भोपाल : खान मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव और सीजीपीबी के अध्यक्ष वी एल कांथा राव ने कहा है कि खनन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश में अव्वल नंबर पर है। वी एल कांथा राव ने केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा आज भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में आयोजित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), 63 वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (सीजीपीबी) की बैठक में अध्यक्षता की। इस मौके पर श्री राव ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर के परिसर में जीएसआई की गतिविधियों को प्रदर्शित करनेवाली "खनन और उससे आगे" विषय पर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
श्री राव ने कहा कि खदानों की नीलामी की रिपोर्ट मे मध्य प्रदेश सबसे आगे है। हालांकि आमदनी के क्रम में प्रथम स्थान पर ओडिशा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए खदानों की नीलामी को जल्द से जल्द से ऑपरेशनलाइज करने के प्रयास किए जाएंगे। संवाददाताओं के सवालों पर उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण में खान मंत्रालय का भी थोड़ा योगदान है। मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों के चयन के लिए एनआईआरएम (नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स) की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान द्वारा पत्थरों के चयन के दौरान उसकी शक्ति और अवधि का निर्धारण किया जाता है।
यहां आयोजित प्रदर्शनी में जीएसआई, पीएसयू, डीएमएफ, प्रमुख खनन कंपनियां, निजी अन्वेषण एजेंसियां, स्टार्टअप, मध्य प्रदेश सरकार के साथ ही बाल्को और टाटा स्टील और ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनी का अवलोकन भोपाल के इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों द्वारा भी किया गया।
63 वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (सीजीपीबी) की बैठक में अपने संबोधन के दौरान खान सचिव और सीजीपीबी के अध्यक्ष श्री वी.एल. कांथा राव ने खनन क्षेत्र में वैज्ञानिक कठोरता के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने जीएसआई और अन्य अन्वेषण एजेंसियों से अन्वेषण की गति बढ़ाने का आग्रह किया और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज पर जोर दिया। उन्होंने राज्य सरकारों से एनएमईटी फंडिंग के माध्यम से अन्वेषण परियोजनाओं के कार्यान्वयन में और अधिक आक्रामक होने का भी आग्रह किया। उन्होंने हितधारकों से उपलब्ध भूविज्ञान डेटा का उपयोग करने का अनुरोध किया।
आगामी फील्ड सीजन वर्ष 2024-25 के लिए प्रस्तावित वार्षिक कार्यक्रम को चर्चा के लिए बोर्ड के समक्ष रखा गया था। आगामी वर्ष 2024-25 के दौरान जीएसआई ने वर्ष 2024-25 के लिए लगभग 1055 वैज्ञानिक कार्यक्रम तैयार किए हैं, जिसमें 392 खनिज विकास परियोजनाएं (जी2; G3;G4; और ऑफशोर एक्सप्लोरेशन) जिसमें निकट भविष्य में नीलामी योग्य खनिज ब्लॉक उत्पन्न करने की क्षमता है। खनिज पूर्वाग्रह या खनिज खोज परियोजनाओं (आरएमटी; अनुसंधान परियोजना; सी-एमएपी; जीटी; एमपीए; मल्टीस्पेक्ट्रल/हाइपरस्पेक्ट्रल परियोजनाएं) वाली 133 परियोजनाएं जिनमें जी4 चरण में भविष्य की खोज के लिए आशाजनक क्षेत्र उत्पन्न करने की क्षमता है। अन्वेषण गतिविधि के अंतर्गत, रणनीतिक और महत्वपूर्ण और उर्वरक खनिजों की खोज पर प्रमुख जोर दिया गया है। वर्ष 2024-25 के लिए इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज वस्तुओं जैसे आरईई, आरएम, ग्रेफाइट, लिथियम, वैनेडियम और पीजीई आदि पर कुल 188 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो पिछले वर्ष के लक्ष्य से लगभग 50% अधिक है।
श्री वी.एल. कांथा राव द्वारा बैठक में जोशीमठ टाउनशिप, चमोली जिले की भूवैज्ञानिक और भू-तकनीकी जांच पर रिपोर्ट का भी अनावरण किया गया। इस अवसर पर जीएसआई के अन्य महत्वपूर्ण प्रकाशनों के साथ नवगठित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का खनिज मानचित्र भी जारी किया गया।
बैठक में भारत सरकार, खान मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री संजय लोहिया और जीएसआई के महानिदेशक श्री जनार्दन प्रसाद के अलावा विभिन्न मंत्रालयों, राज्य खनन एवं भूविज्ञान निदेशालयों, सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, निजी खनन उद्योग के प्रतिनिधियों, खनन संघों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।