करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आम जनता जागरूक हो

Updated on 26-10-2021 05:15 PM

भोपाल   मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आम जनता से कहा कि करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आम जनता को जागरूक होना पड़ेगा। इस संबंध में कंपनी ने सुरक्षा संबंधी मापदंड जारी किए हैं। विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से विद्युत लाईनों से धरातल और भवनों से सुरक्षित दूरी आदि के लिए केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा निम्नानुसार मापदंड निर्धारित् हैं -

क्रं.            विवरण                                 एल.टी. लाईन                      11 के.व्ही. लाईन                 33 के.व्ही. लाईन

1.            ऐसा क्षेत्र जहाँ वाहन, टैफिक हो, वहाँ जमीन से कंडक्टर की दूरी, 4.6 मीटर, 5.2 मीटर,  5.2 मीटर

2.            सड़क के समानांतर विद्युत लाईनों के निचले कंडक्टर से जमीन की दूरी। 5.5 मीटर, 5.8 मीटर, 5.8 मीटर

3. सड़क क्रासिंग करती विद्युत लाईनों के निचले कंडक्टर की जमीन से दूरी। 5.8 मीटर, 6.1 मीटर, 6.1 मीटर

4. किसी मकान के ऊपर से गुजरने वाली लाईन के निचले कंडक्टर एवं मकान के सबसे ऊँपर हिस्से के बीच की दूरी , 2.5 मीटर, 3.7 मीटर, 3.7 मीटर,

5. किसी मकान के पास से गुजरने वाली लाईन के सबसे नजदीकी कंडक्टर की मकान से दूरी। 1.2 मीटर, 2 मीटर

6.लाईन एवं पेड़ की डाली के बीच की दूरी, 1.2 मीटर, 2 मीटर, 2 मीटर

आम जनता से अपील है कि अपने आवासीय परिसर अथवा स्थापनाओं से विद्युत लाइनों की दूरी उपरोक्तानुसार रखें। निम्नदाब और मध्यदाब स्थापनाओं में प्रायः व्यक्ति विद्युतमय चालक के सीधे सम्पर्क में आता है, जबकि उच्च दाब स्थापनाओं में वह विद्युतमय चालक से सीधे सम्पर्क में आने के पूर्व ही फ्लेश ओव्हर डिस्टेंस में आने से स्पार्क हो कर झुलस जाता है। इस प्रकार दुर्घटना का घातक तथा गैर घातक होना दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के ‘‘डिग्री ऑफ बर्न्स’’ पर निर्भर रहता है। निम्नदाब अथवा मध्यदाब स्थापनाओं में सुरक्षा के लिए साधारणतया केवल फ्यूज लगाए जाते हैं। साधारण फ्यूज अपनी क्षमता से अधिक करंट बहने पर ही गर्म हो कर पिघल जाता है, इसमें कुछ समय लगता है और यही समय ‘‘दुर्घटनाग्रस्त’’ होने के लिए घातक सिद्ध होता है, परन्तु अर्थिंग सही हो तो फ्यूज अतिशीघ्र उड़ जाता है। इसी कारण से विद्युत स्थापनाओं में अर्थिंग व्यवस्था अति महत्वपूर्ण हो जाती है। घरेलू स्थापनाओं में विद्युत दुर्घटनाएँ मुख्यतः वायरिंग एवं फिटिंग में खराबी आने से तथा उपकरणों में खराबी आने से लीकेज या शार्ट-सर्किट के कारण होती है। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे आई.एस.आई. मार्क के उपकरण ही उपयोग में लाएँ।

- विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान दें

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आम लोगों को विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देने को कहा है। कंपनी ने कहा है कि भवन निर्माण, कॉलोनी के निर्माण और रोड के विस्तार के दौरान अक्सर यह देखने में आया है कि बिजली के खम्बों को सड़क के बीच में खड़ा कर दिया जाता है या कालोनी के विद्युतीकरण के दौरान कालोनाइज़र अपनी सुविधा से बिजली के खम्बों को लगा देता है तथा सड़क विस्तार के दौरान सड़क को ऊँचा कर दिया जाता है। इस दौरान विद्युत सुरक्षा के मापदण्डों का ध्यान नहीं रखा जाता है। कई बार यह पाया जाता है कि रोड ऊँची कर ली जाती है परन्तु बिजली के खम्बों से रोड के बीच का विस्तार और दूरी को ध्यान में नहीं रखा जाता तथा सुरक्षा के नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। फलस्वरूप दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और कभी-कभी दुर्घटनाएँ भी हो जाती है। इस संबंध में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों से कहा है कि इस प्रकार के नियम विरूद्ध कार्यों की रोकथाम की जाए और मैदानी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में विद्युत सुरक्षा एवं विद्युत प्रदाय सुचारू रखने के लिए विद्युत अधिनियम 2003 में जो प्रावधान दिए गए हैं, उनके अनुसार कार्यवाही की जाए।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि भवन निर्माण और विस्तार के दौरान यदि कोई भवन निर्माता/संस्था निर्धारित प्रावधान के अनुसार काम नहीं करता है तो संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग कराते समय यदि कहीं रोड, भवन, स्ट्रक्चर का निर्माण नियम विरूद्ध होता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उपभोक्ता, एजेन्सी और भवन स्वामी को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सुरक्षित अंतराल रखने हेतु रजिस्टर्ड नोटिस जारी करें तथा नोटिस की अवधि के दौरान सुरक्षित अंतराल बनाये रखने हेतु कार्यवाही नहीं किये जाने पर उसके विरूद्ध वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार त्वरित कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। नई लाइनों के निर्माण के दौरान रोड, भवन या स्ट्रक्चर से उक्त नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित अंतराल रखते हुए ही कार्य कराए जाएँ। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनने वाली सड़क मार्गों के ऊपर से गुजरने वाली लाइनों का अंतराल यदि प्रस्तावित सड़क के कारण कम हो रहा है तो विद्युत लाइन के खम्बों की ऊँचाई बढ़ाने का प्रस्ताव कम्पनी के प्रचलित नियमानुसार संबंधित एजेन्सी को नोटिस के साथ भेजें और साथ ही सुनिश्चित करें कि निर्धारित सुरक्षित अंतराल मेन्टेन करने के बाद ही उस लोकेशन पर सड़क निर्माण हों।

कंपनी ने कहा है कि सड़कों की बार-बार मरम्मत से सड़कों की ऊँचाई बढ़ने से लाइनों और सड़क के बीच अंतराल कम होता जाता है। अतः इस ओर विशेष ध्यान देकर ऐसी लोकेशनों पर लाइन की ऊँचाई बढ़ाने हेतु संबंधित एजेन्सी से सम्पर्क कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करें। नवीन कालोनियों में विद्युत प्रदाय करने के लिए रोड, वाटर सप्लाई, सीवेज लाइन आदि के निर्माण के साथ उपकेन्द्र तथा लाइनों का विस्तार भी प्राथमिकता के आधार पर हो ताकि भवन निर्माण का कार्य लाइनों से सुरक्षात्मक दूरी रखते हुए नियमानुसार हो सके।


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