सत्ता के गलियारे की तस्वीर का रंग तय करेंगी मालवा-निमाड़ की 22 सीटें

Updated on 18-08-2023 12:13 PM
 इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में मालवा-निमाड़ को यूं ही सत्ता का गलियारा नहीं कहा जाता। जिस राजनीतिक दल को इस क्षेत्र में बढ़त मिलती है, उसका सत्ता के शीर्ष तक पहुंचना तय हो जाता है। यही वजह है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ क्षेत्र की अहम भूमिका रहने वाली है। 66 विधानसभा सीटों वाले इस क्षेत्र में वर्ष 2018 के चुनाव में जैसे ही समीकरण बदले वैसे ही प्रदेश में भी उलटफेर हो गया था। 15 महीने की कांग्रेस सरकार के बाद भाजपा ने दोबारा सत्ता में आते ही इस क्षेत्र को केंद्र में रखकर अपनी पुरानी स्थिति दोबारा हासिल करने की कवायद तेज कर दी थी।

मालवा-निमाड़ की एसटी मतदाता बहुल 22 सीटों पर भाजपा सरकार और संगठन चरणबद्ध तरीके से सक्रिय हैं। चाहे आदिवासी समुदाय के महापुरुषों के नाम पर की गई घोषणाएं हों या फिर युवाओं, महिलाओं पर केंद्रित योजनाओं को छोटे-छोटे टोले-मजरों तक पहुंचाना हो, भाजपा ने अपने विधायक-सांसदों और मंत्रियों की जिम्मेदारी तय कर उन्हें लगातार क्षेत्र में भेजा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी महीनों से मालवा-निमाड़ के दौरे कर रहे हैं। दोबारा सत्ता में आते ही श्री महाकाल महालोक का भव्य उद्घाटन करने के बाद ओंकारेश्वर में भी आदि गुरु शंकराचार्य का लोक तैयार हो रहा है। आदिवासी वर्ग को साधने के लिए झाबुआ से लेकर इंदौर तक टंट्या मामा की प्रतिमाएं लगाने और इंदौर जैसे शहर में भी आइटी पार्क चौराहे का नाम टंट्या मामा के नाम पर रखने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

लक्ष्य एक ही है कि किसी भी तरह कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मतदाताओं की बेरुखी दूर हो जाए और उनका खोया गढ़ उन्हें दोबारा मिल जाए। उधर, कांग्रेस ने भी बीते साढ़े तीन साल में अपनी ताकत इसी पर लगाई है कि मालवा-निमाड़ क्षेत्र में वर्ष 2018 का अपना प्रदर्शन बरकरार रख सके।

वर्ष 2003 में सरकार बनते ही भाजपा ने मालवा-निमाड़ क्षेत्र को अपना मजबूत गढ़ बनाना शुरू कर दिया था। लगातार 15 वर्ष तक भाजपा इस क्षेत्र पर न सिर्फ काबिज रही बल्कि उन सीटों को भी छीन लिया जिन पर दशकों तक कांग्रेस जीतती आई थी। गांव-गांव तक फैले नेटवर्क की मजबूती की वजह से भी भाजपा नेता आश्वस्त रहे कि उनकी राजनीतिक जमीन कोई नहीं हिला सकता। लेकिन वर्ष 2018 के चुनाव में यह जमीन न सिर्फ हिली बल्कि पैरों के नीचे से खिसक भी गई।

2013 के विधानसभा चुनाव में 66 में से 57 सीटें जीतने वाली भाजपा 2018 में 27 सीटों पर सिमट गई। एसटी मतदाता बहुल सीटों पर भाजपा को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा। खरगोन, बुरहानपुर और आलीराजपुर जैसे जिलों में एक भी सीट भाजपा नहीं जीत सकी। जबकि धार, झाबुआ, बड़वानी और शाजापुर में एक-एक सीट ही मिल सकी थी।

एकजुटता की कमी और पुराने चेहरों पर ही भरोसा पड़ा भारी

वर्ष 2018 की पराजय के बाद प्रदेश से लेकर केंद्र तक एक ही सवाल बार-बार कौंधता रहा कि संघ का गढ़, मजबूत नेटवर्क के बाद भी भाजपा कमजोर क्यों हुई? आदिवासी वोटबैंक किन कारणों की वजह से दोबारा कांग्रेस के पास चला गया। दरअसल 2013 से 18 के बीच मालवा-निमाड़ में भाजपा नेताओं में एकजुटता की कमी स्पष्ट रूप से नजर आने लगी थी। अनुषांगिक संगठनों के साथ ही भाजपा के मोर्चा-प्रकोष्ठ जिस अति आत्मविश्वास की अवस्था में रहे उसने न सिर्फ कार्यकर्ताओं बल्कि मतदाताओं को भी दूर कर दिया। संगठनात्मक रूप से भी बार-बार उन्हीं चेहरों को दोहराने और कार्यकर्ताओं के विचार-विरोध को दरकिनार करने का का कदम भी आत्मघाती साबित हुआ।

नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में जुटा संगठन

मालवा-निमाड़ क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की नाराजगी से जूझ रहे भाजपा संगठन को वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नवाचारों की प्रयोगशाला बना दिया था। कभी युवा भाजपा बनाम वरिष्ठ भाजपा जैसे फार्मूले के नाम पर वरिष्ठ टीम को किनारे किया तो कभी पुराने चेहरों के आगे किसी को तवज्जो नहीं देने जैसे कदम उठाकर कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया।

