
इन पौधों के औषधीय गुणों को प्रयोगशाला में परखा जा रहा है। इसके बाद इन्हें औषधीय परीक्षण के दौर से गुजरना होगा। डॉ. अंजली ने कहा कि यह शोध सिर्फ चिकित्सा जगत में नई दिशा नहीं देगा, बल्कि विदेशी औषधीय पौधों पर निर्भरता भी घटाएगा। इससे आयुर्वेदिक दवाओं की लागत कम होगी और मरीजों को सस्ती व असरदार दवाएं मिल सकेंगी।
जारूल : बैंगनी फूलों वाला सुंदर वृक्ष, गर्मी और बरसात में खिलता है। इसकी यां मधुमेह और सूजन में लाभकारी। शहरों में सजावटी पौधे के रूप में लोकप्रिय है।
मिट्टीवती : सूखी व दलदली जमीन में उगने वाला औषधीय पौधा। जड़ों का उपयोग त्वचा रोगों और बुखार में होता है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक।
दहीमन : दूधिया रस वाला छोटा पौधा, गांवों में बहुतायत पाया जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में पत्तियां और तना दस्त, बुखार, त्वचा संक्रमण के इलाज में उपयोगी हैं। मिट्टी में नमी बनाए रखता है।