंकने के वीडियो देखने में घंटों बिताए। पिछले साल नीरज ने अपने बचपन के आदर्श से मुलाकात की और उनसे लंबी बातचीत की। दोनों में एक-दूसरे के लिए बहुत सम्मान है। जेलेजनी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि नीरज ओलंपिक और वर्ल्ड लेवल पर कई पदक जीतेंगे।

रविवार को बुडापेस्ट में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड (स्वर्ण) मेडल जीत लिया। पिछले साल ही नीरज ने सिल्वर (रजत) मेडल के जीता था। ये नीरज का दूसरा वर्ल्ड मेडल था। इतनी सफलता हासिल करने के बावजूद नीरज के अंदर अभी पदकों का और भूख हैं। वो इसे छिपा कर नहीं रखते हैं।

नीरज के अंदर मेडल की 'भूख'इस बारे में जब जैवलिन एथलीट नीरज चोपड़ा से बात की तो उन्होंने कहा, 'एक कहावत है कि भाला फेंकने वालों की कोई लास्ट लाइन नहीं होती है। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे पास हमारा भाला है। हम हमेशा खुद को आगे बढ़ा सकते हैं। मैंने भले ही बहुत सारे पदक जीते हों, लेकिन प्रेरणा आगे और आगे भाला फेंकने की है।' चोपड़ा ने रविवार को गोल्ड मेडल जीतने के बाद बुडापेस्ट से जूम कॉल पर मीडिया के सदस्यों से बात करते हुए अपने आगे के प्लान के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, 'ये पदक जीतकर मुझे यह नहीं सोचना चाहिए कि मैंने सब कुछ हासिल कर लिया है। मैं और अधिक पदक जीतने और अपने देश के लिए और अधिक सम्मान लाने के लिए कड़ी मेहनत करूंगा। मुझे पदकों की और भूख लगी है।' बता दें, नीरज के लिए जो एक उपलब्धि बची है, वह है प्रतिष्ठित 90 मीटर का आंकड़ा पार करना। 90 मीटर थ्रो करने की बात पिछले दो-तीन साल से चल रही है। नीरज ने जोर देकर कहा कि वो एक दिन इस रिकोर्ड को भी पार कर लेंगे।

एक दिन 90 मीटर भी भाला फेंकूंगा : नीरज चोपड़ाएथलीट नीरज ने कहा, 'मैं पिछले दो वर्षों से बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। इस साल मैंने सोचा कि मैं 90 मीटर फेंकूंगा। मेरे दूसरे थ्रो (88.17 m के लिए) के बाद मुझे लगा कि मैं आज 90 मीटर को पार कर सकता हूं, लेकिन नहीं हो पाया।' उन्होंने कहा कि मुझे सीजन की शुरुआत में ग्रोइन की चोट लगी थी। इस चोट ने समस्याएं पैदा कर दीं। मैंने पिछले साल 90 मीटर के बहुत करीब थ्रो किया था। उन्होंने कहा कि 'एक दिन में 90 मीटर थ्रो भी फेंकूंगा। ये दिन भी आएगा, लेकिन पता नहीं कब आएगा। मैं इसके बारे में सोचने का दबाव नहीं लेता हूं।

उन्होंने कहा, 'मेरे लिए और देश के लिए जो अधिक महत्वपूर्ण है, वह पदक है। मैं निरंतरता को अधिक महत्व देता हूं। इससे बड़ी चैंपियनशिप में आत्मविश्वास मिलता है। जब मैं 90 मीटर तक पहुंच जाऊंगा, तो मैं फिर से कोशिश करूंगा और निरंतरता बनाए रखूं। मैं इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूं।'

वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतना मेरे लिए ओलंपिक से भी बड़ा: नीरजनीरज के लिए विश्व चैंपियन बनना एक सपना था क्योंकि ये चैंपियनशिप ओलंपिक से भी कठिन है। उन्होंने कहा कि ओलंपिक स्वर्ण बहुत खास था, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में जीतना बहुत बड़ा है। बता दें, नीरज ने फाइनल में अन्य दो भारतीयों- किशोर जेना और डी. पी. मनु की तारीफ की। दोनों ने बड़े मंच पर प्रभावित किया। जेना 84.77 m (उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ) के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि मनु अपने सर्वश्रेष्ठ 84.14 m के साथ छठे स्थान पर रहे।

किशोर जेना और डी. पी. मनु का भी असाधारण प्रदर्शन: चोपड़ाजैवलिन एथलीट नीरज चोपड़ा ने कहा, 'फाइनल के बारे में अच्छी बात यह थी कि न केवल मैं जीता, बल्कि दो अन्य भारतीय भी थे, जिन्होंने वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया। मैं किशोर जेना के लिए वास्तव में खुश हूं। उन्होंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। यहां तक कि डी. पी. मनु ने भी असाधारण प्रदर्शन किया। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि दोनों शीर्ष छह में रहें। इतनी बड़ी प्रतियोगिता में उन दोनों ने कोई घबराहट नहीं दिखाई और अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इससे हमें उम्मीद है कि हम अगले साल के ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।'


उन्होंने कहा कि इस स्तर की प्रतियोगिता में इस तरह के प्रदर्शन के बाद भारत में मोंडो ट्रैक तैयार करने के बारे में आदिल (सुमरिवाला) सर (भारतीय एथलेटिक महासंघ के अध्यक्ष) से मैं बात कर रहा था। बता दें, मोंडो ट्रैक एक ट्रेडमार्क सिंथेटिक ट्रैक होता है, जिसका उपयोग ट्रैक और फील्ड एथलेटिक्स के लिए किया जाता है। यह मोंडो वर्ल्ड वाइड की ओर से विकसित किया गया है, जो ट्रैक और फील्ड सरफेसिंग तैयार करने के मामले से सबसे अच्छे माने जाते हैं।

घर पर हमारे बीच हमेशा भारत-पाकिस्तान वाली बात होती: नीरजरविवार को सिल्वर मेडल जीतने वाले पाकिस्तानी थ्रोअर अरशद नदीम के साथ अपनी 'प्रतिस्पर्धा' के बारे में नीरज ने कहा कि जब वह ट्रैक पर उतरते हैं तो नदीम को अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं सोचते हैं। उन्होंने कहा कि 'दोनों देशों में इसे भारत-पाक प्रतिस्पर्धा की तरह बनाया जा रहा है। किसी प्रतियोगिता से पहले, मैं मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन आज जब मैंने इसे खोला तो मैंने हर जगह भारत बनाम पाकिस्तान देखा। यह बिल्कुल ठीक है। घर पर हमारे बीच हमेशा भारत-पाकिस्तान वाली बात होती हैं। यह अच्छी सुर्खियां बनती है, लेकिन वैश्विक आयोजनों में हमें हर प्रतियोगी पर ध्यान केंद्रित करना होता है। अगर आप यूरोपीय एथलीटों को देखें, तो वे बहुत अच्छे हैं। वे कभी भी, कुछ भी कर सकते हैं।'

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