सेहरी-इफ्तारी का वक्त बताने छोड़े जाते थे तोप के गोले:भोपाल से दूर तक सुनाई देती थी गर्जना, अब मस्जिद से चलाए जाते हैं पटाखे

Updated on 03-03-2025 01:05 PM

दशकों पहले रमजान उल मुबारक में भोपाल में तोपें गोले उगलती थीं। इनकी गर्जना कई किलोमीटर तक सुनाई देती थी। इसके बाद लोग सेहरी और इफ्तार करते थे। ईदुल फितर और ईदुल अजहा पर भी तोप की गूंज सुनाई देती थी। ये एक रिवायत थी।

अब इसकी जगह तेज आवाज के पटाखों ने ले ली है, परंतु भोपाल रियासत का एक हिस्सा रहे रायसेन में ये रिवायत बरकरार है। दरअसल, भोपाल में करीब 242 साल नवाबी शासन रहा। यहां के शासकों का रिश्ता अफगानिस्तान से होने के कारण वहां की छाप इनके क्रियाकलापों में दिखाई देती थी।

आधुनिक उपकरण नहीं थे, तो रियासत की तोपों का करते इस्तेमाल

सात दशक पहले तक भोपाल आधुनिक शहर नहीं था। आज ताे रमजान में सेहरी और इफ्तार का वक्त मोबाइल, घड़ी अलार्म, सोशल मीडिया आदि से पता चल जाता है, लेकिन तब वक्त बताने के लिए आधुनिक उपकरण नहीं थे। लिहाजा, सेहरी और इफ्तार का वक्त बताने के लिए रियासत की ओर से तोपों का इस्तेमाल किया जाता था।

इसके कारण दूरदराज के लोग भी जान जाते थे। तोपों के इस्तेमाल के लिए फतेहगढ़ किले के बुर्ज का उपयोग होता था। इस मंजर को देखने भीड़ भी जमा होती थी। तब शहरी क्षेत्र एक कस्बे की शक्ल में बमुश्किल 30 वर्ग किमी में सिमटा हुआ था। आबादी का बड़ा हिस्सा पुराने शहर में रहता था।

जहांगीराबाद जैसा आबाद इलाका शहरी सीमा के भीतर नहीं था। भेल, कोलार, बैरागढ़, कोटरा, मिसरोद जैसे उपनगर नहीं थे। गिने-चुने स्थानों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में स्ट्रीट लाइट भी नहीं थीं। उस दौर में ईदुल फितर और ईदुल अजहा के दिन ईदगाह बुर्ज से तोप गरजती थी।

पूरे रमजान चलता था यह सिलसिला

एक-एक कर तीन गोले छूटते ताकि लोगों को पता चल जाए कि नमाज अदा हो गई। इस तोप का बुर्ज अब भी ईदगाह में कायम है। बुर्ज पर रखी तोप का रुख भी बड़े तालाब की तरफ रहता ताकि आम आदमी या मवेशी इसकी चपेट में न आएं। तोप गरजने का सिलसिला ईद का चांद दिखाई देने के साथ शुरू होता था।

पूरे रमजान माह यह सिलसिला चलता। इसके लिए नवाबी हुकूमत की ओर से बारूद अलॉटमेंट का परमिट जारी होता था। इसमें रोजाना उपयोग में आने वाली बारूद की मात्रा का उल्लेख रहता था। उसी अनुपात में आवंटन होता था। यहां तोप चलाने की कार्यवाही रियासत कर्मी करते थे। भोपाल और रायसेन में फर्क इतना था कि वहां सेहरी में तोप चलाने के बदले नगाड़े बजाए जाते थे।

1948 से बंद हुई यह परंपरा

भोपाल में तोप चलने की परंपरा संभवतः 1948 से बंद हुई है। इसके बाद मस्जिद से गोले (तेज आवाज के पटाखे) छोड़ने की परंपरा शुरू हुई, जो अब भी जारी है। इसके लिए प्रशासन से अनुमति ली जाती है। ईदुल फितर और ईदुल अजहा पर भी नमाज अदायगी के बाद ईदगाह से गोले छोड़े जाते हैं।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 24 July 2026
इंदौर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार, 26 जुलाई, को डॉ. संदीप जुल्का के नेतृत्व में टीम हेल्थकेयर सोल्जर्स द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सुपर स्पेशियलिटी…
 18 July 2026
इंदौर: कबाब की खुशबू, दम बिरयानी का लज़ीज़ स्वाद और पारंपरिक करीज़ का असली जायका अब एक ही जगह पर मिलने वाला है। एसेंशिया लग्ज़री होटल इंदौर में 26 जुलाई…
 18 July 2026
भोपाल  आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (AESL), जो टेस्ट की तैयारी कराने वाली सर्विसेज़ में देश की लीडर है, ने गर्व के साथ बताया कि भोपाल में उसके क्लासरूम प्रोग्राम के अनेक…
 16 July 2026
भोपाल : मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा जल संरक्षण एवं जन-जागरूकता को…
 14 July 2026
भोपाल। बिड़ला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल, भोपाल में आयोजित इन्वेस्टिचर सेरेमनी-2026 के अवसर पर बिड़ला ओपन माइंड्स के प्रबंध निदेशक निर्वाण बिड़ला ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को…
 13 July 2026
नई दिल्ली : भारत में निजी क्षेत्र की अग्रणी जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एचडीएफसी इर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ, 2026 सीजन के लिए अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर,…
 07 July 2026
 इंदौर — द परफेक्ट क्रश, एक एपिसोडिक इंस्टाग्राम रील सीरीज़, का प्रीमियर द क्रश कॉफी, गीता भवन पर हुआ। इस सीरीज़ की कहानी इंदौर के ऋषभ राज शर्मा ने लिखी और क्रिएट की…
 04 July 2026
इंदौर। बारिश का मौसम लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का एक अलग मौका देता है। इसी मौसम को खास बनाने के लिए शहर में हर रविवार…
 01 July 2026
इंदौर। मिताशा फाउंडेशन एवं डायोसिस ऑफ इंदौर के संयुक्त नेतृत्व में, केरल समाजम, रोटरी क्लब ऑफ इंदौर आदर्श एवं एसवीडी सोसायटी के सहयोग से आयोजित "संकल्प एक लाख अंगदान से…
Advt.