मणिपाल हॉस्पिटल नई दिल्ली भोपाल में यह ई-ओपीडी अक्षय हॉस्पिटल, ऋषि नगर, भोपाल के सहयोग से आयोजित करेगी

Updated on 24-06-2020 09:33 PM

भोपाल / ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों सहित भोपाल क्षेत्र में दिल की बीमारियों जैसे गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के काफी मामले सामने आ रहे हैं। क्षेत्र में बढ़ते एनसीडी के मामलों के मद्देनजर, नई दिल्ली स्थित मणिपाल हॉस्पिटल्स ने भोपाल के लोगों को रोकथाम, निदान और अब उपलब्ध विश्व स्तरीय सुविधाओं के बारे में जागरूक करने के लिए कमर कसली है। मणिपाल हॉस्पिटल्स शनिवार (27 जून को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक) एक कार्डियो ईओपीडी टेलीपरामर्श का आयोजन करेगा। यह सेवा अक्षय हॉस्पिटल, ऋषि नगर के सहयोग से आयोजित की जाएगी।

क्षेत्र में हार्ट फेल होने जैसे जान लेवा हृदय रोगों के बढ़ते मामलों की वजह से, मणिपाल हॉस्पिटल शहर में नियमित मासिक ओपीडी आयोजित करने के लिए प्रेरित हुआ है, जिसमें कोविड-19 और लॉकडाउन के कारण देरी होती आई है। इस बीच, मणिपाल हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली ने ई-ओपीडी सुविधा शुरू की है जो लाभप्रद है और इससे इस क्षेत्र के रोगियों को विशेषज्ञों की राय लेने में मदद मिलेगी और वे आगे के निदान और उपचार की योजना बना सकते हैं। यह सेवा का उद्देश्य हार्ट फेल और अन्य आधुनिक सर्जरी की उपलब्धता के बारे में जागरूकता पैदा करना है। 
  
भोपाल में ई-ओपीडी के शुभारंभ की घोषणा करते हुए मणिपाल हॉस्पिटल नई दिल्ली में नैदानिक सेवाओं के प्रमुख, कार्डिएक साइंसेज के प्रमुख और मुख्य कार्डियो-वैस्कुलर सर्जन, डॉ. वाई.के. मिश्रा ने कहा कि हार्ट फेल होने की बढ़ती घटनाएं बड़ी चिंता का विषय हैं। हम ई-ओपीडी का आयोजन भोपाल के लोगों को जागरूक करने के लिए भी कर रहे हैं, जो तंबाकू, धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज और हाइपरटेंशन की वजह से हृदय रोगों जैसे गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का सामना कर रहे हैं।

डॉ. मिश्रा ने कहा, “हार्ट फेल होने सहित हृदय रोग भारत में सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों में से एक है और देश में होने वाली कुल मौतों में कई इसकी वजह से होती हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ बदलती जीवन शैली, भोजन की आदतों, शहरी क्षेत्रों में उच्च तनाव, बहुत ज्यादा शराब पीने और नशीले पदार्थों के उपयोग को इसकी बड़ी वजह मानते हैं, साथ ही साथ युवाओं में हार्ट फेल होने का जोखिम भी बढ़ा है हार्ट फेल होने की बढ़ती घटनाएं बड़ी चिंता का विषय है। हार्ट फेल होने का मतलब है कि दिल अपनी क्षमता अनुसार पर्याप्त खून पंप नहीं कर पा रहा है इसमें बांई तरफ या दांई तरफ का दिल हो सकता है या फिर दोनों तरफ का।”विशेषज्ञ के अनुसार, हार्ट फेल होने के सबसे महत्वपूर्ण कारण लंबे समय तक रहने वाला इस्केमिक हार्ट डिजीज, वाल्वुलर हार्ट डिजीज, डायबिटीज मेलिटस और हाइपरटेंशन हैं।

डॉ. मिश्रा ने कहा, “हार्ट फेल होने की समस्या बढ़ जाने पर औषधीय उपचार शायद काम न कर पाए और अंततःरोगी को हार्ट फेलर का इलाज कराने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट या लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (स्ट।क्) और टोटल आर्टिफिशियल हार्ट (ज्।भ्) जैसा सर्जिकल इलाज कराना पड़ सकता है। मणिपाल हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली को हाल ही में हार्ट ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिला है। इसमें यह इलाज करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।
 
