केजरीवाल-सिसोदिया की ED का केस रद्द करने की मांग:शराब घोटाले से जुड़ा मामला, 12 नवंबर तक सुनवाई टली

Updated on 13-08-2025 02:25 PM

दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया से जुड़ी शराब घोटाले की एक याचिका पर मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

दोनों नेताओं ने हाईकोर्ट में इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दर्ज केस को रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने कुछ दलीलें सुनने के बाद सुनवाई 12 नवंबर तक टाल ​दी।

हाईकोर्ट में केजरीवाल और सिसोदिया ने इस दलील के साथ ED केस को रद्द करने की मांग की थी कि इस मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं ली गई थी।

ED की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा, मंजूरी ली गई थी और इसे ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया था। आम आदमी पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने एसवी राजू की दलील का खंडन करते हुए कहा, यह इस अदालत के समक्ष नहीं है।

ED ने मंजूरी लिए बिना डिटेल जवाब दाखिल किया। उन्होंने याचिका में ED के जवाब को पढ़ा। उन्होंने कहा, ED ने पहले कहा था कि CBI की मंजूरी में ED की कार्यवाही भी शामिल है। दो साल बाद उन्होंने 14 फरवरी 2025 को नई अनुमति को रिकॉर्ड पर रखा। उससे उनका मूल आधार नहीं हटा। कोर्ट ने कहा कि ED ने दिल्ली के LG से मंजूरी ली है।

चार्जशीट ट्रायल कोर्ट में दायर हुई थी, 5 पॉइंट में पूरा मामला

  • ED ने पिछले साल जुलाई में ट्रायल कोर्ट में केजरीवाल के खिलाफ 7वीं चार्जशीट दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने 9 जुलाई को चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा था- केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
  • केजरीवाल ने नवंबर में दिल्ली हाईकोर्ट में ED की 7वीं चार्जशीट पर संज्ञान लेने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि ED ने जो आरोप लगाए हैं, उन आरोपों के समय वे पब्लिक सर्वेंट थे।
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। केस चलाने के लिए ED के पास आवश्यक मंजूरी नहीं थी। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट पर एक्शन लिया।
  • हाईकोर्ट से केजरीवाल की मांग खारिज होने के बाद केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जहां कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस चलाने के लिए सरकार की अनुमति जरूरी है।
  • इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर को फैसला सुनाते हुए कहा था कि पब्लिक सर्वेंट पर सरकार की अनुमति के बिना मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धाराओं के तहत केस नहीं चलाया जा सकता है। यह नियम CBI और स्टेट पुलिस पर भी लागू होगी। इसके बाद ED ने राज्यपाल से इजाजत मांगी।


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