मालवा-निमाड़ क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने वाले नौ मंत्रियों में से भी ज्यादातर के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने अपनी अनदेखी की शिकायतें बार-बार संगठन को भेजीं। मंत्री फोन नहीं उठाते और क्षेत्र में नहीं रहते जैसे आरोप जनता ने भी लगाए लेकिन इस पर न सरकार ने ध्यान दिया न संगठन ने। चुनाव सामने आते ही जब नाराजगी बड़े मुद्दे के रूप में सामने आने लगी तो पुराने कार्यकर्ताओं को ढूंढ-ढूंढकर 'प्रथम पूज्य' की तरह मंच पर बैठाया जाने लगा।

कड़ी चुनौती का दावा लेकिन गुटों से पार पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं

उधर, अपने नेताओं में एकजुटता नहीं होने की वजह से 15 माह में सरकार गंवाने वाली कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की एंटी इन्कंबैंसी के भरोसे खुद को मजबूत स्थिति में होने का दावा अवश्य करती है लेकिन अपने नेताओं की एकजुटता को लेकर अब भी कांग्रेस कार्यकर्ता ही पूरी तरह आश्वस्त नजर नहीं आते। वरिष्ठ नेताओं के समर्थक मौका -मिलते ही एक दूसरे पर वार करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी करने जब एक गुट मैदान में होता है तो दूसरा गुट दूरी बना लेता है।

'नए चेहरों' की कमी से पार पाना होगा मुश्किल

मालवा-निमाड़ क्षेत्र में कांग्रेस नए चेहरों की कमी से जूझ रही है। आदिवासी मतदाता बहुल क्षेत्र यूं तो सालों-साल कांग्रेस का गढ़ रहे हैं लेकिन बीते सालों में यहां नया नेतृत्व तैयार नहीं हो सका। फिलहाल कांग्रेस ने इस क्षेत्र की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्री और झाबुआ विधायक कांतिलाल भूरिया को सौंपी है लेकिन उनका प्रभाव क्षेत्र मालवांचल के जिलों में ही अधिक है।

पूर्व में जमुना देवी और सूरजभानू सिंह सोलंकी जैसे नेता जो प्रदेश के उपमुख्यमंत्री भी बने या फिर दिलीप सिंह भूरिया जैसे नेता जिन्होंने दशकों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया कांग्रेस के साथ रहे। लेकिन अब वैसा नेतृत्व कांग्रेस के पास इस क्षेत्र में नहीं है। गैर आदिवासी क्षेत्रों में भी कांग्रेस सज्जन सिंह वर्मा, विजयलक्ष्मी साधौ, हुकुमसिंह कराड़ा,जीतू पटवारी आदि के सहारे ही है।

निमाड़ क्षेत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव सक्रिय हैं लेकिन कांग्रेस के दूसरे गुट उनकी स्वीकार्यता को लेकर हमेशा सवाल उठाते रहते हैं। ऐसे में सत्ता के गलियारे की राह कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 August 2026
इस फ्रेंडशिप डे (2 अगस्त) के अवसर पर एयरटेल ने अपने ग्राहकों के लिए दोस्ती का जश्न मनाने का एक नया और खास तरीका पेश किया है। अब एयरटेल ऐप के जरिए…
 01 August 2026
इंदौर। “सभ्य समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव शिक्षा पर टिकी होती है और पुस्तकें उस नींव को मजबूती देने वाला सबसे सशक्त माध्यम हैं। जब समाज का जिम्मेदार नागरिक…
 24 July 2026
इंदौर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार, 26 जुलाई, को डॉ. संदीप जुल्का के नेतृत्व में टीम हेल्थकेयर सोल्जर्स द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सुपर स्पेशियलिटी…
 18 July 2026
इंदौर: कबाब की खुशबू, दम बिरयानी का लज़ीज़ स्वाद और पारंपरिक करीज़ का असली जायका अब एक ही जगह पर मिलने वाला है। एसेंशिया लग्ज़री होटल इंदौर में 26 जुलाई…
 18 July 2026
भोपाल  आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (AESL), जो टेस्ट की तैयारी कराने वाली सर्विसेज़ में देश की लीडर है, ने गर्व के साथ बताया कि भोपाल में उसके क्लासरूम प्रोग्राम के अनेक…
 16 July 2026
भोपाल : मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा जल संरक्षण एवं जन-जागरूकता को…
 14 July 2026
भोपाल। बिड़ला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल, भोपाल में आयोजित इन्वेस्टिचर सेरेमनी-2026 के अवसर पर बिड़ला ओपन माइंड्स के प्रबंध निदेशक निर्वाण बिड़ला ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को…
 13 July 2026
नई दिल्ली : भारत में निजी क्षेत्र की अग्रणी जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एचडीएफसी इर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ, 2026 सीजन के लिए अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर,…
 07 July 2026
 इंदौर — द परफेक्ट क्रश, एक एपिसोडिक इंस्टाग्राम रील सीरीज़, का प्रीमियर द क्रश कॉफी, गीता भवन पर हुआ। इस सीरीज़ की कहानी इंदौर के ऋषभ राज शर्मा ने लिखी और क्रिएट की…
Advt.