
इस बीच रोपवे प्रणाली के कर्मचारी बिना टिकट वाले वीआईपी लोगों को शीघ्र दर्शन कराकर ले आए। इस परिवार ने इस पर आपत्ति जताई तो उनके साथ रोपवे प्रणाली के कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया। इससे आहत होकर उन्होंने 2022 में मां शारदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और दामोदर रोपवे इंफ्रा लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर करके पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी।
भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, सदस्य अंजुम फिरोज व प्रीति मुद्गल की बैंच ने सुनवाई में इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन समिति और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को परिवार को दर्शन से वंचित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
उपभोक्ता मामलों की अधिवक्ता संभावना राजपूत ने बताया कि प्रकरण में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था ही आधार बनी है। जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्णय में कहा कि किसी भी मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआइपी नहीं होता है। सभी को एक ही श्रेणी में रखकर लाइन में लगाकर मां शारदा का दर्शन कराने का नियम होना चाहिए। यदि कोई भक्त रोपवे से टिकट लेकर लाइन में लगा और दो घंटे बाद भी दर्शन नहीं हो पाए, वहीं दूसरों को विशेष श्रेणी का दर्जा देकर दर्शन कराया गया तो यह सेवा में कमी है।
मामले में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर को प्रतिवादी बनाया गया था। कलेक्टर का कहना था कि मंदिर प्रबंध समिति में दर्शन के काम के लिए दूसरे लोग तैनात हैं। वहीं रोपवे संचालक कंपनी ने अत्यधिक भीड़ को इसकी वजह बताई।