
पेड़ों की जगह ठेले-दुकानें व बस स्टॉप, निगम ऑफिस के बाहर ही अतिक्रमण
दोनों ओर से सड़क लॉक होने के कारण ट्रैफिक में आती है रुकावट
जो हरियाली हमेशा से भोपाल की पहचान रही, वो धीरे-धीरे खत्म हो रही है। पिछले 35 साल से ग्रीन बेल्ट अतिक्रमण की चपेट में है। कई जगह तो ग्रीन बेल्ट पर पूरी बस्ती बनी हुई है।
राजधानी परियोजना की एक रिपोर्ट के अनुसार, शहर में ग्रीन बेल्ट पर 691 अतिक्रमण हैं। 2023 में एनजीटी ने ये अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने दावा किया था कि 615 जगहों से अतिक्रमण हटाया गया है और 56 अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिए गए हैं।
लेकिन निगम बाद में कार्रवाई भूल गया। और जो कब्जे हटाए थे, वे भी दोबारा जम गए। 11 दिन पहले प्रशासन ने मैनिट के बाहर ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाया था। वहां फिर अतिक्रमण हो चुका है। शाहपुरा लेक जैसी जगहों पर भी दोबारा स्ट्रीट फूड और फल-सब्जी के ठेले खड़े होने लगे हैं।
बीसीएलएल ने तो ग्रीन बेल्ट पर ही बस स्टॉप बना दिए हैं। एम्प्री से मिसरोद तक, आईआईएफएम, रायसेन रोड जैसे कई इलाकों में ऐसे बस स्टॉप बने हैं। सीपीए ने 1986 से 2021 तक 42 लाख पेड़ शहर में लगाए थे, लेकिन आधे शहर में अब ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण है।
नहर के पास ग्रीन बेल्ट पर रास्ते, कैम्पियन के बाहर हॉकर्स कॉर्नर
ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण से ये परेशानियां
शहर को सुंदर बनाना है तो अतिक्रमण हटाना जरूरी
1990 के बाद जब जमीन के दाम बढ़े, तब से अतिक्रमण की समस्या बढ़ गई है। शहर को सुंदर और स्मार्ट बनाना है तो अतिक्रमण हटना जरूरी है। रहवासी क्षेत्र में लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी आती है। ग्रीन बेल्ट को अतिक्रमण से बचाने के लिए यहां लोहे की कड़क फेंसिंग करनी चाहिए और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। -डॉ. सुदेश वाघमारे, पर्यावरण विशेषज्ञ
टीमें बनी हैं, ग्रीन बेल्ट पर बनी बस्ती को नोटिस जारी करेंगे
अतिक्रमण हटाने के लिए कलेक्टर नें टीमें बनाई हुई हैं। करीब 90 प्रतिशत शहर से अतिक्रमण हटाया गया है। ग्रीन बेल्ट पर बनी बस्ती और धार्मिक स्थलों को कलेक्टर द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे। -हरेंद्र नारायण, कमिश्नर, नगर निगम, भोपाल
हरियाली पर संकट
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, 1990 में भोपाल में करीब 66 फीसदी हरियाली थी, जो अब महज 6 फीसदी रह गई है। कई संस्थाओं के शोध में भी ये खुलासा हुआ है।