राजधानी की जल वितरण प्रणाली कुप्रबंधन का शिकार

Updated on 11-02-2022 07:48 PM

अवैध कनेक्शन व लापरवाही से 20 प्रतिशत राशि की भी वसूली नहीं
भोपाल ।  राजधानी जल वितरण प्रणाली कुप्रबंधन का शिकार हो रही है।  अवैध कनेक्शन व कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से 20 प्रतिशत राशि की भी वसूली नहीं हो पा रही है। शहर में लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए निगम हर साल करीब ढाई सौ करोड़ रूपए खर्च करता है, लेकिन वसूली नहीं हो पा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 में जल वितरण, बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन व अन्य सप्लाई के कार्यों में करीब 250 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं, जबकि लोगों से केवल 50 करोड़ रूपए की वसूली हो पाई है। वहीं वित्तीय वर्ष 2020-21 में इन कार्यों के लिए निगम की ओर से 233 करोड़ रूपए खर्च किए गए थे, लेकिन वसूली 45 करोड़ रूपए की हुई थी। निगम अधिकारियों ने बताया कि जलकार्य में होने वाले बिजली का सालाना खर्च करीब 120 करोड़ रूपए आता है, जबकि इस काम में लगे कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में 40 करोड़ रुपए व्यय होता है। इसके बाद कोलार व नर्मदा परियोजना का पानी लेने पर प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ रूपए खर्च होते हैं, वहीं पानी की टंकियों व पाईप लाइन के मेंटेनेंस, केमिकल खरीदी व अन्य कार्यों के लिए निगम को 25-30 करोड़ रूपए खर्च करने होते हैं। नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति के तहत करीब पौने तीन लाख कनेक्शन बांटे गए हैं। लेकिन इसके बावजूद करीब 20 हजार अवैध नल कनेक्शन लोगों ने ले रखे हैं। जिसकी स्पष्ट जानकारी निगम के पास नहीं और न ही इस पैसे की वसूली हो पाती है। इसके साथ ही वैध नल कनेक्शन लेने वालों पर भी निगम का करोड़ों रूपए बकाया है, इसकी भी शत प्रतिशत वसूली नही होती है। टंकियों में पानी भरने के दौरान मानीटरिंग नही होती है, जिससे पानी बहता रहता है। वहीं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों की पाइप लाइन में करीब दो दर्जन से अधिक लीकेज हैं। एक आंकड़े के मुताबिक रोजाना करीब 20 लाख लीटर पानी सड़कों में बह जाता है। वाल्वमैन का काम समय पर वाल्व बंद करना और खोलना है, लेकिन इनकी लापरवाही की वजह घंटो जलापूर्ति होती है। जिससे बिजली का बिल अधिक आता है और पानी बहता रहता है। इस बारे में नगर निगम के जल कार्य विभाग के  प्रभारी अधीक्षण यंत्री एआर पवार का कहना है कि नगर निगम के नुकसान का मुख्य कारण खर्च ज्यादा व कमाई कम होना है। जैसे कि निगम जलापूर्ति में जितना पैसा खर्च कर रहा है, उतना वसूलने के लिए उपभोक्ता शुल्क बढ़ाने की आवश्यता है। यदि यूजर चार्जेस नही बढ़ाए गए तो भविष्य में निगम का घाटा बढ़ता जाएगा। अवैध कनेक्शन व पाइप लाइन में लीकेज भी निगम के नुकसान का कारण है।


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