इस्लामाबाद में होगी ईरान युद्ध की समाप्ति! पाकिस्‍तान में जेडी वेंस और ईरानी नेताओं की मीटिंग की तैयारी, मुनीर बनेंगे शांतिदूत?

Updated on 24-03-2026 01:05 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बड़ी डिप्लोमेटिक कामयाबी हासिल करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करवाने के लिए खुद को एक महत्वपूर्ण मंच के तौर पर खुद को स्थापित कर लिया है। पाकिस्तान के लिए ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और अगर वो कामयाब होता है तो ये उसकी शानदार डिप्लोमेटिक जीत होगी। लेकिन क्या मामला बस इतना है जो ऊपर से दिख रहा है? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर से बात की है और अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के प्रतिनिधियों से बात करने के लिए तेहरान भी जा सकते हैं।

लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि असल में पाकिस्तान, अमेरिका के खर्ग द्वीप पर हमले के लिए ईरान को उलझा रहा है। ईरानी अधिकारी इस बात को समझ रहे हैं इसलिए उन्होंने अभी तक इस्लामाबाद में अपने प्रतिनिधियों को भेजने की घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ खुफिया और कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से सीएनएन-न्यूज 18 ने कहा है कि वाशिंगटन ने सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है जबकि ईरान की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है। ईरान को किसी साजिश की बू आ रही है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में शांतिवार्ता?

अधिकारियों ने सीएनएन-न्यूज 18 को बताया है कि यदि तेहरान अपनी सहमति दे देता है तो यह मध्यस्थता शुक्रवार और शनिवार को इस्लामाबाद में हो सकती है। यह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच व्यवस्थित बातचीत का एक पहला दुर्लभ प्रयास होगा। इस पहल की शुरुआत 12 मार्च को हुई थी जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने जेद्दा में हुई एक सीमित बैठक के दौरान क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया जिन्होंने बातचीत के प्रति अपनी सहमति जताई।रिपोर्ट के मुताबिक इस कोशिश को 18 मार्च को रियाद में अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की एक परामर्श बैठक में सहमति मिली जहां बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और ओमान को मिलाकर एक मध्यस्थता समूह का गठन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद पाकिस्तान के नेतृत्व ने, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मी चीफ असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार शामिल थे, अहम लोगों के साथ कई दौर की बातचीत की। पाकिस्तान के फौजी और इंटेलिजेंस नेतृत्व ने भी संभावित बातचीत का ढांचा तैयार करने के लिए अमेरिका के मध्यस्थों जैसे जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ गुपचुप बातचीत की।

क्या ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता को स्वीकार करेगा?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी पक्ष के तैयार होने के बाद तेहरान से संपर्क साधा गया और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क किया। इस दौरान उन्हें वॉशिंगटन की बातचीत करने की इच्छा और इस्लामाबाद की बातचीत की मेजबानी करने की तैयारी के बारे में जानकारी दी। ईरानी अधिकारियों ने अपना जवाब देने से पहले देश के नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ अंदरूनी सलाह-मशविरा करने के लिए कुछ समय मांगा है।
सूत्रों ने बताया है कि बातचीत के लिए कई जगहों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें इस्लामाबाद, इस्तांबुल और काहिरा या शर्म अल-शेख शामिल हैं। हालांकि पाकिस्तान पहले दौर की बातचीत की मेजबानी करने को लेकर काफी उत्सुक है। सीएनएन न्यूज 18 ने बताया है कि पहले राउंड की बातचीत में अमेरिका के व्यापक एजेंडे पर बातचीत होने की संभावना है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाना और उसकी क्षेत्रीय स्थिति के साथ साथ आर्थिक जुड़ाव में बड़े बदलाव करना शामिल है।

पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिशों पर क्या कहा है?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा है कि अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो वह बातचीत में मदद करने को तैयार है। प्रवक्ता ताहिर हसन अंद्राबी ने कहा कि 'अगर दोनों पक्ष चाहें तो इस्लामाबाद बातचीत की मेजबानी करने के लिए हमेशा तैयार है।" उन्होंने इस क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए कूटनीति के प्रति पाकिस्तान के समर्थन को दोहराया। लेकिन क्या यह पहल आगे बढ़ेगी या नहीं यह पूरी तरह से तेहरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। अगर ईरान सहमत हो जाता है तो मौजूदा संकट के दौरान दोनों पक्षों को बातचीत के टेबल पर लाने का यह पहला व्यवस्थित प्रयास हो सकता है भले ही ज़मीनी स्तर पर तनाव अभी भी बना हुआ हो।

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