ग्रामीणों के अनुसार गांव में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का पहुंचना बेहद दुर्लभ रहा है। 25 मार्च 2017 को पहली बार गांव में एक प्रशासनिक शिविर आयोजित किया गया था। इसके बाद भी गांव की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उसूर से तेलंगाना के पुसगुप्फा तक सड़क निर्माण कराया है, लेकिन कोत्तापल्ली को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क आज तक नहीं बन सकी। जबकि क्षेत्र में नक्सल प्रभाव पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव तक सर्व मौसम सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, शिक्षा और संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि कोत्तापल्ली भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।