
बताया जा रहा है कि 14 अगस्त को फ्लैग ऑफ के बाद डायल-112 के 63 नए वाहन भोपाल पुलिस आयुक्त कार्यालय परिसर में खड़े किए गए थे। तय हुआ था कि इनका पायलट टेस्ट होगा, उसके बाद 31 अगस्त से इन्हें संबंधित थाना क्षेत्रों में तैनात कर दिया जाएगा। जब पायलट टेस्ट की बारी आई तो पता चला कि 39 वाहनों की चाबियों का पूरा गुच्छा गायब है। ड्राइवरों और पायलट टेस्ट के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने स्तर पर इनको तलाशने की कोशिश की।
जब चाबियों का पता नहीं चला तो बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। वहां से गाड़ियों के लिए डुप्लीकेट चाबियां बनवाने का आदेश हुआ। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने भोपाल के अलग-अलग स्टोर पर संपर्क कर 39 गाड़ियों के लिए नई चाबियां बनाने का ऑर्डर दिया। बताया जा रहा है कि इन चाबियों को बनवाने में प्रति चाबी दो हजार रुपये का खर्च आया। इस मान से इस लापरवाही की कीमत 78 हजार रुपये देकर चुकानी पड़ी है। जब नई चाबियां बनवाने पर खर्च हो गया तो गुम हुई असली चाबियां भी मिल गईं
इस मामले में अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्र ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। वहीं कनिष्ठ अधिकारी आधिकारिक तौर पर चाबियों की गुमशुदगी की बात स्वीकार नहीं कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि चाबियों की अदला बदली हो गई थी जो अब मिल गई हैं।