
भोपाल: इस स्वतंत्रता दिवस पर डिस्कवरी चैनल 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से दर्शकों को भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व, ऑपरेशनल कमांडरों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात जवानों के अनुभवों से रूबरू करा रहा है। वास्तविक और ऐतिहासिक घटनाओं को गहराई से दिखाने की अपनी परंपरा को निभाते हुए डिस्कवरी की यह डॉक्यू-सीरीज़ अधिकारियों की ज़ुबानी यह सामने लाती है कि इस अहम ऑपरेशन के महत्वपूर्ण फैसले कैसे लिए गए और इसे कैसे अंजाम दिया गया। 15 अगस्त 2026 को डिस्कवरी चैनल पर प्रसारण के बाद, दो भागों की यह डॉक्यू-सीरीज़ अब 'डिस्कवरी+' एप पर देखने के लिए उपलब्ध है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने पहले इंटरव्यू में इस डॉक्यू-सीरीज़ में कहा कि –"हमने यह फैसला कर लिया था कि इस ऑपरेशन का एकमात्र उद्देश्य दुश्मन के ठिकानों खासकर पहलगाम हमले के लिए ज़िम्मेदार आतंकी कैंपों को पूरी तरह तबाह करना है।" उन्होंने यह भी कहा कि, "दुनिया को हमारा संदेश बिल्कुल साफ है कि भारत की उदारता या उसके संयम को उसकी कमजोरी समझने की गलती कतई न की जाए। भारत जोखिम उठा सकता है और भारत इसके अंजाम की परवाह किए बिना करारा प्रहार कर सकता है।" पहलगाम आतंकी हमले के बाद की परिस्थितियों से शुरू होने वाला पहला भाग दिखाता है कि किस तरह सशस्त्र बलों और खुफिया एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की, खुफिया जानकारी जुटाई, निगरानी की और ऑपरेशन की तैयारी की। सही संकेतों की पहचान करने से लेकर मॉक ड्रिल करने और हर संभावित स्थिति से निपटने की योजना बनाने तक, सभी टीमों ने इस तरह से काम किया कि स्थानीय लोगों और हमारे सैनिकों को कम से कम आघात पहुँचे। दूसरा भाग रणनीति से आगे बढ़कर सीधे जंग के मैदान में ले जाता है और दिखाता है कि ऑपरेशन के दौरान पल-पल में क्या–क्या हुआ। ऑपरेशन में शामिल होकर जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के अनुभवों के ज़रिए, हमले से ठीक पहले के तनावपूर्ण पलों, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच के तालमेल और मौके पर लिए गए त्वरित फैसलों को दिखाया गया है। जैसे ही हमले शुरू हुए, यह डॉक्यू-सीरीज़ पूरे घटनाक्रम को कवर करती हुई मिशन के सफलतापूर्वक पूरे होने की पुष्टि तक दर्शकों के साथ आँखों देखा हाल बयाँ करती है।
यह सीरीज़ लक्ष्य तय हो जाने के बाद के सैन्य चिंतन, खतरों के आकलन, बदलती स्थितियों में लिए गए फैसलों और मिशन को अंजाम देने वाले अधिकारियों की ज़िम्मेदारी को भी गहराई से दिखाती है। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, (रिटायर्ड) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि “देश के बाकी नागरिकों की तरह, हम भी इस हमले की बर्बरता से गहराई से आहत हुए थे। मेरे विचार से यह हमला बेहद बर्बर था। तभी यह तय किया गया कि भारत इस तरह की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। रणनीतिक स्तर पर मेरा मानना है कि यह जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी संघर्ष को कब रोकना है। युद्ध शुरू करना आसान है, लेकिन उसे रोकना बहुत कठिन है।” प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करने वाली महिला सैन्य अधिकारियों के बारे में बात करते हुए पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कहा, “सशस्त्र बलों का प्रतिनिधित्व दो महिला अधिकारियों ने किया और इससे दो महत्वपूर्ण