समुद्र में बढ़ गया रूसी तेल
रूसी एक्सपोर्टर अभी भी टैंकरों में कच्चा तेल भर रहे हैं, लेकिन रिफाइनर उसे अपने स्टोरेज टैंकों में लेने के लिए कम इच्छुक हैं। इसकी वजह से समुद्र में रूसी कच्चे तेल की मात्रा बढ़कर 38 करोड़ बैरल से ज्यादा हो गई है। यह सितंबर की शुरुआत से 2.7 करोड़ बैरल, यानी 8% ज्यादा है।तीनों देशों पर क्या असर?
चीन, भारत और तुर्की के रिफाइनर (तेल साफ करने वाली कंपनियां) पाबंदियों वाले तेल के कार्गो खरीदना फिलहाल रोक रहे हैं और वैकल्पिक सप्लाई ढूंढ रहे हैं। भारत, चीन और तुर्की मिलकर रूस के समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल निर्यात का 95% से ज्यादा हिस्सा खरीदते हैं। इसलिए, अगर वे अपनी खरीद में थोड़ी भी कमी करते हैं, तो उसकी भरपाई करना लगभग नामुमकिन होगा। ट्रंप के आदेश का तीनों देशों पर यह असर पड़ा:- भारत के कई बड़े तेल रिफाइनर, जो हर दिन करीब 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद रहे थे, फिलहाल खरीद रोक रहे हैं। वे तब तक इंतजार कर रहे हैं जब तक कोई रास्ता नहीं निकल आता।
- चीनी रिफाइनरें भी ऐसे ही कदम उठा रही हैं। सरकारी कंपनियों ने भी अमेरिकी पाबंदियों के बाद कुछ रूसी कार्गो रद्द कर दिए हैं।
- तुर्की के रिफाइनर, जो रूस से तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है, उन्होंने भी खरीद कम कर दी है। वे इराक, लीबिया, सऊदी अरब और कजाकिस्तान जैसे छोटे और करीब के सप्लायरों से वैकल्पिक सप्लाई ढूंढ रहे हैं।


