नई दिल्ली: भारत और अमेरिका आने वाले दिनों और हफ्तों में ऊर्जा क्षेत्र सहित कई बड़े समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं। यह दोनों देशों के बीच संबंधों में और तेजी आने का संकेत है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने मंगलवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के हवाले से यह जानकारी दी। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को हुई 40 मिनट की फोन बातचीत के बाद सामने आया है। इस साल की शुरुआत में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बातचीत थी।इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा
ट्रंप और मोदी ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर भी चर्चा की। दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहने के साथ सुरक्षित भी रहे। यह ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक अहम रास्ता है।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की... और अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
अधिकारियों के अनुसार, यह बातचीत दोनों देशों के बीच लगातार बनी रणनीतिक तालमेल को दिखाती है। खासकर ऐसे समय में जब मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है।
ऊर्जा क्षेत्र में हो सकते हैं ज्यादातर समझौते
राजदूत गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत आधार पर टिके हुए हैं। दोनों पक्ष महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। जिन समझौतों विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में होने की उम्मीद है, वे आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए अहम है। इनसे केंद्रीय महत्व रखने वाले क्षेत्रों में आपसी जुड़ाव और गहरा हो सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बातचीत के दौरान एक पर्सनल मैसेज भी दिया। उन्होंने मोदी से कहा, 'मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सभी आपसे बहुत प्यार करते हैं।' यह बात दोनों नेताओं के बीच मौजूद गर्मजोशी भरे तालमेल को दिखाती है।
यह नई बातचीत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई है। इसमें दोनों देशों ने वैश्विक ऊर्जा मार्गों में स्थिरता बनाए रखने और लगातार आर्थिक सहयोग जारी रखने पर जोर दिया है।