अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी को दुनिया भले ही हार समझे पर इसमें भी उसे बड़ा लाभ

Updated on 14-09-2021 10:42 PM
वॉशिंगटन । अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज होने के बाद अमेरिकी सेना को अचानक वापस बुलाने पर एक तरफ जहां अमेरिका की आलोचना हो रही है तो वहीं यूएस ने हर बार इस फैसले का बचाव किया है और कहा है कि वह अब और युद्ध नहीं लड़ सकता। अमेरिका ने अफगानिस्तान में अपने हजारों सैनिक तो गवाएं ही हैं लेकिन इसके अलावा उसने औसतन हर दिन यहां 29 करोड़ डॉलर यानी 2135 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। दरअसल, ब्राउन यूनिवर्सिटी ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में अमेरिका सेना 7 हजार 300 दिनों तक रही और यहां युद्ध से लेकर देश के विकास से जुड़ी परियोजनाओं में अमेरिका ने 20 सालों में कुल 20 खरब डॉलर यानी 1472 खरब रुपये खर्च कर दिए। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे अमेरिकी पैसों की मदद से गरीब युवा भी बेहद अमीर अफगान बन गए। इनमें से अधिकतर युवाओं ने तो अमेरिकी सेना के लिए दुभाषिए के तौर पर काम करना शुरू किया और वे लखपति-करोड़पति बन गए। एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका ने ये सारी कोशिशें अफगानिस्तान के पुनर्निमाण के लिए की थीं लेकिन इसके बावजूद तालिबान को हर प्रांत की राजधानी पर कब्जा करने, सेना को पस्त करने और अमेरिका को बाहर करने में महज 9 दिन लगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अफगानिस्तान में व्यापक स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार की वजह से ही यहां लोकतंत्र बच नहीं सका।
अफगानिस्तान में अमेरिका के दो बार के राजदूत रह चुके रेयान क्रॉकर ने एक इंटरव्यू में कहा, 'अमेरिका की असफलता की वजह यह भ्रष्टाचार ही है।' क्रॉकर का मानना है कि अफगानिस्तान में व्यापक स्तर पर हुए भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी अमेरिका की है क्योंकि उसने वहां लाखों-करोड़ों डॉलर की बाढ़ कर दी, जिसको अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पचा नहीं सकी। पेंटागन के अध्ययन के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की तरफ से अफगानिस्तान में कॉन्ट्रैक्टर्स को साल 2010 से 2012 के बीच 108 अरब डॉलर की राशि का भुगतान किया गया था। हालांकि, इसमें से 40 फीसदी पैसे अंततः या तो तालिबान के हाथों लग गए या फिर हक्कानी नेटवर्क, ड्रग तस्करों और भ्रष्ट अफगानी अधिकारियों के। 

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 August 2026
ढाका: बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान ने कहा कि एक देश के साथ रिश्ते बेहतर होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश के साथ रिश्ते खराब…
 01 August 2026
मॉस्को/नई दिल्ली: भारत बिजली की रफ्तार से 'फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल' (FRCV) और 'फ्यूचर मेन बैटल टैंक' (FMBT) प्रोग्राम के तहत अपने खुद के बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों का तेजी से…
 01 August 2026
मैड्रिड: स्पेन ने कहा है कि उत्तरी अफ्रीका के स्पेनिश इलाके सेउटा में अचानक आए प्रवासी संकट पर बहुत हद तक काबू कर लिया गया है। स्पेनिश अधिकारियों का कहना…
 01 August 2026
मास्‍को/नई दिल्‍ली/कीव: भारत और रूस के बीच दोस्‍ती सोवियत जमाने से ही दुनिया में एक मिसाल है। साल 1971 का बांग्‍लादेश युद्ध हो या भारत का परमाणु विस्‍फोट, रूस भारत…
 31 July 2026
ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थित चीनी दूतावास में 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ मनाया गया है। इस मौके पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें बांग्लादेश…
 31 July 2026
तेलअवीव/तेहरान: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेनई ने अपने पिता की अयातुल्‍ला की हत्‍या के बाद सत्‍ता तो संभाल ली है लेकिन उन्‍हें इस हमले के बाद किसी ने…
 31 July 2026
इस्लामाबाद: फारूक खान उर्फ कमांडर फारूक सुधन की पीओके में प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी की चपेट में आने से मौत हो गई है। वो पहले पाकिस्तान के…
 31 July 2026
काठमांडू: नेपाल के दक्षिणपूर्वी तराई-मधेस क्षेत्रों जैसे कोशी और मधेस प्रांत में दो समुदायों के बीच हुई सांप्रदायिक झड़प के बाद हिंसा फैल गई है। ये क्षेत्र भारत की सीमा…
 31 July 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को दावा किया कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। हमास और दूसरे सभी हथियारबंद संगठनों ने हथियार…
Advt.