केयर सीएचएल अस्पताल में सल्फास खाने वाले गंभीर मरीज की बची जान
Updated on
18-08-2025 02:37 PM
इंदौर। केयर सीएचएल अस्पताल इंदौर ने एक और चिकित्सा उपलब्धि अपने नाम की है। अस्पताल में पहली बार सल्फास जहर का इलाज वीए एक्मों तकनीक के जरिए कर एक 57 वर्षीय पुरुष की जान बचाई गई, जिसने सल्फास की दो गोलियां खा ली थीं। यह मामला इसलिए जटिल था क्योंकि सल्फास जहर खाने के मामलों में मौत की दर 99% से ज्यादा है और इसका कोई निश्चित एंटीडोट भी नही होता। केयर सीएचएल अस्पताल के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. निखिलेश जैन एवं कार्डिओथोरासिक विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष पोरवाल ने बताया, “ऐसे जहर खाने के मामले में जिसमें बचने की संभावना लगभग शून्य मानी जाती है, उसमें केयर सीएचएल अस्पताल की टीम को सफलता मिली। अस्पताल लाए जाने के समय मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि ब्लड प्रेशर भी नहीं नापा जा सका था और इस दौरान मरीज कार्डियोजेनिक शॉक में था। शुरुआत में उसे ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाओं पर रखा गया, लेकिन जब सुधार नहीं हुआ तो परिजनों की सहमति से उसे वीए एक्मो पर लिया गया। यह एक जटिल तकनीक है जिसमें मशीन हृदय को ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाता है। मरीज 5 दिनों के भीतर स्थिर हो गया। एक्मों में फेफड़े और हृदय के कार्य को पूरी तरह वीए एक्मों मशीन ले लेती है जिससे मरीज के हृदय और फेफड़े को आराम दिया जा सकें। मरीज को इस प्रणाली पर रखा, जिससे धीरे धीरे उसकी हालत में सुधार होता गया। मरीज की सजगता और स्थिरता बनी रही, और हमने उसे सफलतापूर्वक एक्मो से हटा लिया। यह सफलता हमारे इंटेंसिव केयर और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।” केयर सीएचएल अस्पताल के सीओओ श्री मनीष गुप्ता ने कहा, “केयर सीएचएल अस्पताल हमेशा उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता के जरिए जीवनरक्षा के प्रयासों में अग्रणी रहा है। यह केस हमारे समर्पण और क्षमता का प्रमाण है। ऐसे दुर्लभ मामलों में भी यदि तकनीक और टीम वर्क सही हो, तो चमत्कार संभव हैं। इस केस ने अस्पताल को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में सल्फास खाने जैसे जानलेवा मामलों में वीए एक्मो जीवन रक्षक उपाय के रूप में अपनाया जा सकेगा। इसकी सफलता में डॉ. विजय महाजन, डॉ. राजेश कुकरेजा, डॉ. शुभाष रेड्डी, डॉ. अक्षत शाह , डॉ. विशाल कोष्टा, मनोज त्रिपाठी एवं अजय श्रीवास्तव का योगदान है।”
इंदौर। इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD), गंभीर COPD, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, ब्रोंकिएक्टेसिस और केमिकल पॉइजनिंग जैसे मामलों में लंग ट्रांसप्लांटेशन जीवन रक्षक साबित हो रहा है। समय पर इलाज और सही रेफरल…
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को एक और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा आयोजन की मेजबानी मिलने जा रही है। शहर में चौथी ब्रोंकोपुलमोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 3 से 5 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। इस तीन दिवसीय…
इंदौर। विश्व लिवर दिवस 2026 के अवसर पर केयर सीएचएल हॉस्पिटल इंदौर में “लिवर हेल्थ एंड अवेयरनेस प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने लिवर…
इंदौर: विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, एचसीजी इंदौर ने जागरूकता पहल शुरू की, जो इसके आधिकारिक लॉन्च का भी प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य कैंसर की रोकथाम हेतु स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान…
इंदौर: यूनिक हॉस्पिटल ने आर्थोपेडिक जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट के लिए अत्याधुनिक मिसो (MISSO) रोबॉटिक प्रणाली की शुरुआत की है। इसी वर्ष 1 जनवरी से शुरू हुई यह एआई - आधारित उन्नत…
भोपाल : भारत में अनुमानित 4.2 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं, लेकिन इसके लक्षण शुरू होने और सही पहचान होने में औसतन 6 साल से अधिक का समय लग…
इंदौर। बच्चों की हिम्मत, जज़्बे और मुस्कान को समर्पित ‘लिटिल चैंपियंस मीट’ का आयोजन केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में लगभग 20 बच्चों और…
इंदौर: शहर में पहली बार एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शैल्बी हॉस्पिटल की ट्रांसप्लांट टीम ने ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त दोनों किडनियों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण एक ही दिन…
इंदौर: एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल,
इंदौर ने महिलाओं के स्वास्थ्य, कैंसर की प्रारंभिक पहचान के महत्व और निवारक स्वास्थ्य
देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दो दिवसीय “विमेन हेल्थ मेला” का…