पटेल इंजीनियरिंग ने भारत में सिंचाई के लिए सबसे लंबी सुरंग बनाने का ऐतिहासिक किया

Updated on 18-07-2026 11:21 AM

भोपाल : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव भारत की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद स्लीमनाबाद कैरियर कैनाल प्रोजेक्ट का उद्घाटन कियापटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा बनाई गई लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग राज्य की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इस परियोजना से प्रदेश के चार जिलों में लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन के लिए पक्के तौर पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे पानी की निश्चित आपूर्ति के साथ-साथ खेती के विकास में भी मदद मिलेगी। स्लीमनाबाद कैरियर कैनाल असल में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही बरगी डायवर्जन परियोजना का हिस्सा है। नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम से 197 किलोमीटर लंबी ट्रांस-वैली नहर के ज़रिए पानी पहुँचाने के लिए तैयार की गई इस परियोजना से पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 245,000 हेक्टेयर ज़मीन पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी, साथ ही जबलपुर और कटनी में घरेलू और कल-कारखानों में उपयोग के लिए हर दिन 284 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति भी संभव होगी। इस पूरी परियोजना की मुख्य कड़ी लगभग 12 किमी लंबी सुरंग है, जिसे पटेल इंजीनियरिंग की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने तैयार किया है। यह सिंचाई के लिए सबसे लंबी सुरंग है।

इस सुरंग को बनाने का काम भारत में सिंचाई के लिए तैयार किए जाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि जमीन के अंदर की परिस्थितियां आसान नहीं थी। इसका रास्ता बहुत अधिक सघना मिट्टी, गाद, जलोढ़, मौसम की मार झेल चुके चूना-पत्थर और डोलोमाइट के अलावा स्लेट, बहुत बड़े आकार के चूना पत्थर और नए मार्बल से होकर गुजरा, जिसकी चट्टानों की मजबूती 180 MPa तक थी। इसके अलावा, सुरंग के 2.7 किमी तक के शुरुआती हिस्से में छत से महज 2-3 मीटर ऊपर भूमिगत जल की परत मौजूद थी जिससे पानी रिसने की बहुत अधिक संभावना थी, जबकि पूरी खुदाई के दौरान जल स्तर सुरंग से ऊपर ही बना रहा। यह सुरंग ग्रामीण इलाकों, घनी आबादी वाले शहरी हिस्सों और एक झील के नीचे जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरी। इस परियोजना के शुरुआती चरण में, पानी के बहाव की दिशा वाले छोर से रॉबिन्स की 10 मीटर चौड़ी एक हाइब्रिड अर्थ प्रेशर बैलेंस (EPB) टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया गया था। बाद में जब परियोजना के दौरान बेहद जमीन के अंदर की मुश्किल परिस्थितियां और भूमिगत जल से जुड़ी चुनौतियां सामने आईं, तो उनसे निपटने के लिए हेरेनक्रेक्ट की एक और वैसी ही TBM मंगवाई गई जिसे पानी के बहाव की उल्टी दिशा वाले छोर पर काम में लगाया गया। दोनों मशीनें साथ मिलकर काम करते हुए हार्ड रॉक सिंगल शील्ड TBM या प्रेशराइज्ड सॉफ्ट-ग्राउंड EPB मशीन की तरह काम करने में सक्षम हैं, जिससे वे जमीन के अंदर की बदलती परिस्थितियों के हिसाब से खुद को तुरंत ढाल लेती हैं। पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर, कविता शिरवाइकर ने कहा, भारत की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग का काम पूरा होना पटेल इंजीनियरिंग के लिए गर्व की बात है और यह मध्य प्रदेश में सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भी ज्यादा बड़ी बात यह है कि यह लाखों किसानों के भविष्य के लिए किया गया एक बड़ा निवेश है, क्योंकि इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। एक ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बनाना हमारे लिए गौरव की बात है, जो खेती को बढ़ावा देता है, गांवों में रहने वालों की आजीविका को मजबूत करता है और समाज के लिए लंबे समय तक फायदे का जरिया बनता है। इसकी सफलता यह दिखाती है कि पटेल इंजीनियरिंग ऐसे मुश्किल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम है, जिनके लिए सटीकता, नई तकनीक और बेहतरीन इंजीनियरिंग की ज़रूरत होती है। अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों (TBMs) का इस्तेमाल करके विंध्य पर्वतमाला के नीचे बनाई गई यह 11.95 किलोमीटर लंबी सुरंग कंपनी की उस विशेषज्ञता का सबूत है, जिससे वे बड़े पैमाने पर जमीन के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं जो विकास की अहम जरूरतों को पूरा करते हैं।

भारत में सिंचाई की सबसे लंबी सुरंग होने के नाते, यह परियोजना पूरे इलाके में पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाएगी। 197 किलोमीटर लंबे नहर नेटवर्क के लिए बनाई गई इस परियोजना से जबलपुर, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर और रीवा जिलों के करीब 1,450 गांवों में लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर ज़मीन को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे खेती की पैदावार बढ़ेगी, गांवों में रहने वालों की आजीविका बेहतर होगी और लंबे समय में मध्य प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक विकास में मदद मिलेगी। पटेल इंजीनियरिंग ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के इरादे पर कायम है जो समाज के लिए लंबे समय तक फायदे का जरिया बने, साथ ही भारत में पानी, सिंचाई और स्थायी विकास की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करे।


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