म्यांमार में आए भीषण भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,056 हो गई है। सैन्य सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी। उनके मुताबिक घायलों की संख्या 3900 से ज्यादा हो गई है। वहीं, 270 लोग अभी भी लापता हैं।
आपदा के बाद सोमवार को 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। सैन्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए 6 अप्रैल तक देशभर में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।
म्यांमार और थाईलैंड में 28 मार्च को 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था। यह 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप था। यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने यह आशंका जताई है कि मौत का आंकड़ा 10 हजार से ज्यादा हो सकता है।
मंगलवार को भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा और INS सावित्री लगभग 40 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंचे। इससे पहले 30 मार्च को INS कर्मुक और LCU 52 श्रीविजयपुरम से 30 टन राहत सामग्री के साथ रवाना हुए थे। ये भी आज यांगून पहुंच गए।
राहत कार्यों को और मजबूत करते हुए, भारतीय नौसेना का जहाज INS घड़ियाल लगभग 440 टन राहत सामग्री लेकर भेजा जा रहा है, जिसमें चावल, खाद्य तेल और दवाइयां शामिल हैं।
लोगों ने सड़कों पर रात गुजारी
म्यांमार में सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित इलाका मांडले है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जहां 17 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर लोगों ने लगातार तीसरी रात घर सड़कों पर रात गुजारी, क्योंकि ज्यादातर लोगों के घर टूट चुके हैं। लोग भूकंप के बाद आ रहे आफ्टर शॉक्स से घबराए हुए हैं।
चीनी मीडिया और पेरिस विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भूकंप में मारे गए लोगों में 3 चीनी और 2 फ्रांसीसी नागरिक भी शामिल हैं। अभी भी म्यांमार के ज्यादातर हिस्से में कम्युनिकेशन ठप रहने की वजह से नुकसान की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
भारत ने 5 खेप में भेजी राहत सामग्री
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा और INS सावित्री ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत 30 टन रिलीफ सामग्री म्यांमार के यांगून बंदरगाह भेजे गए। इसके अलावा 118 सदस्यीय फील्ड हॉस्पिटल यूनिट आगरा से म्यांमार के मांडले शहर पहुंची।
इससे पहले ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत ही भारत ने 5 खेप में मदद के लिए 85 टन से ज्यादा राहत सामग्री में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और आवश्यक दवाएं भेजीं।
UN ने म्यांमार को 43 करोड़ रुपए की मदद दी
संयुक्त राष्ट्र ने रिलीफ प्रोग्राम शुरू करने के लिए म्यांमार को 5 मिलियन डॉलर (43 करोड़ रुपए) दिए।
रूस के इमरजेंसी मंत्रालय ने 120 बचावकर्मियों और जरूरी सामान के साथ दो विमानों को भेजा।
चीन की रेस्क्यू टीम भी पहुंची। हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर और मलेशिया भी रेस्क्यू टीम भेजेंगे।
भीड़भाड़ और ट्रैफिक की वजह से रेस्क्यू में दिक्कत
सड़कों पर भीड़भाड़ और ट्रैफिक जाम की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किल आ रही है। कई मेडिकल इक्विपमेंट जैसे ट्रॉमा किट, ब्लड बैग, एनेस्थेटिक्स और जरूरी दवाओं के ट्रांसपोर्ट में बाधा हो रही है।
यूरोपीय यूनियन (EU) ने म्यांमार को इमरजेंसी सहायता के तौर पर 2.7 मिलियन डॉलर (23 करोड़ रुपए) की मदद भेजी है। EU ने कहा कि इस मुश्किल हालात में हम म्यांमार के लोगों के साथ खड़े हैं।