पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट का सेना को करारा झटका, 9 मई के दंगों के आरोपियों पर मिलिट्री कोर्ट में नहीं चलेगा केस

Updated on 24-10-2023 01:36 PM
इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला सेना को तगड़े झटके की तरह है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली बेंच ने सोमवार को आदेश दिया है कि नौ मई को देश में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में गिरफ्तार किए गए नागरिकों पर मिलिट्री कोर्ट में कोई केस नहीं चलेगा। कोर्ट ने सैन्‍य अदालतों में चले सभी मुकदमों को जीरो घोषित कर दिया है। अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखे जाने के कुछ घंटों बाद यह आदेश सुनाया। न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन ने न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर, न्यायमूर्ति यायहा अफरीदी, न्यायमूर्ति सैय्यद मजाहर अली अकबर नकवी और न्यायमूर्ति आयशा ए मलिक इस बेंच में शामिल थे।

सिर्फ एक जस्टिस असहमत
4-1 के बहुमत वाले फैसले में अदालत ने कहा कि नौ मई के संदिग्धों की सुनवाई सामान्य अदालतों में की जाएगी। जस्टिस अफरीदी बहुमत के फैसले से असहमत थे। अदालत ने इसके बाद में दिन में जारी एक संक्षिप्त आदेश में, सेना अधिनियम की धारा 2(1)(डी) को, संविधान का उल्लंघन और 'बिना कानूनी प्रभाव वाली' घोषित कर दिया। सेना की यह धारा अधिनियम के अधीन व्यक्तियों के बारे में विस्तार से बताती है। अदालत ने अधिनियम की धारा 59(4) (सिविल अपराध) को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया।

लिस्‍ट में हैं 103 लोगों के नाम
पाकिस्‍तान के अखबार द डॉन की तरफ से बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट को जो लिस्‍ट मिली है उसमें सरकार की तरफ से पहचाने गए 103 नागरिकों और आरोपी व्‍यक्तियों के नाम हैं। इन सभी व्‍यक्तियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नौ मई की घटनाएं आपराधिक अदालतों में आयोजित की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, 'यह घोषित किया जाता है कि उपरोक्त व्यक्तियों या इसी तरह रखे गए किसी अन्य व्यक्ति के संबंध में सेना अधिनियम के तहत कोई भी कार्रवाई या कार्यवाही (जिसमें कोर्ट मार्शल द्वारा मुकदमा शामिल है, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं है) का कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा।'

आरोपी पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट
छह न्यायाधीशों की एक बेंच , जिसमें पाकिस्तान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) उमर अता बंदियाल भी शामिल थे, जून से याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति बंदियाल के रिटायरमेंट के बाद, बेंच में सिर्फ पांच न्यायाधीशों ही थे। रविवार को सेना अधिनियम के तहत मुकदमों का सामना कर रहे कम से कम नौ आरोपियों ने सैन्य अदालतों द्वारा अपने मामलों के जल्‍द निबटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अपने अलग-अलग आवेदनों में, संदिग्धों ने अनुरोध किया कि उन्हें उन्हें और अन्य आरोपी व्यक्तियों को न्याय दिलाने के लिए सैन्य अधिकारियों पर पूरा भरोसा और भरोसा था।

क्‍या हुआ था 9 मई को
9 मई को हुई हिंसा के बादरावलपिंडी में जनरल मुख्यालय, लाहौर में कोर कमांडर के आवास, पीएएफ बेस मियांवाली सहित सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों में शामिल होने के लिए कुल 102 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इस हिंसा में नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा फैसलाबाद में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के एक ऑफिस को भी निशाना बनाया गया था।


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