
अधिकारी भोपाल के नशे की 'रसोई' बनने की बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति मान रहे हैं। भोपाल से ब्यावरा (राजगढ़) से होते झालावाड़ से राजस्थान में प्रवेश किया जा सकता है। वहां से हरियाणा और दिल्ली तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इनके रास्तों में कहीं चेक पोस्ट नहीं है। फ्लाईओवर नहीं होने के कारण वाहन शहर के बाहर से निकल जाते हैं। यह ड्रग माफिया के लिए बेहद सुरक्षित रास्ता है। इसी तरह नागपुर होते हुए महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पहुंचा जा सकता है।
बगरोदा में हुई कार्रवाई में शामिल अधिकारी आर.के. सिंह ने बताया कि जांच और पूछताछ में यह सामने आया कि फैक्ट्री शहर से बाहर सुनसान इलाके में चलाई जा रही थी। पुलिस भी वहां बहुत कम ही पहुंचती थी। बंद पड़ी एक फैक्ट्री को किराये पर लेकर उसमें यह अवैध कारोबार चल रहा था। आरोपित हाईवे से होकर सीधे बाहर निकल जाते थे ताकि स्थानीय स्तर पर पकड़ में न आएं। खास बात यह भी रही कि गिरोह जिस शहर में ड्रग तैयार करता था, वहां और आसपास सप्लाई नहीं करता था। मामले में गिरोह का सरगना सहित तीन आरोपित अब भी फरार हैं।
पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया कि जुलाई में क्राइम ब्रांच ने मादक पदार्थ तस्कर यासीन अहमद उर्फ ‘मछली’ और उसके चाचा शाहवर अहमद को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि दोनों अंतरराष्ट्रीय तस्करों से भी जुड़े हैं। इस नेटवर्क से जुड़े दिल्ली के नाइजीरियन युवक और थाइलैंड की महिला को भी गिरफ्तार किया गया। भोपाल में ड्रग सप्लाई का काम थाई महिला के जरिये किया जा रहा था। यासीन से मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपित भी पकड़े गए। यासीन पार्टी डीजे का काम करता था और इसी बहाने विदेशी तस्करों से संपर्क में आकर नशा मंगवाता था।