 डॉ. मिश्रा ने बताया, जब दवा काम नहीं आती है, तो हम गंभीर हार्ट फेल से ग्रस्त मरीजों को हार्ट ट्रांसप्लांट कराने की सलाह देते हैं, अगर उन्हें ट्रांसप्लांट के लिए कोई अन्य समस्या न हो जैसे कि इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज्ड स्थिति, गंभीर संक्रमण, और फेफड़े की गंभीर बीमारी।हार्ट ट्रांसप्लांट में, यह ब्रेन डेड व्यक्ति का दिल लेते हैं। इसके बाद उस दिल केा मरीज के बीमार दिल की जगह ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है।सर्जरी के बाद, ज्यादा तर मरीजों को आमतौर पर 4-5 दिनों के बाद शिफ्ट कर दिया जाता है और 10-15 दिनों में उन्हें छुट्टी दे दी जाती है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी चुनौती डोनर की उपलब्धता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय रोगों और आधुनिक इलाज की उपलब्धता के बारे में जागरूकता पैदा करना समय की मांग है।मणिपाल हॉस्पिटल्स, जिसमें हृदय रोगों के लिए उच्च गुणवत्ता, अत्याधुनिक और रोगी-केंद्रित सुविधाओं वाला उत्कृष्टता केंद्र है,  वह बेहतर इलाज की जरूरत वाले गंभीर हृदय समस्याओं के रोगियों को अत्याधुनिक उपचार प्रदान करेगा ई-ओपीडी से इस क्षेत्र के दिल की बीमारी के रोगियों को विशेषज्ञों से परामर्श करने में मदद मिलेगी और इस प्रकार वे आगे का निदान और इलाज कर पाएंगे।
 
  विशेषज्ञों ने लोगों को दिल की समस्याओं से बचने के लिए जीवनशैली सुधारने और आहार और व्यायाम पर ध्यान देने की सिफारिश की है।चिकित्सकीय रूप से, चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ,  उन्नत ट्रांसप्लांट और उपकरण जानलेवा हार्ट फेलर से पीड़ित लोगों के लिए वरदान की तरह आए हैं।

वर्तमान में, भोपाल में उन्नत और प्रभावी इलाज वाली हृदय संबंधी सेवाओं के लिए पर्याप्त उन्नत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।दिल की बीमारियों के बढ़ते मामले बताते हैं कि इस क्षेत्र में उपचार और देखभाल के लिए विशेष रूप से ध्यान देने और उन्नत सुविधाओं की जरूरत है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 03 March 2026
भोपाल : भारत में बेहतरीन नेत्र चिकित्सा प्रदान करने के अपने संकल्प को मजबूत करते हुए, डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल ने भोपाल में अपना नया अत्याधुनिक नेत्र अस्पताल का शुभारंभ…
 21 February 2026
बेंगलुरु : भारत का पहला 100% एफडीआई-वित्तपोषित तृतीयक देखभाल अस्पताल, सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल ने आज अपने उन्नत और एकीकृत इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर एंड ब्लड डिसऑर्डर्स का शुभारंभ किया। यह समर्पित केंद्र सटीकता-आधारित, तकनीक-सक्षम…
 21 February 2026
इंदौर: भारत में महिलाओं और बच्चों के प्रमुख हॉस्पिटल, मदरहुड हॉस्पिटल्स ने इंदौर में अपना दूसरा हॉस्पिटल राजीव गांधी चौक पर शुरू किया। यह हॉस्पिटल मध्य भारत में महिलाओं और…
 08 February 2026
भोपाल : हेल्दी वर्ल्ड विज़न फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस का आयोजन 7–8 फरवरी 2026 को पंडित खुशीलाल शर्मा आयुष ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ…
 08 February 2026
भोपाल : भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में देश के वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. ए के द्विवेदी ने कहा कि एनीमिया जागरूकता के क्षेत्र में वर्षों से चल रहा…
 04 February 2026
इंदौर।आँखों की सर्जरी के क्षेत्र में रोहित आई हॉस्पिटल, इंदौर फिर एक बार तकनीकी प्रगति की नई ऊंचाई छूने जा रहा है। रोहित आई हॉस्पिटल के एक्सपर्ट सर्जन अब अत्याधुनिक यूनिटी वीसीएस…
 03 February 2026
इंदौर। तेज़, सुरक्षित और कम दर्द वाले इलाज की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, सेंटर ऑफ वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल केयर (CVIC) द्वारा इंदौर में 7 और 8 फरवरी को सीवीआईसी इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी समिट 2026 का आयोजन किया जा…
 31 January 2026
इंदौर। 2026 के तीसरे दिन इंदौर में चिकित्सा विज्ञान का ऐसा भविष्य दिखाई दिया, जहां इंसानी अनुभव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साथ मिलकर इलाज की नई परिभाषा गढ़ते नजर आए। सुबह से…
 29 January 2026
भोपाल : स्ट्रोक के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, मरीज के बचने और रिकवरी की संभावनाओं को काफी हद तक तय करता है। इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन के मुताबिक, भारत में…
Advt.