हूतियों की वो मिसाइल जिसके सामने फेल हुआ इजरायल का महाशक्तिशाली एरो एयर डिफेंस, 2000 किमी दूर से बनाया निशाना

Updated on 16-09-2024 04:16 PM
तेल अवीव: इजरायल के लिए रविवार 15 सितम्बर का दिन बड़े झटके की तरह था, जब यमन से दागी गई हूती चरमपंथियों की मिसाइल इजरायली एयर डिफेंस को चकमा देते हुए इजरायली क्षेत्र में प्रवेश कर गई। इजरायल के आयरन डोम और एरो एयर डिफेंस को दुनिया के सबसे ताकतवर हवाई रक्षा तंत्र में गिना जाता है, इसके बावजूद इजरायली सेना मिसाइल को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से नहीं रोक पाई। इस हमले ने इजरायल की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हूती चरमपंथियों ने 2000 किमी दूरी से इजरायली क्षेत्र तक अपनी पहुंच को साबित कर दिया है। इजरायली सुरक्षा हलकों में इस बात पर बहस हो रही है कि आखिर हूती मिसाइल इजरायली सुरक्षा को भेदने में कैसे कामयाब हुई?

साढ़े 11 मिनट में पहुंची मिसाइल


हूती चरमपंथियों ने जिस मिसाइल से हमला किया वह बैलिस्टिक मिसाइल थी। हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल ने साढ़े 11 मिनट में 2040 किमी की दूरी तय करके 'दुश्मन इजरायल' को निशाना बनाया। एक बात गौर करने वाली है कि हूती चरमपंथियों के पास बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने की क्षमता नहीं है। उनका पूरा स्टॉक ईरान से आता है। यमन के हूतियों के पास मौजूद 'तूफान' मिसाइल असल में ईरानी गदीर मिसाइल है। इजरायल के एरो सिस्टम को वर्षों से इसी तरह के मिसाइल हमलों को रोकने में सक्षम बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है।

हूतियों की मिसाइल की रेंज


हूतियों की 'तूफान' मिसाइल की रेंज 2000 किलोमीटर है, जो यमन से इजरायल की दूरी को कवर करने के लिए पर्याप्त है। इस मिसाइल को गोदाम से ट्रक पर रखकर लॉन्च साइट पर लाया जाता है, जहां इसे एसेंबल किया जाता है। मिसाइल का लक्ष्य पहले से ही तय कर दिया जाता है और इसे उड़ान के दौरान बदला या संशोधित नहीं किया जा सकता है। इसकी खासियत है कि लॉन्च करने के प्रथम चरण के तहत सिर्फ आधे घंटे में ईंधन भरा जा सकता है। मिसाइल को वर्टिकली (लंबवत) लॉन्च किया जाता है और यह एक झुकाव का कोण बनाते हुए आगे बढ़ती है।

मिसाइल को कैसे किया जाता है ट्रैक?


मिसाइल को यमन से मध्य इजरायल तक पहुंचने में केवल 12 से 15 मिनट लगते हैं। लॉन्च होने से पहले इसका वजन 15-17 टन होता है। इसके वारहेड का वजन लगभग 650 किलोग्राम है। यह एक महत्वपूर्ण विस्फोटक क्षमता है, जो अपनी प्रभाव गति के साथ मिलकर नागरिक और सैन्य संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जब इस मिसाइल को लॉन्च किया जाता है तो इसके इंजन से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है.

इसके बाद जब मिसाइल इजरायल की तरफ बढ़ रही होती है तो कई रडार सिस्टम को उसे ट्रैक करना होता है। इसमें लाल सागर में अमेरिकी और इजरायली नौसेना के रडार, नेगेव में मौजूद लंबी दूरी का एक्स-बैंड रडार और अंत में एरो सिस्टम रडार शामिल है। यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह अभी साफ नहीं है कि मिसाइल का समय रहते पता लगाया गया था या नहीं और एरो सिस्टम इसे रोकने में क्यों नाकाम रहा?

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