जेड प्लस सुरक्षा क्या होती है? नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद भी मिलेगी
Updated on
02-04-2026 12:47 PM
पटना: बिहार में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा अपडेट आया। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद भी 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के साथ ही वे मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। 'बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000' के तहत उनकी सुरक्षा की समीक्षा की गई, जिसमें उन्हें भविष्य में भी सर्वोच्च श्रेणी (जेड प्लस) का सुरक्षा घेरा प्रदान करने का फैसला लिया गया।
क्या होती है जेड प्लस (Z+) सुरक्षा?
जेड प्लस श्रेणी भारत में वीवीआईपी (VVIP) को दी जाने वाली सर्वोच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति के पास 55 सुरक्षाकर्मियों का एक अभेद्य घेरा होता है। इसमें 10 से अधिक एनएसजी (NSG) कमांडो चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। ये एक त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र (थ्री लेयर सिक्योरिटी सर्किल) है, जिसमें पहले घेरे में कमांडो, दूसरे में विशेष शाखा के अधिकारी और तीसरे घेरे में स्थानीय पुलिस या अर्धसैनिक बल के जवान शामिल होते हैं। सुरक्षा के इस बेड़े में बुलेटप्रूफ गाड़ियां और जैमर वाहन भी शामिल रहते हैं।
भारत की शीर्ष वीवीआईपी सुरक्षा, जिसमें 55 प्रशिक्षित जवानों का सुरक्षा घेरा होता है।
सुरक्षा के पहले घेरे में 10 से अधिक एनएसजी (NSG) कमांडो 24x7 तैनात रहते हैं।
सिक्योरिटी में लगे कमांडो MP5 राइफलों और हाईटेक संचार उपकरणों से लैस होते हैं।
सुरक्षा घेरे में आर्मर्ड (बुलेटप्रूफ) वाहन और एस्कॉर्ट गाड़ियां शामिल होती हैं।
किसे दी जाती है जेड प्लस सिक्योरिटी?
देश में जेड प्लस सुरक्षा मुख्य रूप से उन व्यक्तियों को दी जाती है जिनकी जान को गंभीर खतरा (High Level Threat) होता है। आमतौर पर इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री (एसपीजी के अतिरिक्त), केंद्रीय गृह मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और देश की अन्य अति-महत्वपूर्ण हस्तियां शामिल होती हैं। सुरक्षा का फैसला खुफिया एजेंसियों (IB और RAW) की 'थ्रेट असेसमेंट' रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय की ओर से लिया जाता है
बिहार में फिलहाल किसे मिल रही है Z+ सुरक्षा?
बिहार में वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ये सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। उनके अलावा, राज्य के अन्य महत्वपूर्ण नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा समीक्षा समय-समय पर की जाती रही है। हालांकि, नीतीश कुमार के मामले में विशेष आदेश इसलिए जारी किया गया है क्योंकि वे जल्द ही सीएम पद से मुक्त होकर नई दिल्ली में राज्यसभा की भूमिका संभालेंगे, लेकिन उनकी सुरक्षा के प्रति कोई ढील नहीं दी जाएगी।
कितना आता है Z+ सुरक्षा पर मासिक खर्च?
एक व्यक्ति की जेड प्लस सुरक्षा पर होने वाला खर्च काफी अधिक होता है। अनुमान के अनुसार इस सुरक्षा घेरे पर हर महीने 33 लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है। इसमें कमांडो और जवानों का वेतन, रसद, आधुनिक हथियार, संचार उपकरण और बुलेटप्रूफ वाहनों के बेड़े का रखरखाव शामिल है। सरकारी पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए ये खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाता है, जबकि निजी व्यक्तियों को विशेष परिस्थितियों में इसके लिए भुगतान करना पड़ सकता है।
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