भोपाल : क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल में तीन दिवसीय 'अंतर्विषयक विज्ञानों में अद्यतन प्रगति पर राष्ट्रीय सम्मेलन' (National Conference on Recent Advances in Interdisciplinary Science) का आयोजन किया गया। इस नेशनल कांफ्रेंस में देश की विभिन्न विश्वविद्यालय व शोध संस्थानों से पधारे अकादमिक विद्वानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोधपत्र विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किए। राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 70 शोध पत्र एवं पोस्टर शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए। समापन सत्र के मुख्य अतिथि व वक्ता भारतीय सूचना तकनीक संस्थान,भोपाल के निदेशक प्रोफेसर आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय शोध संस्थाओं को अपने गुणवत्तापूर्ण शोध से औद्योगिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने की क्षमता विकसित करनी होगी। इससे देश के प्रतिभा पलायन पर रोक लग सकेगी। चीन में अनुसंधान व विकास के सुधारों की चर्चा करते हुए उन्होंने भारतीय शोध संस्थानों में मौलिक शोध को बढावा देने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विशिष्ट अतिथि के रुप में पधारे भारतीय विज्ञान संस्थान,बेंगलुरु के जेसी बोस फेलो प्रोफेसर शिवा उमापति , भारतीय विज्ञान शिक्षा अनुसंधान संस्थान भोपाल के निदेशक प्रो.गोवर्धन दास एवं नार्थ उड़ीसा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.पी.के.चांद ने बीज वक्तव्य के रुप में अपने विचार प्रस्तुत किए। डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में तकनीकी विज्ञान विभाग के निदेशक प्रोफेसर मुकुल सी.बोरा ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने सारस्वत व्याख्यान से उपस्थित शोधकर्ताओं को आयुर्वेद,शासन कला,धातु विज्ञान एवं अर्थव्यवस्था पर प्रचीन भारत की उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
नेशनल कांफ्रेंस में आए अतिथियों का स्वागत संस्थान के प्राचार्य प्रोफेसर जयदीप मंडल ने किया। इस अवसर पर विज्ञान शिक्षा व गणित विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर रश्मि सिंघई ने कान्फ्रेंस के संयोजक डाॅ.चक्रधर बेहरा को कांफ्रेंस के सफल आयोजन हेतु धन्यवाद दिया। विस्तार शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर चित्रा सिंह ने उपस्थित अतिथियों शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों का राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिभाग करने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर डाॅ.संतोष कुमार, डाॅ.मनोज मण्डल,डाॅ.मुकेश कुमार, डाॅ.अल्का सिंह सहित संस्थान के प्राध्यापक व कर्मचारीगण उपस्थित थे।