सीएम बोले- मध्यप्रदेश अब बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स हब:मध्यप्रदेश में मिला रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार, चीन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा

Updated on 20-08-2025 01:47 PM

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब क्रिटिकल मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) का हब बनेगा। मध्यप्रदेश ऊर्जा राजधानी के साथ-साथ अब क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी भी कहलाएगा। इससे भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी देश बनने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाएगा। सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आईईई) का अपार भंडार मिलने से अब भारत को चीन जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

पहली बार इतने बड़े भंडार की पुष्टि

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसद में जानकारी दी थी कि भारत में पहली बार इतनी विशाल मात्रा में इन दुर्लभ तत्वों की खोज हुई है। यह उपलब्धि भारत को ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ओर बड़ा कदम

रेयर अर्थ एलिमेंट्स को आधुनिक तकनीक का मूल आधार माना जाता है। अब तक भारत इन खनिजों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर रहा है। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में हुई यह खोज भारत को आयात-निर्भरता से मुक्ति दिलाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगी। यह खोज आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ ही औद्योगिक विकास को नई गति देगी।

सिंगरौली अब भविष्य का क्रिटिकल मिनरल्स हब

कोल इंडिया लिमिटेड के किए गए शोध में सिंगरौली की कोयला खदानों और चट्टानों में आरईई (जैसे स्कैंडियम, यिट्रियम ) की आशाजनक सांद्रता पाई गई है। कोयले में इनकी औसत मात्रा 250 PPM और गैर-कोयला स्तर पर लगभग 400 PPM दर्ज की गई है।

जुलाई 2025 में इस खोज की आधिकारिक घोषणा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कोयले की राख (फ्लाई ऐश) और ओवरबर्डन भी क्रिटिकल मिनरल्स के द्वितीयक स्रोत बन सकते हैं।

आईआरईएल के साथ सहयोग

रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज को देखते हुए राज्य सरकार अब इनके प्रसंस्करण और अनुसंधान के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में जुटी है। हाल ही में खनिज संसाधन विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) की भोपाल इकाई का दौरा किया और संभावित सहयोग पर चर्चा की।

विभाग द्वारा आरईई पर "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और उद्योग को वैश्विक स्तर पर सहयोग प्रदान करेगा।

वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत

सिंगरौली जिले में मिले इस खजाने से भारत ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और उच्च तकनीकी उद्योगों में आत्मनिर्भर बनेगा। आने वाले सालों में मध्यप्रदेश केवल ऊर्जा की राजधानी नहीं, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी के रूप में भी जाना जाएगा। चीन पर निर्भरता समाप्त होगी और भारत वैश्विक मंच पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

प्रमुख स्रोत और भूगर्भीय संरचनाएं

रेयर अर्थ एलिमेंट्स प्राकृतिक रूप से अलग-अलग खनिज संरचनाओं में पाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं

  • बास्टनेसाइट
  • जेनोटाइम
  • लोपेराइट
  • मोनाजाइट

भारत के तटीय क्षेत्रों की रेत और अपक्षयित ग्रेनाइट से बनी मिट्टी भी इन दुर्लभ तत्वों से समृद्ध मानी जाती है।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स के प्रमुख उपयोग

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग आधुनिक उद्योगों के कई क्षेत्रों में किया जाता है:

  • रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक:सैमरियम-कोबाल्ट और नियोडिमियम चुंबक उच्च-प्रदर्शन हथियारों, उपग्रह संचार और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में आवश्यक हैं।
  • पेट्रोलियम उद्योग:लैंथेनम और सेरियम का उपयोग ऑटोमोटिव कैटेलिटिक कन्वर्टर्स और रिफाइनिंग में उत्सर्जन कम करने हेतु होता है।
  • स्थायी चुंबक :नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन और सैमरियम-कोबाल्ट चुंबक इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन ऊर्जा संयंत्रों में प्रमुख हैं।
  • डिस्प्ले और प्रकाश उपकरण:यूरोपियम, टर्बियम और यिट्रियम का उपयोग एलईडी, एलसीडी और फ्लैट पैनल डिस्प्ले में होता है। स्मार्टफोन और कैमरा लेंसों में 50% तक लैंथेनम का उपयोग होता है।
  • ऑटोमोबाइल सेक्टर:हाइब्रिड वाहनों की बैटरियों में लैंथेनम आधारित मिश्र धातुओं का उपयोग होता है।
  • इस्पात और मिश्रधातु निर्माण: मिशमेटल (सेरियम, लैंथेनम, नियोडिमियम और प्रेजोडायमियम का मिश्रण) इस्पात की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र: गैडोलीनियम MRI स्कैन में कंट्रास्ट एजेंट के रूप में प्रयोग होता है, जबकि ल्यूटेटियम और यिट्रियम समस्थानिक कैंसर उपचार और PET इमेजिंग में उपयोग किए जाते हैं।


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