भोपाल : मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम भोपाल के प्रबंध निदेशक डॉ नवनीत मोहन कोठारी ने आज कहा अतीत में समाज में तस्करी को ग्लैमराइज किया जाता रहा है।इसमें कुछ लोग टैक्सस चोरी करते है और अवैध गतिविधियों में तस्करी के पैसे का इस्तेममाल करते है। तस्करी से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है बल्कि अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।तस्करी से संबंधित खतरों और जोखिमों के बारे में जागरूकता लाना अतिआवश्यक है।
फिक्की कास्केड अर्थव्यवस्था को नष्ट करने वाली तस्करी और जालसाजी जैसी गतिविधियों के खिलाफ समिति की ओर से जालसाजी और तस्करी से निपटने के लिए निवारकरण नीतियां विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉ कोठारी ने कहा जालसाजी एक बड़ी समस्या है विशेष रूप से एफएमसीजी जैसे उपभोक्ता उत्पादों के मामले में जहां 25.30 प्रतिशत उत्पााद नकली हैं।जालसाजी और तस्करी से प्राप्त धन को अवैध और नापाक उद्देश्यों में प्रयोग किया जाता है।पैकेज्डय उत्पादों के प्रचलन ने जालसाजी को आसान बना दिया है। इससे जालसाज गुणवत्ता के मानकों से बच निकलते हैं।राष्ट्रीय हितों के लिए घातक गतिविधियों की फंडिंग के स्रोत के रूप में भी तस्करी काम करती है।
केंद्रीय जीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के वरिष्ठ उपायुक्त महेश कुमार यादव ने कहा वैश्विक बाजार में तस्करी और जालसाजी से संबंधित अपराध कई गुना बढ़ गए हैं जिससे सरकार उद्योग समाज और उपभोक्ताओं को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।तस्कर अवसरवादी होते हैं जो आर्थिक लाभ के लिए बाजार का फायदा उठाना चाहते हैं।
शियास ए डीआईजी ;आई सीआईडी पीएचक्यू भोपाल ने कहा तस्करी की गतिविधियों के कारण अपराधी टैक्सस शुल्क और सीमा शुल्क से बच जाते हैं जिससे सरकारों को राजस्व का काफी नुकसान होता है।तस्करी से आर्थिक नुकसान होता है।इसके प्रभावी समाधान के लिए पर्याप्त दंड की व्यवस्थाओं की कमी है।