ममता द्वारा आहूत विपक्षी बैठक के मायने

Updated on 16-06-2022 05:51 PM
देश में दो मुद्दे ही आम विमर्श का कारण बने हुए हैं। एक सोनिया, राहुल से ईडी की पूछताछ और दूसरा आगामी राष्ट्रपति चुनाव।
             पहले मुद्दे को तो कांग्रेस ने बदहवासी में सड़क पर लाकर जो अपनी किरकिरी कराई है, वह अभूतपूर्व है। कांग्रेस सलाहकार समिति इस मुद्दे पर पूरी तरह असफल सिद्ध हो रही है। सोनिया गांधी स्वास्थ्य की परेशानियों के चलते ईडी के सामने पूछताछ हेतु उपस्थित नहीं हो पा रही है। उनके इस स्वास्थ्य खराबी के कारण कई क्षेत्रीय राजनैतिक दलों के अवसरवादी नेता देश की राजनीति में कांग्रेस के रिक्त स्थान को हड़प लेने को आतुर दिखाई दे रहे हैं। उनकी इस अपेक्षित बैचैनी का सीधा सा आशय, जो जनता को समझ आ रहा है, वह यह है कि, उनकी बैचेन दृष्टि में कांग्रेस समाप्त हो रही है। प्रकृति का नियम है कि, वह रिक्त स्थान की पूर्ति करती है, यानि, राजनीति में किसी भी स्थिति का विकल्प मौजूद रहता है।
            विकल्प बनने के लिए उतावल सबसे पहले ममता बैनर्जी में नजर आई, ऐसा नहीं है कि, अन्य नेता विकल्प बनने की आपाधापी में नहीं हैं, महत्त्वाकांक्षा मानवीय प्रवृत्ति है। कई क्षत्रप अपनी आतुरता को छिपा रहे हैं, या समय अनुकूल अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं, या समय की अनुकूलता बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
            ममता का पहला दांव राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार की बैठक की आड़ में कांग्रेस का देशव्यापी विकल्प बनने की शुरुआत का रहा, आखिर यह शुरुआत किसी को तो करनी ही थी। ममता का दूसरा दांव विपक्ष का साझा उम्मीदवार शरद पवार को बनाने का मंतव्य के रुप में सामने आया, जिसे स्वयं शरद पवार ने ही खारिज कर बोथरा कर दिया। ममता को लगा कि, पवार का नाम आगे करने से पूरे देश में उनकी जयजयकार होगी, वे वरिष्ठ राजनेताओं का सम्मान करती हैं। जबकि, उनका छद्म एजेंडा यह था कि, पवार भी उन्हीं की तरह कांग्रेस के उत्पाद हैं, और उनसे कहीं ज्यादा वरिष्ठ हैं, तो एक कांग्रेस का बड़ा विकल्प उनके मुंगेरीलाल के सपने की बाधा नहीं रहेगा। शरद पवार भी अनुभवी राजनेता हैं, वे इसे पहले ही समझ चुके थे और कांग्रेस का विकल्प बनने की उनकी महत्वाकांक्षा जागृत है। विश्लेषकों की राय में ममता ने जल्दबाजी में शरद पवार का नाम सामने रखकर विपक्षी एकता की बैठक बुलाई, यदि वे बिना किसी का नाम लिए यह बैठक बुलाती और बैठक में पवार का नाम आने देने का धैर्य धारण करती, तो यह संभावना होती कि, बात बन जाती। 
               कांग्रेस का विकल्प बनने की चाह का समंदर केजरीवाल की प्याली में भी तूफान उठा रहा है। वो कामनवेल्थ घोटाले का पाखंड खड़ा कर दिल्ली और तीन कृषि कानूनों के विरोध के किसान आंदोलन का समर्थन की राह से पंजाब की सत्ता से कांग्रेस को बेदखल कर राष्ट्रीय नेता होने का मंसूबा पाले हुए हैं। अतः वे ममता की विपक्षी एकता के छद्म एजेंडे से दूरी बना चुके हैं, बावजूद इसके की वे भी मोदी विरोधी लहर के रथ के सारथी हैं, हां, उनका रथ और राह ममता जैसे अन्य से उलट है।
             जहां कुछ निर्गुट क्षत्रप नवीन पटनायक, जगमोहन रेड्डी आदि अपने पत्ते नहीं खोल रहे, जिसकी जानकारी ममता सहित सभी अन्य क्षत्रपों को थी, वहीं स्टालिन, विजयन, बादल, नीतीश कुमार जैसे कुछ अन्य क्षत्रप अपने राज्यों में ही संतुष्ट नजर आते हैं, केंद्र के लाख विरोध में खड़े होने के बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं, तो केसीआर जैसे मोदी विरोध कर अपनी अलग ही राह खोज रहे हैं।
             अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में फिलहाल अप्रासंगिक हो चुके परस्पर धुर विरोधी राजनैतिक दल, किंतु अलगाववाद के मुद्दे पर एक जैसी विचारधारा वाले पीडीएफ और नेशनल कांफ्रेंस भी मोदी विरोध के चलते ममता की बैठक का हिस्सा बने। किंतु वे जानते हैं, उनका कितना महत्व है। हां, ममता ने अपने वोट बैंक मुसलमानों, बांग्लादेशी, रोहिंग्याओं, कश्मीरी अलगाववादियों को खुश करने के लिए चुके हुए फारुख अब्दुल्ला के नाम को दूसरे राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट किया, जो उनकी देश के प्रति मंशा को स्पष्ट करता है। वहीं, गुजरात से मोदी के सामने मोहनदास गांधी परिवार के मूल गांधी गोपाल कृष्ण गांधी के नाम को राष्ट्रपति के तीसरे उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत किया। हो सकता है, इस नाम पर आम सहमति बन जाए, किंतु वर्तमान राजनैतिक उहापोह की स्थिति में उनके जितने की संभावना धुंधली ही नजर आती है।
           अभी देश की राजनीति में कांग्रेस के वर्तमान सामने चुनौतियों के चलते, ये मन में तमाम आशंकाएं, कुशंकाएं पाले, कुल तीन स्वयंभू विकल्प शरद पवार, ममता और केजरीवाल हैं। तीनों में परस्पर मतभेद के साथ मनभेद गहरे और व्यक्तिगत स्वार्थ हैं कि, इनका एक होना असम्भव सा लगता है। ये तीनों अलग अलग ढंग से कांग्रेस की "बी" टीम की तरह राजनीति करते हैं, और मुस्लिम वोट बैंक का तुष्टिकरण करने की होड़ में लगे रहते हैं। 
             ममता की हालिया सम्पन्न विपक्षी बैठक बिना किसी नतीजे के, इस विमर्श के साथ समाप्त हुई कि, आगामी सप्ताह पुनः एकत्रित होना है। तब तक भारतीय राजनीति में कई पड़ाव आना निश्चित है। हो सकता है, कांग्रेस, सोनिया और राहुल से ईडी की पूछताछ के निर्णय तक ममता के दु:स्साहस को सहन कर रही हो। वो सड़क पर ईडी के बहाने सरकार का उग्र विरोध कर विपक्षी एकता को आकर्षित कर रही है। सच भी है, ईडी की पूछताछ का निर्णय, जो भी हो, भारतीय राजनीति को नई दिशा प्रदान करेगा। शिवसेना का रुख,अभी तक अस्पष्ट सा है, शायद वह मोदी शाह से कुछ आश्वासन मिलने का इंतजार कर रही है। यदि वह एनडीए के उम्मीदवार का समर्थन कर दे तो, आश्चर्य की कोई बात नहीं होगी। अभी तो विपक्ष सन 2024 के चुनाव के लाभ हानि का गुणा गणित बैठा रही है। वहीं एनडीए अब तक अपने सारे पत्ते छुपाने में सफल है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 16 May 2026
इंदौर: इंदौर में इस बार की गर्मी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और तापमान 45°C के पार पहुंच गया है। ऐसे में दाऊदी बोहरा समुदाय ने शहरभर में…
 16 May 2026
इंदौर। दक्षिण भारत का खाना लंबे समय तक सिर्फ डोसा, इडली और सांभर तक सीमित समझा जाता रहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लोगों की पसंद तेज़ी से बदली है।…
 09 May 2026
इंदौर। इस मई में इंदौर एक अद्वितीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। शिवशाही महानाट्य — एक भव्य ऐतिहासिक मेगा नाटक — छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस, दूरदर्शिता और बलिदान की…
 01 May 2026
इंदौर। ब्यूटी और वेलनेस इंडस्ट्री में नई ऊर्जा और अवसरों का संचार करने के उद्देश्य से नेशनल आर्टिस्ट्स चैम्पियनशिप 2026 का भव्य आयोजन 20 से 22 जुलाई तक इंदौर के…
 30 April 2026
इंदौर —इंदौर एनिमल लिबरेशन शनिवार, 02 मई 2026 को शाम 6 बजे से 8 बजे तक छप्पन दुकान पर एक विशेष जन-जागरूकता पहल आयोजित कर रहा है, जिसका उद्देश्य डेयरी…
 25 April 2026
इंदौर— चत्रभुज नरसी स्कूल (CNS), इंदौर ने 25 और 26 अप्रैल, 2026 को पिस्टल शूटिंग कॉम्पिटिशन से अपनी स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट पिस्टल शूटिंग एकेडमी की शुरुआत की। इस इवेंट का फोकस ओलंपिक…
 25 April 2026
इंदौर: देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन्स (सेशन 2) 2026 में इंदौर के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शहर का नाम रोशन किया है। नारायणा कोचिंग सेंटर,…
 22 April 2026
इंदौर: चत्रभुज नरसी स्कूल, में 25 और 26 अप्रैल, 2026 को पिस्टल शूटिंग प्रतियोगिता होगी। इस प्रतियोगिता में छात्र और वयस्क इस अनुशासित खेल में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।…
 17 April 2026
इंदौर। मध्यप्रदेश से एक अहम पहल सामने आई है, जहां एक इंडियन स्टार्टअप देश की सिक्योरिटी को और मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। बढ़ते…
Advt.