संदेश सामने आए। पहला, भारत की महिलाएं ऐसे कायरतापूर्ण हमलों से न डरेंगी और न पीछे हटेंगी। दूसरा, इस तरह की चुनौतियां भी भारत के सामाजिक और भावनात्मक ताने-बाने को प्रभावित नहीं कर सकतीं।” इस डॉक्यू-सीरीज़ के केंद्र में वे लोग हैं जो गहराई से इस ऑपरेशन से जुड़े थे और वे उन पलों, प्राथमिकताओं और परिस्थितियों को साझा करते हैं जिन्होंने इस ऑपरेशन का रुख तय किया। रक्षा विशेषज्ञों की राय और राष्ट्रीय सुरक्षा के विस्तृत दृष्टिकोण के साथ यह सीरीज़ दर्शकों को 'ऑपरेशन सिंदूर' की उस पूरी कहानी की गहराई तक ले जाती है जो पहले कभी नहीं देखी गई। 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के साथ वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी ने भारत में फैक्चुअल स्टोरी टेलिंग का एक नया अध्याय शुरू किया है। इस पर बात करते हुए वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी, इंडिया एंड साउथ एशिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अर्जुन नोहवार ने कहा कि, “दशकों से डिस्कवरी अपने दर्शकों तक ऐसी सच्ची कहानियाँ पहुँचाता आया है, जो न केवल रोचक हैं, बल्कि प्रामाणिक और विश्वसनीय भी हैं, और इसी के ज़रिए उसने उनका भरोसा जीता है। ‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से हमारा प्रयास दर्शकों को भारत के हालिया सैन्य इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक के और करीब लाना है, उन लोगों की आवाज़ों के ज़रिए जिन्होंने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया और इसे स्वयं अनुभव किया।” उन्होंने आगे कहा, “डीक्लासिफाइड फ्रेंचाइज़ की शुरुआत इतिहास को आकार देने वाली निर्णायक घटनाओं को सामने लाने की हमारी सोच को दर्शाती है। इस डॉक्यूसीरीज़ को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना हमारे लिए सम्मान की बात है। हमें उम्मीद है कि इसके ज़रिए दर्शक इस ऑपरेशन के पीछे की तैयारी और नेतृत्व को और गहराई से समझ पाएंगे।”
इस डॉक्यू-सीरीज़ का सह-निर्देशन प्रभु असगांवकर और मनिका बेरी ने किया है, जिन्होंने अलग-अलग आवाज़ों और अनुभवों को एक साथ जोड़कर ऑपरेशन की एक समग्र कहानी दर्शकों के सामने रखी है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “शुरुआत से ही हमारा उद्देश्य इस ऑपरेशन को पूरी ईमानदारी, गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ दर्ज करना था। हमें मिली विशेष पहुंच ने हमें सुर्खियों से आगे जाकर यह कहानी उन लोगों की आवाज़ों के ज़रिए कहने का अवसर दिया, जिन्होंने इसे स्वयं जिया। हर इंटरव्यू और हर विवरण पर बेहद सावधानी से काम किया गया, ताकि एक ऐसा प्रामाणिक दस्तावेज़ तैयार किया जा सके जो देश के संकल्प और सशस्त्र बलों की सेवा का सम्मान करे, साथ ही दर्शकों को इस ऑपरेशन के पीछे की मानवीय कहानियों के और करीब ले जाए।” 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के प्रचार-प्रसार के लिए आउटडोर, टेलीविजन, सिनेमा, डिजिटल और सोशल मीडिया पर एक 360-डिग्री अभियान चलाया गया। इसमें मुंबई के सी लिंक और बीकेसी स्थित वी-वर्क जैसी प्रमुख इमारतों पर बड़े पैमाने पर प्रोजेक्शन मैपिंग शामिल थी। सिंदूर के प्रतीकात्मक महत्व से प्रेरित होकर इन इमारतों को गहरे लाल (क्रिमसन रेड) रंग की रोशनी से रोशन किया गया था, जिसने इस शो की पहचान को जीवंत कर दिया। 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' की पूरी कहानी, अब खास तौर पर 'डिस्कवरी+' पर उपलब्ध है।