चीन के बीआरआई से क्‍यों बाहर आने को बेकरार है इटली, पीएम मेलोनी का फैसला होगा जिनपिंग की बड़ी हार

Updated on 11-09-2023 01:43 PM
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शनिवार को जी20 सम्‍मेलन से अलग अपने चीनी समकक्ष ली कियांग से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्‍होंने संकेत दे दिया कि अब उनका देश बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरई) से बाहर निकलना चाहता है। इससे पहले इसी साल जुलाई में इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने भी कहा था कि चीन के साथ जिस बीआरआई पर साइन हुए हैं वह कामचलाऊ और अत्याचारी है। इटली उस समय बीआरआई में शामिल हुआ था जब वह निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बेताब था। फिर आखिर ऐसा क्‍या हो गया जो अब इटली इससे निकलने के लिए बेताब हो रहा है।

क्‍यों बना बीआरआई का हिस्‍सा
इटली ने जब बीआरआई को ज्‍वॉइन किया था तो उसका मकसद इसके जरिए 10 सालों बाद मंदी से बाहर आकर आगे बढ़ना था। उस समय इटली के यूरोपियन यूनियन (ईयू) के साथ अच्‍छे रिश्‍ते नहीं थे। ऐसे में उसने निवेश के लिए चीन का रुख किया और देश की तत्‍कालीन ऐसा करके खुश भी थी। लेकिन अब इटली को लगता है कि चीन के साथ हुए समझौते से उसे ज्‍यादा फायदा नहीं हुआ है। आंकड़ें भी हालांकि कुछ इसी तरफ इशारा करते हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के आंकड़ों के अनुसार, इटली में चीनी एफडीआई साल 2019 में 650 मिलियन डॉलर से घटकर 2021 में सिर्फ 33 मिलियन डॉलर रह गया। वास्तव में, देश ने यूरोप में गैर-बीआरआई देशों में कहीं अधिक निवेश किया।

बीआरआई की 10वीं वर्षगांठ
व्यापार की बात अगर करें तो बीआरआई में शामिल होने के बाद से, इटली का चीन को निर्यात 14.5 बिलियन यूरो से बढ़कर 18.5 बिलियन यूरो तक पहुंचा था और इस आंकड़ें को भी काफी कमजोर माना गया। जबकि अगर चीन को इटली के निर्यात की बात करें तो यह 33.5 बिलियन यूरो से बढ़कर 50.9 बिलियन यूरो तक पहुंच गया था। इन सबके बावजूद अगर इटली समझौते से बाहर निकलता है तो कहीं न कहीं इसकी वजह भी कुछ और होंगी। बीजिंग के लिए किसी जी7 देश का बीआरआई में शामिल होना एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी। इसकी 10वीं सालगिरह से ठीक पहले इटली का इससे बाहर निकलना चीन के लिए एक बड़ी हार की तरह होगा।

क्‍या है फैसले की वजह

विशेषज्ञों की मानें तो इटली का फैसला चीन के लिए यूरोप के बढ़ते सतर्क रुख के तहत ही है। कई जानकार मानते हैं कि अमेरिका-चीन संबंध पिछले कई वर्षों से अस्थिर रहे हैं। इसके बावजूद यूरोप के कई देशों ने चीन के साथ मजबूत आर्थिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध, रूसी राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए चीन का कट्टर समर्थन और व्यापार प्रतिबंधों का रूप अब एक बड़ी भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का विषय बन गया है। इसने ही कहीं न कहीं इटली को बीआरआई पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 11 August 2026
माले/इस्लामाबाद: मालदीव अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए दक्षिण एशियाई देशों के संगठन 'सार्क' को फिर से शुरू करने की कोशिशें कर रहा है लेकिन उसके सारे दांव नाकाम…
 11 August 2026
मॉस्को/कीव: रूसी वायुसेना ने 4-5 अगस्त की रात को यूक्रेन पर 24 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। यूक्रेनी वायु सेना ने इन मिसाइलों को 'इस्कंदर-M/S-400' कैटेगरी में रखा है। इसका…
 11 August 2026
लंदन: सूडान में चल रहे नरसंहार को लेकर दुबई के शासक को लंदन की सड़कों पर घेर लिया गया। मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम जो दुबई के शासक होने के साथ…
 11 August 2026
वॉशिंगटन/अंकारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले महीने NATO शिखर सम्मेलन के बाद बेहद सीक्रेट तरीके से एक मिलिट्री विमान के जरिए तुर्की से बाहर निकाला गया था। अमेरिकी सीक्रेट…
 11 August 2026
काठमांडू: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि 1816 की वह मूल सुगौली संधि नहीं मिल रही है जिसने ब्रिटिश भारत के साथ उसकी सीमा तय की…
 11 August 2026
तेल अवीव: सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए डिफेंस पैक्ट के बाद इजरायली डिफेंस सर्किल में भारत को 'इंश्योरेंस पॉलिसी' की तरह देखा जा रहा है। इजरायल में…
 10 August 2026
ढाका: भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से सोमवार को मुलाकात की है। बांग्लादेश का उच्चायुक्त नियुक्त होने के बाद त्रिवेदी की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री…
 10 August 2026
तेल अवीव: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए 'मक्का समझौते' के बाद इजरायल का मानना है कि इस समझौते के बाद उसके भारत से संबंध और मजबूत होंगे।…
 10 August 2026
ढाका: बांग्लादेश में हो रहे अहम घटनाक्रम के बीच भारत के चार सुरक्षा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेशी सेना की खुफिया एजेंसी डॉयरेक्टरेट जनरल ऑफ…
Advt.