
भोपाल के अनंतपुरा कोकता में पशुपालन विभाग की 65 एकड़ जमीन के सीमांकन के बाद रिपोर्ट बुधवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को सौंप दी गई। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पशुपालन विभाग की 6 एकड़ जमीन पर ही 12 से 15 मकान, कई प्लाट, हॉस्टल, पेट्रोल पंप, दुकानें, स्कूल, कॉलोनी के रास्ते और कृषि कार्य का अतिक्रमण है। जिनका कब्जा है, अब उन्हें नोटिस देने की कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर सिंह नेबताया कि जमीन के मामले की रिपोर्ट एसडीएम-तहसीलदार ने बताई है। शूटर्स वाली रिपोर्ट भी जल्द देने को कहा है। इन मामलों में नियमानुसार ही कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी बायपास (रायसेन रोड) का बड़ा हिस्सा पशुपालन विभाग की जमीन पर बन गया। खसरे में दर्द होने से किसानों को मुआवजा भी नहीं देना पड़ा।
रिपोर्ट को छुपा रहे अफसर, खुलासा नहीं जमीन के इस मामले की जानकारी के लिए अफसरों से संपर्क करना चाहा, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव करना ही बंद कर दिया है। ऐसे में जांच भी सवालों के घेरे में आ रही हैं। जब निष्पक्ष रूप से जांच की गई है तो रिपोर्ट को छुपाने का क्या मकसद है? इसे लेकर भी चर्चा का माहौल है।
रिपोर्ट में यह सामने आया सूत्रों के अनुसार, डायमंड सिटी समेत आसपास की जुड़ी हुई कॉलोनियों में कब्जा सामने आया। सबसे ज्यादा कब्जा डायमंड सिटी में मिला। यहीं पर ज्यादातर घर हैं। विभाग की जमीन पर नगर निगम का कब्जा भी मिला है। इसे लेकर बीच का रास्ता निकाला जा रहा है। निगम इस जमीन के बदले पशुपालन विभाग को दूसरी जमीन भी दे सकता है।
आगे यह होगी कार्रवाई सीमांकन के बाद 11 पटवारियों की टीम ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इसमें बताया गया है कि किस रकबे में किसका और कितना कब्जा है? यह रिपोर्ट एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा ने कलेक्टर को पेश की। अब चिंह्नित कब्जाधारियों को पशुपालन विभाग से नोटिस भेजे जाएंगे। इसी बीच मंगलवार को लोगों ने एसडीएम ऑफिस पहुंचकर गुहार लगाई थी।
इसलिए किया गया था सीमांकन 34 साल बाद पशुपालन विभाग को सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में बंद है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 30 जुलाई और फिर 21 अगस्त को जिला प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए जाना सामने आए। इस जमीन की कीमत सवा सौ करोड़ रुपए आंकी गई।
इसी बीच पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा को एक आवेदन दिया, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर भी कब्जा हो सकता है। इसलिए सीमांकन किया जाए। प्रशासन ने पड़ताल की तो कब्जे की बात सही निकली। इसके बाद मछली परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। इन्हें भी सीमांकन के दौरान मौजूद रहने को कहा गया था। हालांकि, मछली परिवार की तरफ से वकीलों ने अपना पक्ष भी रखा। कहा कि जमीन पर उनका कब्जा नहीं है।