तीसरा नेशनल हिप कोर्सऔर इंडोकॉन 23 जनवरी से

Updated on 20-01-2026 04:56 PM

इंदौरतीसरे नेशनल हिप कोर्स और इंडोकॉन 2026 की शुरुआत 23 जनवरी से होने जा रही है। तीन दिवसीय यह आयोजन 25 जनवरी तक चलेगा, जिसमें देशभर के ऑर्थोपेडिक सर्जन, जॉइंट रिप्लेसमेंट एक्स्पर्ट्स, रेज़िडेंट डॉक्टर और रिसर्चर्स भाग लेंगे। कोर्स और कॉन्फ्रेंस हिप सर्जरी, ट्रॉमा केयर, आधुनिक तकनीकों और उभरती प्रैक्टिस पर केंद्रित होगी।

इंडोकॉन में पहली बार इंदौर में लेटेस्ट टेक्निक और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता एक साथ देखने को मिलेगी। कैडेवर कोर्स में 100 से अधिक डेलीगेट्स भाग लेंगे और इंग्लैंड, साउथ कोरिया और कनाडा से तीन इंटरनेशनल फैकल्टी रहेंगी। यह हिप सर्जरी सीखने के किसी भी स्थानीय आयोजन में सबसे बड़ी भागीदारी होने जा रहा है।

कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने कोर्स और कॉन्फ्रेंस के बारे में कहा कि इन तीन दिनों में शहर की ऑर्थोपेडिक और सर्जिकल फील्ड की बढ़ती हुई क्षमता देखने को मिलेगी। हमारा फोकस ‘हिप प्रिज़र्वेशन’ पर रहेगा, जो युवा मरीजों में प्राकृतिक जोड़सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा कॉम्प्लेक्स हिप रिप्लेसमेंट, रिवीज़न आर्थ्रोप्लास्टी और रोबोटिक सर्जरी पर भी सेशन्स रखे गए हैं। संक्षेप में कहें तो यह सम्मेलन सिर्फ अकादमिक चर्चा का मंच नहीं, बल्कि स्किल और टेक्नॉलॉजी के ट्रांसफर का मौका भी है।”

इसके साथ ही एआई आधारित हिप सर्जरी टेक्निकपर एक सत्र आयोजित होगा, जिसमें 3डी प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, इमेज-बेस्ड एनालीसिस, वर्चुअल मॉडलिंग और नेविगेशन सिस्टम का उपयोग किस तरह सर्जरी को अधिक सटीक, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित बनाता है—इस पर विशेषज्ञ विस्तार से चर्चा करेंगे। प्रैक्टिकल डिमॉन्स्ट्रेशन में आधुनिक सर्जिकल उपकरणों, इम्प्लांट, नई प्रक्रियाओं का वास्तविक उपयोग दिखाया जाएगा ताकि प्रतिभागी तकनीक की बारीकियों को नजदीक से समझ सकें। इन सभी कारणों से इस बार यह अधिक व्यापक, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन बनने जा रहा है।

कॉन्फ्रेंस के सेक्रेटरी और दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन जैन ने बताया कि हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में हिप फ्रैक्चर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके साथ ही लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ने के कारण बुजुर्गों में भी हिप से जुड़ी समस्याएँ और जटिलताएँ तेज़ी से बढ़ी हैं। यही कारण है कि इस वर्ष के आयोजन में हिप सर्जरी पर विशेष फोकस रखा गया है, ताकि आधुनिक तकनीकों और वैश्विक विशेषज्ञता को एक मंच पर लाकर बेहतर उपचार और उन्नत चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा सके। 23वीं इंडोकॉन का उद्देश्य पारंपरिक ऑर्थोपेडिक्स को उभरती तकनीकों के साथ जोड़ना है। इस वर्ष पहली बार यूके से आए डॉ. मालवीया के साथ मिलकर कैडेवर पर हिप आर्थ्रोस्कोपी का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी होगा, जो युवा सर्जनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अनुभव रहेगा। बड़ी संख्या में रेज़िडेंट्स और कंसल्टेंट चिकित्सकों की भागीदारी से मानकीकृत उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और अंततः मरीजों को बेहतर परिणाम मिलेंगे।

23 जनवरी को कार्यक्रम की शुरुआत इरकाड इंडिया में कैडेवरिक वर्कशॉप से होगी, जहाँ सरजन्स को कॉम्प्लेक्स हिप सर्जरी की हैंड्स ऑन ट्रैनिंग दी जाएगी। 24 और 25 जनवरी को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में वैज्ञानिक सेशन्स आयोजित होंगे। इनमें हिप प्रिज़र्वेशन, मिनिमली इनवेसिव रिप्लेसमेंट, रिवीज़न आर्थ्रोप्लास्टी, जटिल ट्रॉमा मैनेजमेंट और लेटेस्ट टेक्नॉलॉजीपर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। केस डिस्कशन और पैनल बातचीत भी सेशन्स का हिस्सा रहेंगी।

कोर्स कन्वेनर डॉ. अभिजीत पंडित ने बताया कि इस वर्ष वैज्ञानिक सेशन्स में बायोमैकेनिक्स, इम्प्लांट डिजाइन, रिसर्च आधारित इनोवेशन और सर्जिकल टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर दिया जाएगा। एओएसआई और हिप हेल्थ कमेटी (एचएचसी) द्वारा तैयार किए गए ये सेशन्स युवा सरजन्स को लेटेस्ट टेक्निक और कलोबाल प्रैक्टिस से जोड़ेंगे। नई तकनीकों के परिचय, लाइव डेमो, साइन्टिफिक सेशन्स, डिस्कशन और अनुभव आधारित ट्रैनिंग इस कोर्स और कॉन्फ्रेंस की खासियत रहेंगे।”

कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. एस. के. लुनावत ने बताया कि इस बार सम्मेलन की थीम “एवरीथिंग अराउंड हिप” रखी गई है। उन्होंने कहा कि थीम के अनुसार हिप से जुड़े सभी विषय जैसे कूल्हे की फ्रैक्चर सर्जरी, ऑर्थ्रोप्लास्टी, आदि पर लेटेस्ट ट्रीटमेंट और टेक्नॉलॉजी पर चर्चा होगी। डॉ. लुनावत ने कहा कि इससे इंदौर के साथ मध्य भारत के मरीजों को बेहतर उपचार विकल्प मिल सकेंगे और यह कॉन्फ्रेंस क्षेत्र के लिए लंबे समय तक लाभकारी साबित होगा।


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