विशिष्ट अतिथि सुस्थापित व्यंग्यकार विनोद साव ने किताब में लेखक की दादी मरहूमा फातिमा बी को समर्पित वाक्य 'आपने बीएसपी सेक्टर-1 अस्पताल के किचन में कोयले की भट्टी के सामने बरसों अपना खून जलाते हुए भरे-पूरे कुनबे को ठंडी छांव दी' से अपनी बात रखते हुए मैत्री बाग, सेक्टर-9 हॉस्पिटल का जिक्र किया एवं कल और आज के परिदृश्य को बताया।
विशिष्ट अतिथि स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि लेखक ने भिलाई का इतिहास बेहद रोचक ढंग से रखा है और इसे हर भिलाईवासी को जरूर पढ़ना चाहिए।
चर्चा गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे 'आरंभ' के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ.महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि-विश्व के मानचित्र में 'भिलाई' की अपनी एक पहचान है। आज भिलाई की संस्कृति और भिलाई स्टील प्लांट के सार्वजनिक उपक्रम के स्वरूप को बचाए रखने की जरूरत है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय किताब 'भिलाई ज़िंदाबाद' की महत्ता और बढ़ जाती है। आयोजन में संस्था 'आरंभ' की तरफ से कृतिकार मुहम्मद जाकिर हुसैन को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त प्रख्यात पंडवानी गुरु पद्म विभूषण से सम्मानित स्व. तीजन बाई को दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर आलोक कुमार चंदा, दीप्ति श्रीवास्तव, शानू मोहनन, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, शेफाली भट्टाचार्य, संध्या साटकर, राकेश गुप्ता 'रुसिया', सुशील यादव, डॉ. विजय कुमार गुप्ता 'मुन्ना', ब्रजेश मलिक, तारकनाथ चौधुरी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी 'सब्र', हाजी रियाज खान गौहर, टीए खान, जाविद हसन 'भाईजान', ओमप्रकाश शर्मा, शुभेंदु बागची, हरि प्रकाश गुप्ता 'सरल', नागेंद्र साहू, मो. तारिक, सोनिया नायडू, शिव मंगल सिंह, शमशीर सिवानी, घनश्याम कुमार देवांगन और 'आरंभ' के अनेक सदस्य उपस्थित हुए. संचालन महासचिव नुरूस्सबाह खान 'सबा' एवं आभार प्रदर्शन वरिष्ठ उपाध्यक्ष त्रयम्बक राव साटकर 'अंबर' ने किया।