जब “नॉर्मल” रिपोर्ट पूरी सच्चाई नहीं बताती: एंडोमेट्रियोसिस को समझने का नया नजरिया

Updated on 06-04-2026 03:37 PM
भोपाल : भारत में अनुमानित 4.2 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं, लेकिन इसके लक्षण शुरू होने और सही पहचान होने में औसतन 6 साल से अधिक का समय लग जाता है। इस दौरान कई महिलाओं को बार-बार यही कहा जाता है कि रिपोर्ट्स सामान्य हैं, दर्द सामान्य है, और चिंता की कोई बात नहीं है। डॉ. शिल्पी श्वेता, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, भोपाल बताते हैं कि कई बार इन सबके पीछे एक ऐसी स्थिति होती है जिसे पहचानना आसान नहीं होता, और वह है एंडोमेट्रियोसिस। इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिश्यू गर्भाशय के बाहर भी विकसित होने लगता है। हर बार जांच पूरी तस्वीर नहीं दिखाती : स्कैन और इमेजिंग ज़रूरी होते हैं, लेकिन उनकी भी सीमाएं होती हैं। साधारण अल्ट्रासाउंड शुरुआती या हल्के एंडोमेट्रियोसिस का पता नहीं लगा पाता, खासकर जब यह छोटे-छोटे हिस्सों में फैला हो और कोई स्पष्ट सिस्ट न बना हो। यहां तक कि एमआरआई भी, अगर विशेष रूप से एंडोमेट्रियोसिस के लिए न किया जाए, तो रिपोर्ट सामान्य आ सकती है, जबकि महिला को स्पष्ट रूप से समस्या महसूस हो रही होती है।
यह तकनीक की कमी नहीं है, बल्कि यह समझने की जरूरत है कि केवल उपकरणों से पूरी तस्वीर नहीं मिलती। महिला क्या महसूस कर रही है, कितने समय से कर रही है, और उसमें क्या बदलाव आया है, यह सब उतना ही महत्वपूर्ण है। किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, पीरियड्स में बहुत ज्यादा या असहनीय दर्द, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे, संबंध के दौरान दर्द या असहजता, पीरियड्स के दौरान अत्यधिक थकान या असहजता, इनमें से हर लक्षण अलग-अलग कारणों से भी हो सकता है। लेकिन जब ये एक साथ दिखाई दें, और साथ में गर्भधारण में कठिनाई भी हो, तो यह एक बड़ी तस्वीर की ओर इशारा करते हैं, जिसे केवल स्कैन के आधार पर समझना हमेशा संभव नहीं होता।
एंडोमेट्रियोसिस फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करता है, यह स्थिति शरीर के उस हिस्से में, जहां गर्भाशय और अंडाशय होते हैं, सूजन जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। यह सूजन अंडाणु की गुणवत्ता, निषेचन और भ्रूण के ठहरने, यानी इम्प्लांटेशन, को प्रभावित कर सकती है। कई बार फर्टिलिटी की समस्या ही इसका पहला संकेत होती है, जबकि बीमारी की पहचान बाद में होती है। समय पर पहचान क्यों जरूरी है: जो महिलाएं आईवीएफ के बारे में सोच रही हैं, उनके लिए यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि अगर एंडोमेट्रियोसिस की पहचान पहले हो जाए, तो उपचार की पूरी योजना बदली जा सकती है। दवाइयों की मात्रा समायोजित की जा सकती है, पहले से तैयारी की जा सकती है, और इलाज को महिला की जरूरत के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है। औसतन महिलाओं को इस बीमारी की पहचान होने में 7 से 8 साल लग जाते हैं, लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। अगर लक्षणों को ध्यान से समझा जाए और जांच उसी आधार पर की जाए, तो यह समय काफी कम हो सकता है। एक “नॉर्मल” रिपोर्ट को अंतिम मान लेना सही नहीं है। कई बार यही वह बिंदु होता है जहां से आगे की समझ और सही दिशा तय होती है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 22 April 2026
इंदौर।  इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD), गंभीर COPD, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, ब्रोंकिएक्टेसिस और केमिकल पॉइजनिंग जैसे मामलों में लंग ट्रांसप्लांटेशन जीवन रक्षक साबित हो रहा है। समय पर इलाज और सही रेफरल…
 21 April 2026
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को एक और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा आयोजन की मेजबानी मिलने जा रही है। शहर में चौथी ब्रोंकोपुलमोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 3 से 5 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। इस तीन दिवसीय…
 21 April 2026
इंदौर। विश्व लिवर दिवस 2026 के अवसर पर केयर सीएचएल हॉस्पिटल इंदौर में “लिवर हेल्थ एंड अवेयरनेस प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने लिवर…
 10 April 2026
इंदौर: विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, एचसीजी इंदौर ने जागरूकता पहल शुरू की, जो इसके आधिकारिक लॉन्च का भी प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य कैंसर की रोकथाम हेतु स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान…
 09 April 2026
इंदौर: यूनिक हॉस्पिटल ने आर्थोपेडिक जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट के लिए अत्याधुनिक मिसो (MISSO) रोबॉटिक प्रणाली की शुरुआत की है। इसी वर्ष 1 जनवरी से शुरू हुई यह एआई - आधारित उन्नत…
 06 April 2026
भोपाल : भारत में अनुमानित 4.2 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं, लेकिन इसके लक्षण शुरू होने और सही पहचान होने में औसतन 6 साल से अधिक का समय लग…
 28 March 2026
इंदौर। बच्चों की हिम्मत, जज़्बे और मुस्कान को समर्पित ‘लिटिल चैंपियंस मीट’ का आयोजन केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में लगभग 20 बच्चों और…
 26 March 2026
इंदौर: शहर में पहली बार एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शैल्बी हॉस्पिटल की ट्रांसप्लांट टीम ने ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त दोनों किडनियों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण एक ही दिन…
 21 March 2026
इंदौर: एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल, इंदौर ने महिलाओं के स्वास्थ्य, कैंसर की प्रारंभिक पहचान के महत्व और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दो दिवसीय “विमेन हेल्थ मेला” का…
Advt.