बादाम खाने से आंतों के माइक्रोबायोटा की कार्यक्षमता को पहुंच सकता है फायदा

Updated on 31-10-2022 11:39 PM
भोपाल : इंसानों के आंतों के माइक्रोबायोम को समझने में वैज्ञानिक प्रगति, पोषण और पेट संबंधी स्वास्थ्य विशेषज्ञों को रोमांचित करता है शोधकर्ता जानते हैं कि भोजन आंतों के माइक्रोबायोम को इस तरह से प्रभावित करता है जिससे सेहत को लाभ मिलता है और बीमारियों से बचाव होता है लेकिन वे अभी भी इसकी प्रणाली को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह आखिर कैसे होता है। बादाम को लेकर हुए नए शोध इस पहेली में एक और कड़ी को जोड़ते हैं। एक क्लीनिकल स्टडी में इस बात का पता लगाया गया कि किस तरह से आंत के सूक्ष्म जीव, ब्यूटायरेट का निर्माण करने के लिये बादाम को तोड़ते हैं यह खास तरह का माइक्रोबायोटा उत्पाद है, जिससे कि सेहत के कई सारे फायदे जुड़े हैं।नए रिसर्च  में पाया गया कि बादाम खाने से उल्लेखनीय रूप से ब्यूटायरेट में वृद्धि होती है। यह कोलन में पाया जाने वाला, एक प्रकाकर का फायदेमंद शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (एससीएफए) है। 
केविन व्हेलन, पीएचडी, आरडी डायटेटिक्स के प्रोफेसर किंग्स कॉलेज लंदन ने कहा जिस तरह से गट माइक्रोबायोटा इंसानी सेहत को प्रभावित करता है वह शॉर्ट-चेन फैटी एसिड के निर्माण की वजह से होता है ये अणु कोलन की कोशिकाओं के लिये ईंधन की तरह काम करते हैं वे आंत में अन्य पोषक तत्चों को अवशोषित करने को नियंत्रित करते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित करने में मदद करते हैं प्रोफेसर व्हेलहन कहते हैं हमारा मानना है कि ये परिणाम बताते हैं कि बादाम खाने से बैक्टीरियल मेटाबॉलिज्म पर इस तरह से प्रभाव पड़ता है कि इसमें इंसानी सेहत को प्रभावित करने की क्षमता होती है
इस अध्ययन पर अपनी बात रखते हुए रितिका समद्दार रीजनल हेड डायटेटिक्स, मैक्स हेल्थकेयर दिल्ली का कहना है एक अच्छे इम्युन सिस्टम और संपूर्ण सेहत के लिये एक सेहतमंद आंत बहुत जरूरी होती है आंत को असंतुलित करने के कई कारक हो सकते हैं जिसकी वजह से अच्छे बैक्टीरिया की जगह खराब बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने लगती है। इससे सेहत पर कुछ हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं आंत की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिये हम जो खाते हैं, उसके बारे में सतर्क होना जरूरी है यह अध्ययन बताता है कि बादाम खाना, फाइबर को बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है जोकि माइक्रोबायोटा की कार्यक्षमता पर सकारात्मक बदलाव कर सकता है इसमें इंसानी सेहत को सकारात्मक रूप से बदलने की क्षमता होती है।”
न्यूट्रिशन एवं वेलनेस कंसल्टेंट शीला कृष्णस्वामी कहती हैं ब्यूटीयरेट उन शॉर्ट चेन फैटी एसिड में से एक है जोकि आंत की सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है इसका निर्माण तब होता है जब आंत में फाइबर का पाचन होता है और यह नींद को बेहतर बनाने और सूजन से लड़ने में मदद कर सकता है ब्यूटीरेट का संबंध कोलन कैंसर के खतरे को कम करने से भी है इसलिए, आंत की सेहत को बेहतर बनाने के लिये हमें उन खाद्य पदार्थों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जोकि शॉर्ट-चेन फैटी एसिड के स्तर को बढ़ाने में मदद करे, जिसमें ब्यूटीरेट स्तर शामिल है। यह अध्ययन दर्शाता है कि बादाम खाने से कोलन में ब्यूटीरेट में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। साथ ही बादाम से और भी फायदे मिलते हैं जैसे मूफा की मात्रा में बढ़ोतरी, कुल फाइबर, पोटेशियम, मैगनीशियम और अन्य पोषक तत्व।”
इंटीग्रेटिव न्यूट्रिनिस्ट और हेल्थ कोच नेहा रंगलानी कहती हैं स्नैकिंग हमें ऊर्जा देने के लिये महत्वपूर्ण है लेकिन हमें स्नैक्स के रूप में खाने वाले भोजन को चुनने के मामले में सावधान रहने की जरूरत है अस्वास्थ्यकर स्नैक्स या उच्च वसायुक्त, मीठा और नमकीन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन हमारे पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है और कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। यह अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि आहार किस तरह से आंत के माइक्रोबायोम को प्रभावित करता है जिससे स्वास्थ्य को लाभ होता है और बीमारी को रोकने में मदद मिलती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि बादाम का सेवन आंत के लिये फायदेमंद होता है क्योंकि ये मानव शरीर में ब्यूटीरेट के स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं। बादाम फाइबर का एक स्रोत है जिसे ब्यूटीरेट बनाने के लिये आंत के रोगाणुओं द्वारा चयापचय किया जाता है। यह सीधे आंत को लाभ पहुंचाता है और आंत के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।”
आंत में सूक्ष्मजीवों द्वारा,  तब ब्यूटीरेट का निर्माण होता है, जब वे फाइबर का पाचन करते हैं। यह कोलोनोसाइट्स के लिये ऊर्जा का प्रथम स्रोत है। ये कोशिकाएं, कोलन में पाई जाती हैं और मानव स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसमें नींद को बेहतर बनाना और सूजन से लड़ने में मदद करना और साथ ही इसका संबंध कोलन कैंसर के खतरे को कम करने से जुड़ा है। बादाम खाने से मल त्याग में भी काफी अच्छा परिणाम मिलता है। नियमित रूप से मलत्याग, पेट संबंधी तंत्र के सुचारू रूप में कार्य करने से जुड़ा होता है। 


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