भोपाल आए जतिन ने नवदुनिया से चर्चा में बताया कि उनकी मां और 'शोमैन' राज कपूर की बहन उर्मिला स्याल कपूर ने खानदानी बंदिशों के चलते कभी भी फिल्मी पर्दे पर काम नहीं किया, लेकिन मैंने फिल्मों में काम करने का रास्ता चुना है।
करियर की शुरुआत मामा शशि कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म अजूबा (1991) से सहायक निर्देशक के तौर पर की थी। उसके बाद चचेरे भाई ऋषि कपूर की निर्देशित डेब्यू फिल्म आ अब लौट चले (1999) में भी काम किया। हालांकि अभिनय की ललक होने के कारण वह 1995 में टीवी इंडस्ट्री से भी जुड़ गए थे।
टीवी सीरियल सांस, दर्द, संजीवनी, रिश्ते, टशन ए इश्क, दरार और परंपरा समेत कई टीवी शो में मैंने काम किया। वेब-सीरीज पाटलक (2021) में उनके किरदार गोविंद को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। सोनी पर पाटलाक के दो सीजन के बाद तीसरा सीजन अभी रिलीज हुआ है। एक और मजेदार और यादगार सीजन नेटफ्लिक्स पर आने वाला है, डाइनिंग विद द कपूर्स, जिसे राजकपूर साहब के ग्रेंड सन अरमान जैन ने बनाया है।
यह कपूर खानदान के डिनर पर बनाया गया है, जिसमें आप कपूर खानदान के बारे में रोचक जानकारियों से रूबरू हो सकेंगे। कपूर परिवार से जुड़े होने के बाद भी संघर्ष के सवाल पर जतिन बड़ी बेबाकी से बताते हैं कि पर्दे में काम और नाम कमाने के लिए काबिलियत अहम है।
संघर्ष कला की कसौटी होती है। फिल्मों में आप अपने काम के दम से ही चल सकते हैं। भोपाल से रिश्ते की बात पर जतिन ने बताया कि यह तो मेरी ससुराल है। गोविंदपुरा निवासी उद्योगपति हरदयाल शर्मा की बेटी कविता शर्मा से मेरा विवाह हुआ है। मैं भोपाल का दामाद हूं। यहां जल्द ही हम एक सीरीज की शूटिंग करने जा रहे हैं। वैसे भी यहां की नैसर्गिक सुंदरता तो उनके जेहन में रच बस गई है।