आतंकी डॉ. शाहीन की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नंबर-3 पोजीशन

Updated on 25-11-2025 01:21 PM
फरीदाबाद, आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी डॉ. शाहीन सईद अल-फलाह यूनिवर्सिटी में भी अहम रोल में थी। वो यूनिवर्सिटी की करिकुलम कमेटी में नंबर-3 की पोजिशन पर थी। इस कमेटी के जिम्मे मेडिकल छात्रों की पढ़ाई से जुड़े नियम व तौर-तरीकों का निर्धारण करना, सिलेबस में सुधार या बदलाव का प्रस्ताव देना, MBBS स्टूडेंट्स की प्रैक्टिकल व क्लिनिकल ट्रेनिंग के मानक तय करना शामिल है।

इसके अलावा यह कमेटी मेडिकल एजुकेशन यूनिट के माध्यम से शिक्षकों के मॉड्यूल और ट्रेनिंग का रोडमैप तैयार करती है। जांच एजेंसियों को शक है कि डॉ. शाहीन अपने पद का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कर रही थी। डॉ. शाहीन अपने पद के दम पर दूसरे लोगों का माइंडवॉश कर रही थी।

इस कमेटी का गठन कब किया गया इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। जांच एजेंसी इस कमेटी में शामिल दूसरे सदस्यों का भी रिकॉर्ड चेक कर रही हैं।

इस कमेटी में डॉ. शाहीन को पैरा-क्लिनिकल प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया गया था। कमेटी में वाइस चांसलर भूपेन्द्र कौर आनंद नंबर-1 पोजिशन पर और मनवीन कौर लाल नंबर-2 पोजिशन पर हैं। कमेटी में प्री-क्लिनिकल, पैरा-क्लिनिकल, मेडिकल और सर्जिकल स्पेशियलिटी के विशेषज्ञ शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी की सुनवाई के तीन अहम पॉइंट...

माइनॉरिटी दर्जे पर सुनवाई 4 दिसंबर को: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें पूछा है- ऐसे समय में उसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए, जब उसके दो डॉक्टरों की दिल्ली में 10 नवंबर को हुए विस्फोट में भूमिका के लिए जांच चल रही है, जिसमें 15 लोग मारे गए थे।

यूनिवर्सिटी और शिक्षा विभाग को रखना है पक्ष: एनसीएमईआई की सुनवाई 4 दिसंबर को होनी है। यहां यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, दोनों को अपना पक्ष रखना होगा। आयोग इस बात की जांच करेगा कि क्या यूनिवर्सिटी का प्रबंधन अभी भी उस अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जा रहा है, जिसके लिए इसे विशेष दर्जा दिया गया था, और क्या स्वामित्व या नियंत्रण में कोई बदलाव हुआ है।

दर्जा खत्म हुआ तो छात्रों को नुकसान: अगर अल-फलाह अपना अल्पसंख्यक दर्जा खो देता है, तो छात्रों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। उनमें से कई, जो अपनी पढ़ाई के लिए सरकारी छात्रवृत्ति और अनुदान पर निर्भर हैं, ऐसे में उनको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बाहरी राज्यों खासकर कश्मीरी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियां फरीदाबाद जिले के सभी कालेजों, यूनिवर्सिटी और अस्पताल में कार्यरत दूसरे राज्यों के डॉक्टरों, प्रोफेसरों, कर्मियों की जानकारी इकट्‌ठी कर रही हैं। खासकर कश्मीरी मूल के लोगों पर नजर है। पुलिस के मुताबिक जम्मू-कश्मीर से आकर काम करने वाले या फिर पढ़ाई करने वाले सभी का रिकॉर्ड चेक किया जा रहा है। कॉलेज और अस्पताल में काम करने वाले के बारे में पता किया जा रहा है कि इनकी नियुक्ति प्रक्रिया क्या रही, कब से कार्यरत हैं, बैकग्राउंड क्या है।

अभिभावकों को यूनिवर्सिटी के प्रशासन पर भरोसा नहीं

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के अभिभावकों में लगातार बेचैनी बनी हुई है। सोमवार को भी कई पेरेंट्स यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्होंने कहा कि हमें यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भरोसा नहीं हो रहा।

शनिवार को 25 अभिभावकों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से मुलाकात करनी चाही थी। लेकिन उनकी मुलाकात तीन डॉक्टरों से करा दी गई। जिसके बाद अब अभिभावक सरकार के सामने आने की प्लानिंग कर रहे हैं। इसको लेकर भारी संख्या में अभिभावक इकट्‌ठा होने की बात कह रहे हैं।

OPD और ICU से जुड़ी जानकारी लेंगे पेरेंट्स

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में इस समय सभी बैच में लगभग 750 छात्र MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं। 200 से ज्यादा छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। स्टूडेंट के परिजन अब यूनिवर्सिटी में चल रहे अस्पताल की OPD और ICU से जुड़ी जानकारियां हासिल करना चाह रहे हैं।

एक पेरेंट्स रजनीश ने बताया कि वो चाहते की बच्चों को मेडिकल में क्या सुविधा मिल रही है, अस्पताल में क्या सुविधाएं व संसाधन मौजूद हैं, इसकी जानकारी अभिभावकों को होनी चाहिए।

 अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर शाहीन सईद, डॉक्टर मुजम्मिल शकील और डॉक्टर उमर नबी के नाम आतंकी मॉड्यूल में सामने आने के बाद पेरेंटस की चिंता और भी ज्यादा बढ़ी हुई है। जांच एजेंसियां यूनिवर्सिटी पर लगातार अपना शिकंजा कसती जा रही हैं। ऐसे में पेरेंटस को डर लग रहा है कि कहीं उनके बच्चों की डिग्री बर्बाद ना हो जाए।



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