पिछले 2 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल में ही क्यों चोक कर रही है टीम इंडिया 3 बातों में समझें

Updated on 23-09-2023 04:27 PM
नई दिल्ली: 5 अक्टूबर से आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2023 का आगाज होने जा रहा है। एक दशक के बाद वनडे वर्ल्ड कप एक बार फिर भारत लौटा है। पिछली बार जब 2011 में विश्व कप का आयोजन भारत में हुआ था तो टीम इंडिया ही चैंपियन बनी थी। इस बार भी फैंस को अपनी टीम से यही उम्मीद होगी।

हालांकि 2011 के बाद हुए दोनों वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का सफर सेमीफाइनल में ही समाप्त हो गया। 2015 में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया से 95 रन की हार का सामना करना पड़ा था। वहीं 2019 के वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को 18 रन से हराया था। पिछली दो बार से भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट में तो शानदार प्रदर्शन करती है। लेकिन सेमीफाइनल में आकर चोक कर देती है। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? आइये समझते हैं।

अधिक दबाव लेना

नॉकआउट मुकाबलों में भारतीय टीम को अक्सर ज्यादा दबाव लेते हुए देखा गया है। वह सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में अपने ऊपर हद से ज्यादा दबाव ले लेते हैं। इसकी वजह है कि वह अपना बेस्ट नहीं दे पाते। 2015, 2019 और 2022 के टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भी यही देखने को मिला। टीम इंडिया बहुत जल्दी अपने हथियार डाल देती है और पैनिक करने लगती है।

टॉप और मिडिल ऑर्डर का फ्लॉप होना

2015 के आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने 329 रन का बड़ा लक्ष्य रखा था। रोहित शर्मा और शिखर धवन ने भारत को अच्छी शुरुआत भी दिलाई थी। लेकिन 78 रन पर भारत का पहला विकेट गब्बर के रूप में गिरने के बाद लगातार विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। विराट कोहली, सुरेश रैना पूरी तरह से फ्लॉप रहे। टीम इंडिया का मिडिल ऑर्डर फ्लॉप हो गया। धोनी का साथ कोई दे नहीं पाया। इसके चलते टीम 233 रन पर ही ऑल आउट हो गई।

न्यूजीलैंड के खिलाफ 2019 के वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारत के सामने 240 रन का टारगेट था। लेकिन इस मुकाबले में टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर पूरी तरह से फ्लॉप रहा। केएल राहुल, रोहित शर्मा, विराट कोहली, दिनेश कार्तिक। किसी के बल्ले से रन नहीं निकले। एक समय भारत के 24 पर 4 आउट थे। इसके बाद रविंद्र जडेजा और एमएस धोनी ने भारत की उम्मीदें जगाई रखीं। लेकिन उनके आउट होने के बाद भारत 221 पर सिमट गई और 221 रन से मैच हार गई।

स्पिनर्स का ना चलना

टीम इंडिया के स्पिनर्स उनकी सबसे बड़ी जान है। अगर वह नहीं चलते तो भारतीय टीम पर इसका काफी फर्क पड़ता है। 2015 और 2019 के वनडे वर्ल्ड कप में यही देखने को मिला। 2015 के विश्व कप में रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन ने मिलकर 20 ओवर में सिर्फ 1 विकेट लिया था और 98 रन दिए थे।

वहीं 2019 के वर्ल्ड कप में रविंद्र जडेजा और युजवेंद्र चहल ने मिलकर 20 ओवर में 96 रन देकर सिर्फ 2 विकेट लिए थे। ऐसे में भारतीय स्पिनर्स का ना पर्फॉर्म करना भारतीय टीम को दिक्कत देता है।



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