विश्व ब्रेन दिवस: समय पर इलाज से बच सकती है जान, ब्रेन हेल्थ को लेकर जागरूकता जरूरी

Updated on 23-07-2025 03:50 PM

इंदौर: हर साल 22 जुलाई को विश्व ब्रेन दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है “Good Brain for All Ages”, यानी हर उम्र में ब्रेन को स्वस्थ रखना जरूरी है। आज के समय में ब्रेन हेल्थ को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है, क्योंकि स्ट्रोक, ब्रेन हेमरेज और ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉ. रजनीश कछारा, डायरेक्टर, न्यूरोसाइंसेस, मेदांता अस्पताल इंदौर ने बताया कि, आज के समय में ब्रेन से जुड़ी बीमारियों का ट्रेंड बदल गया है। सबसे बड़ी समस्या ट्रामा (चोट) है, जो सड़क हादसों में होती है। एक्सीडेंट में ब्रेन को होने वाली चोट से मरीज की जान भी जा सकती है। इसके अलावा ब्रेन हेमरेज, स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर के मामले बढ़ रहे हैं। हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), डायबिटीज और खराब फूड हैबिट्स स्ट्रोक का मुख्य कारण बन रहे हैं। मेदांता अस्पताल में आधुनिक तकनीक से बेहतर इलाज की सुविधा मिल रही है। यहां देश-विदेश में अपनाई जाने वाली नवीनतम तकनीकों से मरीजों का उपचार किया जाता है। अस्पताल में एडवांस न्यूरो इमेजिंग, स्ट्रोक के लिए थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी, ब्रेन ट्यूमर के लिए माइक्रोस्कोपिक और एंडोस्कोपिक सर्जरी, 24x7 इमरजेंसी केयर आदि सुविधाएं है।

युवा अवस्था में बढ़ रहे ब्रेन ट्यूमर के मामले

डॉ. कछारा ने बताया कि पहले ब्रेन ट्यूमर को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह युवा वर्ग में भी देखा जा रहा है। इसके कारण में समय पर डायग्नोसिस भी शामिल है। अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से ब्रेन ट्यूमर जल्दी पहचान में आ रहा है। इसके अलावा प्रदूषण, अनुवांशिक कारण और खराब जीवनशैली भी इसका कारण बन रहे हैं। ब्रेन से जुड़ी बीमारियों के लक्षण समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। ब्रेन ट्यूमर के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बेनाइन ट्यूमर (साधारण ट्यूमर) में कई दिनों तक लक्षण नजर नहीं आते, जबकि कैंसर वाले ट्यूमर के लक्षण 2-3 महीने में दिखाई देने लगते हैं।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण:

  • लगातार सिर दर्द
  • बार-बार उल्टी
  • मिर्गी के दौरे
  • बोलने या चलने में परेशानी
  • झुनझुनी

हार्ट अटैक की तरह होता है स्ट्रोक या ब्रेन अटैक

स्ट्रोक या ब्रेन अटैक हार्ट अटैक की तरह की एकदम से होता है। इसमें आवश्यक है कि लक्षण दिखते ही तुरंत मरीज को नजदीकी न्यूरोलॉजिकल या न्यूरोसर्जिकल सेंटर ले जाएं। इसमें समय बेहद अहम होता है, 4.5 घंटे के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। डॉ. कछारा के मुताबिक स्ट्रोक में हर मिनट कीमती है। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतनी ही अधिक जान बचने की संभावना होगी। आजकल ऐसी दवाइयां उपलब्ध हैं, जो ब्लड क्लॉट को घोल सकती हैं। अगर समय पर दवा दी जाए तो मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

स्ट्रोक के लक्षण

  • मुंह टेढ़ा होना
  • हाथ-पैर सुन्न होना
  • बोलने में समस्या
  • नजर धुंधली होना आदि।

इसलिए मनाते हैं विश्व ब्रेन दिवस

विश्व ब्रेन दिवस हर साल 22 जुलाई को वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी की पहल पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है लोगों को ब्रेन की बीमारियों और समय पर इलाज के महत्व के बारे में जागरूक करना। हर वर्ष इसकी एक थीम तय की जाती है।


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